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Lockdown: उत्तराखंड में 62 हजार वाहन चालक परिवारों पर रोटी का संकट!

Lockdown: उत्तराखंड में 62 हजार वाहन चालक परिवारों पर रोटी का संकट!

उत्तराखंड में 62 हजार से ज्यादा टैक्सी मैक्सी वाहन हैं.

उत्तराखंड में 62 हजार से ज्यादा टैक्सी मैक्सी वाहन हैं.

पूरे उत्तराखंड में इस समय लगभग 62 हजार से ज्यादा टैक्सी मैक्सी वाहन हैं और इनसे राज्य सरकार को करोड़ों का राजस्व सरकारी खजाने में जाता है. इस साल कोरोना महामारी की चलते सरकारी खजाने में ग्रहण लगा गया है. मौजूदा समय में टैक्सी मैक्सी गाड़ियाँ खड़ीं है क्योंकि इनके पास कोई काम नहीं है.

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देहरादून. कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण इस बार उत्तराखंड के पर्यटन सेक्टर (Tourism Sctor) को बड़ा नुकसान हुआ है. इस सेक्टर में खासकर चारधाम यात्रा लगभग इस बार ठप हो गई है. इसके चलते यात्रा और पर्यटन से जुड़े टैक्सी और मैक्सी वाहन चालकों (Taxi Maxi Drivers)को काफी नुकसान हुआ है. हालत तो ये है कि आज ये टैक्सी संचालक सड़कों पर आ गए हैं क्योंकि इस बार न यात्रा हुई है और ना ही पर्यटक. अब ये टैक्सी मैक्सी वाहन चालक और इनके मालिक भुखमरी के कगार पर आ गए हैं. यही वजह है कि टैक्सी चालकों ने राज्य सरकार से राहत पैकेज की मांग की है. वहीं टैक्सी मैक्सी वाहन चालकों ने सरकार से मांग की है कि उनको टैक्स, बैंक लोन और फिटनेस पर रियायत दी जाए.

राज्य के खजाने पर भी लगा ग्रहण

पूरे उत्तराखंड में इस समय लगभग 62 हजार से ज्यादा टैक्सी मैक्सी वाहन हैं और इनसे राज्य सरकार को करोड़ों का राजस्व सरकारी खजाने में जाता है. इस साल कोरोना महामारी की चलते सरकारी खजाने में ग्रहण लगा गया है. मौजूदा समय में टैक्सी मैक्सी गाड़ियाँ खड़ीं है क्योंकि इनके पास कोई काम नहीं है. लॉक डाउन के चलते राज्य में सब कुछ बंद हैं. वैसे ये टैक्सी मैक्सी गाड़ियां अक्सर चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन में अच्छी खासी कमाई कर लेते थे लेकिन इस बार इनकी हालत ठीक नहीं है.

वाहन चालकों पर टैक्स का बोझ

वहीं वाहन चालकों का कहना है कि इस समय तो खाने के लाले पड़े हुए हैं. दून गढ़वाल ट्रैकर, जीप, कमांडर मालिक कल्याण संचालन समिति के सचिव राजेश कुमार कहते हैं कि इस समय गाड़ियां नहीं चल रही है लेकिन सरकार टैक्स वसूल रही है. इससे हम पर टैक्स का बोझ बढ़ता ही जा रहा है. लगभग 1600 रुपये रोड टैक्स देना पड़ता है. इसके साथ ही हर 6 महीने या 1 साल में फिटनेस टेस्ट चेकअप भी कराना होता है, उसके अलग से पैसे जाते हैं. वहीं राजेश कुमार कहते हैं कि इस समय आर्थिक व मानसिक परेशानियों से सभी वाहन स्वामी गुजर रहे हैं इसलिए इन्होंने राज्य सरकार से गुजारिश की है कि इनके वाहनों की बैंक एमआई,टैक्स,इंश्योरेंस में लगभग 1 साल के लिए छूट दी जाए. वहीं फिटनेस चेकअप को नि:शुल्क किया जाए.

Taxi
टैक्सी मैक्सी गाड़ियां अक्सर चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन में अच्छी खासी कमाई कर लेते थे लेकिन इस बार इनकी हालत ठीक नहीं है.


'राहत पैकेज नहीं मिला तो हालत बदतर हो जाएंगे'

वहीं टैक्सी चालक प्रमोद नौटियाल के मुताबिक अगर सरकार ने इनके लिए राहत पैकेज नहीं दिया तो आने वाले समय में यह अपनी गाड़ियां सड़कों पर नहीं दौड़ा पाएंगे क्योंकि इनकी आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो जाएगी. प्रमोद कहते हैं कि हालत तो ऐसे हो जाएंगे कि इनको अपनी गाड़ियां कबाड़ियों को बेचनी पड़ जाएगी.

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