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उत्तराखंड के लिए 'नासूर' बने लैंडस्लाइड जोन, सरकार भी है बेबस

लैंडस्‍लाइड की वजह से उत्‍तराखंड का विकास ठहर जाता है.

लैंडस्‍लाइड की वजह से उत्‍तराखंड का विकास ठहर जाता है.

रूद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे (Rudraprayag-Gaurikund Highway) बेहद महत्वपूर्ण मोटर मार्ग है. इस मार्ग पर बांसवाड़ा में आए दिन पहाड़ दरक रहा है. इसके बंद होने से पूरी केदारघाटी, मदमहेश्वर घाटी और तुंगनाथ घाटी देश-दुनिया से अलग-थलग पड़ जाती है.

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विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड (Uttarakhand) में लैंडस्लाइड (Landslide) एक बड़ी समस्या है. मानसून में पहाड़ के पहाड़ दरकने से जन-धन का भारी नुकसान उत्तराखंड को उठाना पड़ता है, तो बडे पैमाने पर जनजीवन प्रभावित होता है. जबकि इसकी वजह से विकास की दौड़ में भी ये क्षेत्र सालों पीछे खिसक जाते हैं.

हम आपको राज्‍य के चार बडे लैंडस्लाइड जोन के बारे में बता रहे हैं, जिसके चलते उत्तराखंड के पहाडों में न सिर्फ गाड़ियों की रप्तार बल्कि आम जनजीवन भी जैसे थम सा गया है. सबसे पहले बात करते हैं NH-58 की.

NH-58 श्रीनगर-रूद्रप्रयाग हाईवे
ब्रदीनाथ और केदानाथ जैसे विश्व प्रसिद्ध धामों को जाने वाले इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर लामबगड़, सिरोबगड़, फरासू, जैसे कई लैंडस्लाइड जोन हैं, लेकिन इनमें जो सबसे अधिक सक्रिय है वो है फरासू स्थित लैंडस्लाइड जोन. यहां अलकनंदा नदी के समानातर राजमार्ग गुजरता है और अलकनंदा पर बनी जल विधुत परियोजना से जब भी पानी छोड़ा जाता है, तो ये पानी राजमार्ग पर नीचे से कटाव पैदा कर रहा है. यही नहीं हाईवे के काफी ऊपर से पहाड़ी लगातार दरक रही है और यहां आए दिन मार्ग बंद हो रहा है और इसके चलते केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ा रहा है.

यमनोत्री हाईवे पर डाबरकोट लैंडस्लाइड जोन
डाबरकोट नामक जगह पर पिछले दो साल से पूरा पहाड़ दरक रहा है. यहां नीचे यमुना नदी है तो हाईवे के पांच सौ मीटर ऊपर से पहाड़ टूट रहा है. यहां पर सबसे बड़ी समस्या है कि डायवर्जन का कोई भी विकल्प मौजूद नहीं है और आए दिन बंद हो रहे इस मार्ग के कारण यमनोत्री यात्रा तो बाधित हो ही रही है बल्कि यमुनाघाटी के सैकडों गावों को होने वाली दैनिक आपूर्ति भी प्रभावित हो रहा है. प्रशासन के पास यहां मलबा हटाकर सड़क खोलने के सिवाए कोई विकल्प नहीं है. हालांकि यहां आठ सौ मीटर लंबी भूमिगत मोटर टनल बनाने पर विचार चल रहा है, लेकिन इसे कब अमलीजामा पहनाया जाएगा, यह कहा नहीं जा सकता.

रूद्रप्रयाग- गौरीकुंड हाईवे पर बांसवाड़ा लैंडस्लाइड जोन
रूद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे बेहद महत्वपूर्ण मोटर मार्ग है. इस मार्ग पर बांसवाड़ा में आए दिन पहाड़ दरक रहा है. इसके बंद होने से पूरी केदारघाटी, मदमहेश्वर घाटी और तुंगनाथ घाटी देश-दुनिया से अलग-थलग पड़ जाती है. केदारनाथ जाने वाले यात्रियों को भी घंटों-घंटों तक मार्ग खुलने का इंतजार करना पड़ता है. हालांकि मार्ग की संवेदनशीलता को देखते हुए यहां वैकल्पिक रूट भी बनाया गया, लेकिन मंदाकिनी का बढ़ता जलस्तर यहां भी कटाव कर रहा है. नतीजा वैकल्पिक मार्ग भी बंद पड़ा हुआ है. जबकि इसी हप्ते सोमवार को ये मार्ग एक बार फिर बंद हुआ तो प्रशासनिक मशीनरी को मार्ग खोलने में रात के ढाई बजे गए. हैरानी की बात है कि पिछले डेढ़ माह से बांसवाड़ा में कमोबेश रोज पहाड़ दरक रहा है.

कुमाऊं में NH-125 टनकपुर-तवाघाट हाईवे
कुमाऊं मंडल में टनकपुर-तवाघाट हाईवे पर चारधाम रोड परियोजना का काम चल रहा है. इसके चलते धौन नामक जगह पर एक बडे क्षेत्र में लैंडस्लाइड जोन विकसित हो गया है, जो आए दिन भरभराकर ढह रहा है. इसके बंद होने से चंपावत और पिथौरागढ़ के दो जिल बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रहे हैं. समस्या ये है कि प्रशासन के पास मौजूदा हालात में इसका दूसरा कोई विकल्प नहीं है.

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