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Loksabha Election 2019: उत्तराखंड की महिलाओं ने मतदान में पुरुषों को पीछे छोड़ा

Loksabha Election 2019: उत्तराखंड की महिलाओं ने मतदान में पुरुषों को पीछे छोड़ा

उत्तराखण्ड में भले ही पोल पर्सेंट 2014 के मुकाबले गिरा हो लेकिन इसकी ज्यादा जिम्मेदारी पुरुष मतदाताओं की दिख रही है क्योंकि महिलाओं ने जमकर वोटिंग की है.

उत्तराखण्ड में भले ही पोल पर्सेंट 2014 के मुकाबले गिरा हो लेकिन इसकी ज्यादा जिम्मेदारी पुरुष मतदाताओं की दिख रही है क्योंकि महिलाओं ने जमकर वोटिंग की है.

राजनीतिक दल कोई भी हो उनका फोकस महिलाओं पर रहा था और वह महिला वोटरों को मतदान केंद्र तक लाने में सफल भी रहे.

    उत्तराखण्ड की महिलाएं हिम्मत और हौसले के लिए एक अलग मुकाम रखती हैं. उत्तराखंड को मातृशक्ति के लिए भी जाना जाता है और यहां की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती रही हैं. 2019 के मतदान में भी एक बार फिर राज्य की महिलाओं ने अपनी शक्ति  साबित कर दी है. इस बार फिर वोट देने के मामले में पहाड़ की महिलाओं ने पुरुषों को पछाड़ दिया है.  न सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं बल्कि मतदान में भी महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले काफ़ी बढ़त बना ली है.

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    उत्तराखण्ड में भले ही पोल पर्सेंट 2014 के मुकाबले गिरा हो लेकिन इसकी ज्यादा जिम्मेदारी पुरुष मतदाताओं की दिख रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि महिलाओं ने जमकर वोटिंग की है. पहाड़ से लेकर मैदान तक उत्तराखण्ड की महिलाओं ने 5 लोकसभा सीट पर रिकॉर्ड वोटिंग की है.

    2014 के मुकाबले इस बार पड़े वोट में महिलाओं का वोटिंग पर्सेंटेज बढ़ा है. टिहरी,  उत्तरकाशी, पौड़ी, उधम सिंह नगर, हरिद्वार की कई लोकसभा सीट पर महिला मतदाता वोट डालने में पुरुषों से आगे रही है.

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    पहाड़ में उत्तरकाशी, पौड़ी और ऊधम सिंह नगर ज़िले में टॉप 3 विधानसभा क्षेत्रों में महिला वोटर्स टॉप पर रही हैं. एक नज़र इन विधानसभा सीटों पर...























    विधानसभा सीट पुरुष महिला
    पुरोला 63.85 64.82
    श्रीनगर 45.70 60.70
    खटीमा 69.55 76.33

    राजनीतिक विश्लेशकों का मानना है कि इसके पीछे वजह उत्तराखण्ड की महिलाओं का हर काम को निष्ठा के साथ करने का जज्बा है. राजनीतिक विश्लेषक संज्ञा राय कहती हैं कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, उज्जवला जैसी बहुत सी योजनाएं महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई थीं. राजनीतिक दल कोई भी हो उनका फोकस महिलाओं पर रहा था और वह महिला वोटरों को मतदान केंद्र तक लाने में सफल भी रहे.

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    ख़ास बात यह है कि हाल ही में हुए चुनावों में गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी महिला वोटिंग प्रतिशत ज्यादा था. उत्तराखण्ड में भी महिलाओं की राजनीतिक समझ बेहतर हुई है. कहा जाता है कि एक लड़की के पढ़ने का अर्थ होता है पूरे परिवार का पढ़ना, इसी तर्ज पर कहा जा सकता है एक महिला के मताधिकार के प्रति जागरुक होने का अर्थ होगा पूरे परिवार का जागरुक होना. लोकतंत्र के लिए यह बहुत अच्छा संकेत है.

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    Tags: Uttarakhand Lok Sabha Elections 2019, Uttarakhand news, Uttarakhand Women

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