सुंजवान कैंप में शहीद के परिजन बोले, 'पाकिस्तान से हो आर-पार की जंग'

शहीद राकेश रतूड़ी का पार्थिव शरीर मंगलवार शाम को शहीद के देहरादून स्थित आवास पहुंचेगा और बुधवार को हरिद्वार में सैन्य सम्मान से साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा

satendra bartwal | ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 13, 2018, 5:52 PM IST
सुंजवान कैंप में शहीद के परिजन बोले, 'पाकिस्तान से हो आर-पार की जंग'
सुंजवान आर्मी कैंप पर हुए हमले में घायल हवलदार राकेश रतूड़ी ने सोमवार शाम इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
satendra bartwal | ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 13, 2018, 5:52 PM IST
जम्मू के सुंजवान आर्मी कैंप में हुए हमले में घायल पौड़ी के राकेश रतूड़ी ने सोमवार को दम तोड़ दिया. उत्तराखंड का एक और बेटे के शहीद होने की खबर फैलते ही राकेश रतूड़ी के देहरादून स्थित घर और पौड़ी स्थित उनके गांव में शोक की लहर दौड़ गई.

रिपोर्ट के मुताबिक सुंजवान में हुई फ़िदायीन हमले में शहीद राकेश रतूड़ी को भी गोली लगी थी. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार को उन्होंने दम तोड़ दिया. सोमवार की रात राकेश की शहादत की ख़बर फैलते ही पूरा क्षेत्र शोक में डूबा है और साथ ही पाकिस्तान पर गुस्सा भी फूट रहा है.

शहीद राकेश रतूड़ी का पार्थिव शरीर मंगलवार शाम को शहीद के देहरादून स्थित आवास पहुंचेगा और बुधवार को हरिद्वार में सैन्य सम्मान से साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा.महार रेजिमेंट की छठी बटालिन में हवलदार रतूड़ी की पोस्टिंग कुपवाड़ा में थी. उनकी रेजिमेंट लद्दाख तैनात हो गई थी और रतूड़ी उन चंद लोगों में से थे जिन्हें रिलीव नहीं किया गया था.

मूल रूप से पौड़ी के निवासी राकेश रतूड़ी वर्ष 1996 में सेना में भर्ती हुए थे. वर्ष 2010 में वह एनएसजी कमांडो बन गए और वर्ष 2013 तक रहे. इसके बाद वर्ष 2013 में वह राष्ट्रीय राइफ़ल में शामिल हुए. सेना में एक साल की सेवा और करने के बाद उन्हें 2019 सेवानिवृत होना था.

marytr rakesh raturi family

शहीद के भाई रेवती नंदन रतूड़ी कहा हैं कि पाकिस्तान से आर-पार की लड़ाई होनी चाहिए और बार-बार भाइयों की कुर्बानी अब बंद होनी चाहिए.

गौरतलब है शहीद राकेश रतूड़ी 3 जनवरी को छुट्टी पर घर आए थे और नौ तारीख ड्यूटी के लिए जम्मू लौटे थे. उनके माता-पिता गांव में परिजनों के साथ रहते हैं और दो बच्चों में से बेटी किरन स्नातक की पढ़ाई कर रही है बेटा नितिन देहरादून में ग्यारहवीं का छात्र है.
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नितिन कहता है कि पिता की तरह वह भी सेना में जाकर सेना की सेवा करना चाहता है क्योंकि वह भी दादा और पिता के ही पदचिन्हों पर चलना चाहता है. शहीद राकेश रतूड़ी के घर में शोक है लेकिन इसके साथ ही गर्व भी क्योंकि उन्होंने भारत मां के लिए शहादत दी है.
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