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तेरा है पर मेरा है... कांग्रेस में भी हैं महेश नेगी की जड़ें, इसीलिए यौन शोषण प्रकरण पर शांत सा है विपक्ष

महेश नेगी पर यौन शोषण के आरोपों पर कांग्रेस की चुुप्पी से राजनीतिक हलकों में सवाल उठाए जा रहे हैं.

महेश नेगी पर यौन शोषण के आरोपों पर कांग्रेस की चुुप्पी से राजनीतिक हलकों में सवाल उठाए जा रहे हैं.

2004 में ज़िला खेल अधिकारी के पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस के टिकट पर नेगी ने द्वाराहाट विधानसभा से उपचुनाव लड़ा था.

देहरादून. यौन शोषण के गम्भीर आरोपों में फंसे भाजपा विधायक महेश नेगी को लेकर आने वाले दिनों में पार्टी  की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. भाजपा इसे अच्छे से जानती है इसलिए पार्टी इस पूरे मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. इस मुद्दे पर पार्टी का खुलकर न बोलना भी डैमेज कंट्रोल की इसी रणनीति का एक हिस्सा है. यह तो समझ आता है लेकिन सवाल विपक्ष की चुप्पी को लेकर भी उठ रहे हैं, वह भी तब जबकि राज्य में विधानसभा चुनाव में डेढ़ साल भी नहीं रह गया है.

हरक सिंह को देना पड़ा था इस्तीफ़ा 

इस मामले को समझने के लिए पहले आपको साल 2003-04 में ले चलते हैं. तब सरकार कांग्रेस की थी और सुर्खियों में थी जेनी. इस महिला ने सत्ताधारी कांग्रेस के कद्दावर मंत्री हरक सिंह रावत पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे और उसे अपनी बच्ची का पिता बताया था. तब विपक्ष में रही भाजपा ने इतना दबाव बनाया था कि हरक सिंह रावत को इस्तीफा देना पड़ा था.

आज स्थितियां कमोबेश वैसी ही हैं लेकिन भूमिकाएं बदली हुई हैं. इस बार भाजपा सत्ता में है और यौन शोषण के आरोपों के घेरे में हैं उसके विधायक महेश नेगी लेकिन, विपक्ष में बैठी कांग्रेस के सुरों से वो तीखापन सिरे से गायब है जो सत्तापक्ष की चिंता बढ़ा सकता है. भाजपा के लिए यह सबसे राहत की बात है.

कांग्रेस से शुरु की थी राजनीति

इसकी वजह भी है... दरअसल विधायक महेश नेगी के दोनों ही पार्टियों से अच्छे ताल्लुकात हैं. महेश नेगी को राजनीति में लाने का श्रेय कांग्रेस को ही जाता है. 2004 में ज़िला खेल अधिकारी के पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस के टिकट पर ही नेगी ने द्वाराहाट विधानसभा से उपचुनाव लड़ा था. वह हरीश रावत के करीबी माने जाते हैं. यह अलग बात है कि तब हरीश रावत उनको जीत नहीं दिला पाए थे.

एक बार फिर 2007 में कांग्रेस ने महेश नेगी पर दाव खेला लेकिन जीत हासिल नहीं हो पाई. इसके बाद 2010 में महेश नेगी पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी के संपर्क में आए और फिर भाजपा के हो गए.

ख़ामोशी पर सवाल

2012 में नेगी भाजपा से टिकट के प्रबल दावेदारों में से एक थे लेकिन ऐन मौके पर टिकट कट गया. भाजपा ने 2017 में महेश नेगी पर दांव खेला और महेश नेगी द्वाराहाट से पहली बार विधायक चुने गए. यानी 9 साल से भाजपाई महेश नेगी का राजनीतिक जन्म कांग्रेस में हुआ था और वह पहले 6 साल वहीं रहे थे.

यही कारण है कि कांग्रेस के सीनियर लीडर हों या फिर प्रदेश पदाधिकारी यौन उत्पीड़न के इस गंभीर मामले में, ऐसे समय में चुप हैं जबकि बतौर विपक्ष कांग्रेस को ऐसा मुद्दा घर बैठे मिल गया जो महिलाओं को तो लामबंद कर ही सकता है. लेकिन विपक्ष मित्र विपक्ष की भूमिका में दिख रहा है और उसकी ख़ामोशी सवालों के घेरे में है.

Tags: BJP MLA, Harish rawat, Sexual Harassment, Uttarakhand news

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