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जिम कार्बेट से पकड़े गए आदमखोर बाघ को मिला नया ठिकाना, अब यहां रहेगा

News18 Uttarakhand
Updated: November 17, 2019, 7:05 PM IST
जिम कार्बेट से पकड़े गए आदमखोर बाघ को मिला नया ठिकाना, अब यहां रहेगा
इस आदमखोर बाघ ने 2 वन श्रमिकों को तुनभूजी के जंगल में और एक अन्य को खिनानौली वन क्षेत्र में मारा था.

जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व के डॉयरेक्टर ने बताया कि पकड़े गए बाघ की उम्र 13 वर्ष है. उसके कैनाइन और अन्य दांतों के बिलकुल घिसने और मसूड़ों के कमजोर होकर सिकुड़ने के कारण यह स्वयं अपने लिए प्राकृतिक रूप से शिकार करने लायक नहीं है.

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देहरादून. ऋषिकेश जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व (Jim Corbett Tiger Reserve) की ढिकाला रेंज के तुन भूजी क्षेत्र से शनिवार सुबह पकड़े गए बूढ़े आदमखोर बाघ (Old man-eating tiger) को उसकी खतरनाक प्रवृत्ति के मद्देनजर नैनीताल (Nainital) जिले के रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर (Rescue Center) में रखा जाएगा. रिजर्व के डॉयरेक्टर राहुल ने बताया कि पकड़े गए बाघ की उम्र 13 वर्ष है. उसके कैनाइन और अन्य दांतों के बिलकुल घिसने और मसूड़ों के कमजोर होकर सिकुड़ने के कारण यह स्वयं अपने लिए प्राकृतिक रूप से शिकार करने लायक नहीं है.

ऐसी स्थिति में खतरनाक हो जाता है बाघ
उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में पहुंचने के बाद बाघ बहुत खतरनाक हो जाता है. ऐसे में उसे रेस्क्यू सेंटर या चिड़ियाघर में रखना ही सुरक्षित विकल्प है. राहुल ने कहा कि इस बाघ के भविष्य को लेकर एक समिति गठित की गई थी, जिसने व्यापक रूप से हर पहलू पर विचार कर उसे फिलहाल रानीबाग के रेस्क्यू सेंटर में रखने का फैसला लिया.

जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर ने बताया कि आदमखोर बाघ के कैनाइन और अन्य दांत बिलकुल घिस गए हैं. ऐसे में यह स्वयं शिकार करने लायक नहीं है.


जंगल के कर्मी बाघ पर नजर बनाए हुए थे
तुन भूजी के जंगल में ढिकाला का स्टाफ पालतू हाथियों से इस बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए थे. इस बाघ के बारे में जानकारी मिल रही थी कि वह इलाके की अन्य बाघिनों द्वारा मारे गए शिकारों का नरम हिस्सा खाकर जीवित था. 15 नवंबर की सुबह कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक दुष्यंत शर्मा ने इस बाघ को बेहोश किया और इसके गले में रेडियो कॉलरिंग लगाकर पिंजरे में बन्द कर दिया.

तीन वन श्रमिकों को शिकार बना चुका था
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यह बूढ़ा बाघ तीन वन श्रमिकों को अपना शिकार बना चुका था. इस बाघ ने 2 वन श्रमिकों को तुनभूजी के जंगल में और एक अन्य को खिनानौली वन क्षेत्र में मारा था. आखिरी घटना इसी वर्ष 16 अगस्त की है. 15 नवम्बर को रिजर्व का ढिकाला जोन पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए खोले जाने के मद्देनजर कॉर्बेट प्रशासन व राज्य सरकार के लिए यह जरूरी हो गया था कि उस आदमखोर बाघ को पिंजरे में बंद कर दिया जाए.

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First published: November 17, 2019, 5:56 PM IST
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