जानिए पुलिसवालों को क्यों घर भेज रही है उत्तराखंड पुलिस

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: August 26, 2019, 12:35 PM IST
जानिए पुलिसवालों को क्यों घर भेज रही है उत्तराखंड पुलिस
राज्य पुलिस ने सात पहाड़ी ज़िलों में होम डिस्ट्रिक्ट वापस जाने का विकल्प इसलिए दिया था क्योंकि वहां जाने को पुलिसकर्मी आसानी से तैयार नहीं होते थे.

राज्य में पलायन पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस महकमे ने पुलिसकर्मियों को होम डिस्ट्रिक्ट में वापस जाने का विकल्प दिया था.

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उत्तराखंड में पहाड़ों से पलायन सबसे बड़ी समस्या है. हालत तो यह है कि राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में ‘घोस्ट विलेज’ (Ghost Village) की संख्या बढ़ती जा रही है. घोस्ट विलेज यानि ऐसे गांव जहां अब आदमी पलायन (Palayan) कर गए हैं और वहां अब कोई बचा ही नहीं है. राज्य सरकार रिवर्स पलायन (Reverse Palayan) के लिए योनजाएं बना रही है तो उत्तराखंड पुलिस (Uttarakhand Police) ने बिना किसी शोर-शराबे के इस योजना पर काम करना शुरु कर दिया है. उत्तराखंड पुलिस में ऐसे कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो अपने-अपने घरों यानि गृह जनपद (Home District) में लौट रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि इससे पहाड़ के खाली होते गांव भी आबाद होंगे.

बेहद सफल योजना 

राज्य में पलायन पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस महकमे ने पुलिसकर्मियों को होम डिस्ट्रिक्ट में वापस जाने का विकल्प दिया था. राज्य पुलिस ने सात पहाड़ी ज़िलों में यह विकल्प इसलिए दिया था क्योंकि वहां जाने को पुलिसकर्मी आसानी से तैयार नहीं होते थे. ये ज़िले हैं- पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और देहरादून के पहाड़ी इलाक़े.

डीजी (लॉ एन्ड ऑर्डर) अशोक कुमार ने न्यूज़ 18 से बात करते हुए बताया कि ट्रायल पर शुरु की गई यह स्कीम बहुत सफल हुई. न सिर्फ़ ऐसे ज़िलों और थानों में पुलिसकर्मी जाने को तैयार हो गए जहां ट्रांस्फ़र सज़ा माना जाता था बल्कि अब इसका विस्तार करने की मांग भी की जा रही है. टिहरी, पौड़ी और अल्मोड़ा ज़िले के लिए भी गृह जनपद में ट्रांस्फ़र की योजना शुरु करने की मांग की जा रही है.

रिवर्स पलायन की शुरुआत 

डीजी (लॉ एन्ड ऑर्डर) ने बताया कि अब तक 500 पुलिसकर्मियों को पहाड़ों में अपने गृह जनपदों में वापस  भेजा जा चुका है. जो पुलिसकर्मी अपने गृह जनपदों में लौटे हैं उनमें से बहुत से अब वापस आने को तैयार नहीं हैं और वहीं बसने की सोचने लगे हैं. इस तरह यह रिवर्स पलायन की शुरुआत भी मानी जा सकती है.

दरअसल उत्तराखंड के लिए पलायन की समस्या कितनी बड़ी है यह इससे समझा जा सकता है कि राज्य निर्माण की मांग इसीलिए की गई थी कि लोगों को पहाड़ में ही रोज़गार मिल जाए और युवाओं को पलायन न करना पड़े. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहाड़ की जवानी को पहाड़ के काम आने के लिए काम करने का वादा कर गए हैं. जो भी राज्य सरकारें आई हैं वह पलायन रोकने के वादे पर आई हैं और बीजेपी का वादा तो पांच साल (2022 तक) रिवर्स पलायन करवाने का था. उत्तराखंड पुलिस से छोटी ही सही लेकिन शुरुआत हो गई है. राज्य सरकार के लिए यह फ़ॉर्मूला काम का हो सकता है.
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First published: August 26, 2019, 12:10 PM IST
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