छात्रवृत्ति घोटाले के मुख्य आरोपी गीताराम नौटियाल की समाज कल्याण विभाग में बहाली... मंत्री ने जताया कड़ा विरोध

पिछले साल नवंबर में गीताराम नौटियाल की गिरफ़्तारी हुई तो अगले कुछ दिनों में विभाग ने उन्हें जॉएंट डायरेक्टर पद से भी निलंबित कर दिया था.
पिछले साल नवंबर में गीताराम नौटियाल की गिरफ़्तारी हुई तो अगले कुछ दिनों में विभाग ने उन्हें जॉएंट डायरेक्टर पद से भी निलंबित कर दिया था.

UP के MLA अमनमणि त्रिपाठी को लॉकडाउन में बदरीनाथ जाने की अनुमति देने के बाद अफ़सरशाही का एक और कारनामा

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देहरादून. लॉकडाउन के दौरान यूपी के विधायक अमनमणि त्रिपाणी को काफ़िले के साथ चुपचाप बदरीनाथ जाने की अनुमति देने के चंद दिन बाद ही उत्तराखंड की ब्यूरोक्रैसी का एक और कारनामा चर्चा में है. प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माने जाने वाले छात्रवृत्ति घोटाले के मुख्य आरोपी गीताराम नौटियाल की जॉएंट डायरेक्टर पद पर पुन: बहाली कर दी गई है. गीताराम नौटियाल की छात्रवृत्ति घोटाले में संलिप्तता सामने आने के बाद अक्टूबर 2019 में एसआईटी ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. नवंबर में गीताराम नौटियाल की गिरफ़्तारी हुई तो अगले कुछ दिनों में विभाग ने उन्हें जॉएंट डायरेक्टर पद से भी निलंबित कर दिया था. अब ज़मानत पर चल रहे नौटियाल को चुपके से उनकी नियुक्ति दे दी गई तो विभाग के मंत्री के ऐतराज़ के बाद मुख्यमंत्री ने फ़ाइल तलब कर ली है.

सबसे बड़ा घोटाला 

बता दें कि उत्तराखंड में साल 2010 से लेकर 2016 तक समाज कल्याण विभाग से एससीएसटी छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति (दशमोत्तर) में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया था. खुले हाथों से छात्रवृत्ति अपात्र लोगों को बांटी गई थी. इस फर्जीवाड़े में उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों के भी कई शिक्षण संस्थान शामिल थे.



सात सौ करोड़ रुपये से के ज़्यादा के इस घोटाले की जांच दो एसआईटी कर रही हैं. अभी तक समाज कल्याण विभाग के छह बडे अफसरों समेत छह दर्जन से अधिक लोगों को गिरप्तार कर चुकी है, जिनमें से एक गीताराम नौटियाल भी हैं. इस घोटाले में उत्तराखंड के अलावा अन्य प्रदेशों के भी कई शिक्षण संस्थानों पर केस दर्ज किया जा चुका है.
यशपाल आर्य ने जताया ऐतराज़़ 

कमाल की बात यह है कि प्रदेश के सबसे बड़े घोटाले के मुख्य आरोपी के ज़मानत पर रिहा होने के बाद विभाग ने उन्हें फिर नियुक्ति दे दी. इसी 19 मई को समाज कल्याण विभाग के सचिव एल फैनई के हस्ताक्षर से जारी एक आदेश के तहत गीताराम नौटियाल को जॉएंट डायरेक्टर समाज कल्याण के पद पर पुन: बहाल कर दिया गया.

इसकी भनक न तो मुख्यमंत्री को लगने दी गई न समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य को. गुरुवार को कैबिनेट बैठक के दौरान समाज कल्याण मंत्री यशपाल ने गीताराम नौटियाल की गुपचुप बहाली पर कड़ा रोष जताया. मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों केा तलब कर कड़ी फटकार लगाई.

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने गीताराम नौटियाल से जुड़ी फाइल तलब कर ली है. माना जा रहा है कि गीताराम नौटियाल की जाएंट डायरेक्टर पद पर बहाली के आदेश को रिजेक्ट किया जा सकता है.

RTI कार्यकर्ताओं ने खोला घोटाला 

समाज कल्याण विभाग के इस घोटाले को सामने लाने का श्रेय बीजेपी नेता और राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान और आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट चंद्रशेखर करगेती को जाता है. दोनों ही लोगों ने इस घोटाले केा लेकर हाईकोर्ट में रिट दायर की थी.

गीताराम नौटियाल की बहाली पर दोनों लोगों को आपत्ति है. उनका कहना है कि सरकार यदि इस आदेश को रद्द नहीं करती तो वे हाईकोर्ट जाएंगे. चंद्रशेखर करगेती का कहना है कि गीताराम नौटियाल पर साल 2010-2011 में ज़िला समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए गड़बड़ी का आरोप है. इसके बावजूद नौटियाल दो प्रमोशन पाने में सफल रहे थे.

वह मांग करते रहे हैं कि नौटियाल की बहाली उसी मूल पद पर होनी चाहिए, जिस पद पर रहते हुए उन पर घोटाले के आरोप लगे हैं.

अमनमणि मामले में क्या हुआ?

उत्तराखंड में ब्यूरोक्रेसी हमेशा से हावी रही है. ज्यादा दिन नहीं बीते जब प्रदेश के सबसे ताकतवर अफ़सर माने जाने वाले अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश की संस्तुति पर देहरादून जिला प्रशासन ने गुपचुप ढंग से यूपी विधायक अमनमणि त्रिपाठी को बद्रीनाथ जाने की परमिशन दे दी थी.

मामला खुला तो सरकार को फजीहत का सामना करना पड़ा लेकिन इस मामले में किसी की जवाबदेही अभी तक तय नहीं हुई है.

 
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