केंद्र सरकार की ये योजना उत्‍तराखंड के लिए बनी 'मुसीबत', पहाड़ों के दरकने की रफ्तार हुई तेज

जमीन हकीकत ये है कि जिन 29 प्रमुख लैंडस्लाइड जोन को डीपीआर में शामिल कर ट्रीटमेंट के लिए बजट की व्यवस्था कर ली गई थी, उसमें से सिर्फ तीन पर काम शुरू हुआ है.

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: August 6, 2019, 8:14 PM IST
केंद्र सरकार की ये योजना उत्‍तराखंड के लिए बनी 'मुसीबत', पहाड़ों के दरकने की रफ्तार हुई तेज
आधे-अधूरे काटे गए ये पहाड़ बरसात में दरकने लगे हैं.
Sunil Navprabhat
Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: August 6, 2019, 8:14 PM IST
उत्तराखंड में पहाड़ों का दरकना आम बात है, लेकिन कुछ स्थान जैसे नासूर बन गए. उत्तरकाशी का नालूपानी, रूद्रप्रयाग का सिरोबगड़ और चमोली का लामबगड़ इसके ज्वलंत उदारहण हैं और यहां पहाड़ बारूद की तरह फट पड़ता है. चारधाम रोड परियोजना के तहत ऐसे 29 गंभीर लैंडस्लाइड एरिया डीपीआर में शामिल किए गए और इनके उपचार के लिए धन की व्यवस्था भी कर दी गई, लेकिन अब सड़क कटान के कारण ऐसे ही दर्जनों लैंडस्लाइड जोन और सक्रिय हो गए हैं. यकीनन अब इनके उपचार का क्या होगा ये एक बडी समस्या है.

चारधाम रोड परियोजना के तहत 900 किलोमीटर लंबी सड़क
उत्तराखंड में चारधाम रोड परियोजना के तहत 900 किलोमीटर लंबी सड़कों को दस मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है. इसके लिए पेड़ों और पहाड़ों को काटा जा रहा है. जबकि आधे-अधूरे काटे गए ये पहाड़ बरसात में दरकने लगे हैं और दर्जनों स्थानों पर नए स्लाइडिंग जोन डेवलेप हो गए हैं, जो भविष्य के लिए नासूर साबित हो सकते हैं.

उत्तराखंड में चारधाम रोड परियोजना के तहत 900 किलोमीटर लंबी सड़कों को दस मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है.


यमनोत्री हाईवे पर डाबरकोट नामक स्थान पर सक्रिय हुआ लैंडस्लाइड जोन इसका एक ताजा उदाहरण है. यहां सड़क से करीब पांच सौ मीटर ऊपर पहाड़ी से भू-स्खलन हो रहा है. इसके अलावा रूद्रप्रयाग रूट पर फरासू में भी लैंडस्लाइड एक्टिव हो गया है, तो पिथौरागढ़ हाईवे पर दिल्ली बैंड समेत एक बड़ा क्षेत्र लैंडस्लाइड की जद में है.

लैंडस्लाइड जोन का भी नहीं हो पाया ट्रीटमेंट
जमीन हकीकत ये है कि जिन 29 प्रमुख लैंडस्लाइड जोन को डीपीआर में शामिल कर ट्रीटमेंट के लिए बजट की व्यवस्था कर ली गई थी, उनमें से अगर तीन स्पॉट को छोड़ दिया जाए तो अन्य 26 लैंडस्लाइड एरिया का ट्रीटमेंट अभी अधूरा पड़ा हुआ है.
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नए सिरे से बनानी होगी डीपीआर
लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता राजेंद्र शर्मा कहते हैं कि नए डेवलेप हो रहे लैंडस्लाइड जोन के लिए अब नए सिरे से प्लानिंग करनी होगी. चारधाम रोड परियोजना में काम कर रही कंपनियों को इनकी डीपीआर बनाने को कहा गया है और ये डीपीआर फिर मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट को भेजी जाएगी.

चारधाम रोड परियोजना के नोडल अफसर हरिओम शर्मा.


यमनोत्री हाईवे पर बनेगी भूमिगत मोटर टनल
यमनोत्री हाईवे पर डाबरकोट लैंडस्लाइड जोन नासूर बन गया है. ये क्षेत्र चारधाम रोड परियोजना की डीपीआर बनने के बाद सक्रिय हुआ और करीब पांच सौ मीटर ऊपर से पहाड़ दरक रहा है. इसके चलते 2018 में करीब एक महीने तक चारधाम यात्रा बाधित रही थी और यहां हाईवे का कोई वैकल्पिक रूट भी उपलब्ध नहीं है. चारधाम रोड परियोजना के नोडल अफसर हरिओम शर्मा कहते हैं कि यहां पर कई बार सर्वे के बाद अब आठ सौ मीटर लंबी भूमिगत टनल बनाने का निर्णय लिया गया है. इसकी डीपीआर केंद्र सरकार को भेज दी गई है.

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First published: August 6, 2019, 8:04 PM IST
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