MDDA विस्तारः नए जुड़े इलाक़ों में अब मकान बनाना महंगा, प्रति स्क्वायर मीटर पड़ेगा इतना भार

MDDA को विकास के काम करने के लिए नए टास्क तो मिलेंगे ही, उसका खजाना भी भरेगा.

Manish Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: July 19, 2019, 7:11 PM IST
MDDA विस्तारः नए जुड़े इलाक़ों में अब मकान बनाना महंगा, प्रति स्क्वायर मीटर पड़ेगा इतना भार
एमडीडीए में शामिल हुए चकराता, कालसी और त्यूणी में भी अब नक्शा पास करवाकर ही निर्माण होंगे. (फ़ाइल फ़ोटो)
Manish Kumar
Manish Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: July 19, 2019, 7:11 PM IST
चकराता, कालसी और त्यूणी के 38 गांवों के MDDA में शामिल होने के फैसले से कहीं खुशी कहीं गम वाले हालात पैदा हो गए हैं. एक तरफ जहां MDDA के अधिकारियों में नई ऊर्जा आ गई है तो इस पूरे इलाके के लोगों के मन में कई आशंकाएं घर कर गई हैं. MDDA के अफसर इसलिए खुश हैं क्योंकि उनके दायरे का बहुत ज्यादा विस्तार हो गया है. MDDA को विकास के काम करने के लिए नए टास्क तो मिलेंगे ही, उसका खजाना भी भरेगा. लेकिन कालसी, चकराता और त्यूणी के जिन 38 गांवों को MDDA की सीमा में शामिल किया गया है वहां के बाशिंदों को कुछ कई सुविधाएं मिली हैं तो कई समस्याएं भी खड़ी हो गई हैं.

पहले समस्याएं...

इन तीनों तहसीलों में किसी भी सड़क के 200 मीटर के दायरे का इलाका MDDA के अंतर्गत आ गया है यानि सड़क किनारे बसे सभी गांव भी अब एमडीडीए के दायरे में होंगे. अब इन गांवों में कोई भी मकान या दुकान बनाने के लिए यह ज़रूरी होगा कि नक्शा MDDA से पास कराया जाए. अफसरशाही के जिन चक्करों से इन ग्रामीण इलाकों को छूट थी वह ख़त्म. नक्शा पास कराना जितना उलझन वाला मामला माना जाता है उतना ही खर्चीला भी होता है. नक्शा पास कराने के लिए MDDA को 4 तरह की फीस देनी पड़ती है.


  1. डेवलपमेंट चार्जः आवासीय भवन के लिए यह 100 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर है जबकि व्यावसायिक के लिय 200 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर है.

  2. सबमिशन चार्जः आवासीय भवन के लिए यह 500 रुपये है और व्यावसायिक के लिए 5000 रुपये.

  3. लेबर सेस: यह निर्माण लागत का 1 फ़ीसदी होता है. यह 15,900 से 17,900 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर लगाया जाता है?

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  5. 4. सब डिवीज़न चार्ज: आवासीय के लिए यह सर्किल रेट का 1% जबकि व्यावसायिक के लिए 2% है. यदि इलाका MDDA में नया जुड़ा है तो यह चार्ज 2% और 5 % हो जाता है.


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इस हिसाब से अब यदि कोई 200 स्क्वायर मीटर से बड़ा घर बनाता है तो उसे एक लाख रुपये से ज़्यादा की रकम नक्शा पास करने के लिए MDDA को देनी होगी. क्योंकि इन इलाकों के लिए सरकार ने जो छूट दी है उसके अनुसार इन तीनों तहसीलों में जुड़े नए इलाक़ों में 200 स्क्वायर मीटर का मकान और 30 स्क्वायर मीटर की दुकान बनाने के लिए नक्शा पास कराना फ्री रखा गया है.

विकासनगर, डोईवाला में MDDA ऑफ़िस 

नक्शा पास तो MDDA से कराना पड़ेगा लेकिन कोई फ़ीस नहीं देनी होगी जबकि देहरादून में आप कितना ही छोटा मकान या दुकान बनाएं उनमें आपको फ़ीस देनी पड़ती है. ज़ाहिर तौर पर ने जुड़े लोगों को ससे आर्थिक नुकसान नहीं होगा लेकिन कागज़ी काम के लिए दौड़ तो फिर भी लगानी पड़ेगी.

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दूसरी समस्या नक्शा पास कराना होगा. वैसे तो MDDA ने ऑनलाइन नक्शा पास करने की व्यवस्था की है लेकिन ग्रामीण इलाकों के लोग इसका कितना फायदा उठा पाएंगे यह बड़ा सवाल है. इस मामले पर MDDA के VC आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि इस समस्या को देखते हुए MDDA  ने विकासनगर और डोईवाला में अपने दो कार्यालय खोलने जा रहा है ताकि लोगों को देहरादून न आना पड़े.

अब फ़ायदे 

लेकिन ऐसा नहीं कि इन इलाकों के MDDA में आ जाने से समस्याएं ही पैदा होंगी. इसके कई फायदे भी दिखाई दे रहे हैं.

  1. इन पहाड़ी इलाकों में होने वाला मनमाना निर्माण रुक जाएगा, जिससे पूरे इलाके के इकोलॉजिकल सिस्टम को होने वाला नुक़सान रोका जा सकेगा.

  2. इन इलाकों के गांवों में स्ट्रीट लाइट, सड़कों का निर्माण और मरम्मत, बैठने की जगह, रेन शेड और पार्क बनाए जा सकेंगे.

  3. पूरे इलाके में जमीन के रेट बढ़ जाएंगे क्योंकि इलाके में विकास की उम्मीद जग जाएगी.

  4. इलाके में नए आवासीय परिसर बनाये जा सकेंगे. राज्य बनने के बाद से अभी तक MDDA के 6 या 7 ही आवासीय प्रोजेक्ट आए हैं लेकिन अब इसके क्षेत्र विस्तार से MDDA को नए आवासीय प्रोजेक्ट लॉंच करने में आसानी होगी.

  5. प्राइवेट बिल्डर के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे. इसका सबसे ज्यादा फायदा देहरादून को होगा. दून पर बढ़ता जा रहा आबादी का दबाव इससे कम होगा, साथ ही लोगों को सस्ते घर भी मिल पाएंगे.


कोई टैक्स नहीं 

MDDA के VC आशीष श्रीवास्तव कहते हैं कि कि प्रधानमंत्री के सबको आवास की कल्पना को इससे पूरा करने में मदद मिलेगी. यदि इन इलाकों में नए आवासीय प्रोजेक्ट आ जाएंगे तो निश्चित तौर पे पूरे इलाके का विकास होगा.

और आखिर में सबसे ख़ास बात MDDA अपने क्षेत्र में शामिल इलाके के बाशिंदों से कोई टैक्स नहीं वसूलेगा. यह काम नगर निगम का होता है. MDDA को महज़ नक्शा पास कराने की ही फ़ीस देनी होगी.

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First published: July 19, 2019, 6:43 PM IST
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