लाइव टीवी

कोरोना संकट में बंट गया मेडिकल समाज, IMA ने हल्द्वानी घटनाक्रम के लिए स्वास्थ्य विभाग के फैलाए कंफ्यूज़न को बताया ज़िम्मेदार
Dehradun News in Hindi

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: May 22, 2020, 4:44 PM IST
कोरोना संकट में बंट गया मेडिकल समाज, IMA ने हल्द्वानी घटनाक्रम के लिए स्वास्थ्य विभाग के फैलाए कंफ्यूज़न को बताया ज़िम्मेदार
सांकेतिक तस्वीर

IMA सचिव ने DG Health को पत्र लिखकर ट्रीटमेंट को लेकर निर्देश जारी करने को कहा था. हफ़्तों बाद भी जवाब नहीं मिला. डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग पर लगाया उपेक्षा करने का आरोप.

  • Share this:
देहरादून. पूरी दुनिया तो कोरोना वायरस (COVID-19) से लड़ रही है, लेकिन उत्तराखंड में इस जंग से फ्रंटलाइन वॉरियर्स डॉक्टर्स ही आपस में उलझे हुए दिख रहे हैं. हल्द्वानी में आईएमए (IMA) ने खांसी-ज़ुकाम-बुखार के मरीजों को देखने से इनकार कर दिया है. आईएमए उत्तराखंड ने इसकी वजह राज्य के स्वास्थ्य विभाग के फैलाए गए कंफ़्यूज़न को बताया है. आईएमए के अनुसार कोरोना संकट में स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट डॉक्टर्स को साथ लेने के बजाय, उनके साथ बुरा बर्ताव कर रहा है. मांगने के बावजूद ट्रीटमेंट को लेकर निर्देश नहीं दिए जा रहे हैं. इसकी वजह से प्राइवेट डॉक्टर्स परेशान हैं.

मरीजों को देखने से इनकार

कुमाऊं के मेडिकल-हब हल्द्वानी में छह जिलों पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, नैनीताल, चंपावत, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर से मरीज आते हैं. यहां छोटे-बड़े क्लीनिक्स की संख्या 200 से ज्यादा है जिनकी ओपीडी में रोज औसतन ढाई हज़ार मरीज़ आते हैं. मंगलवार को हल्द्वानी के वनभूलपुरा में एक महिला में कोरोना की पुष्टि हुई है, जिसने पहले अपनी जांच कृष्णा हॉस्पिटल में कराई थी. इसके बाद कृष्णा अस्पताल के तीन डॉक्टर्स समेत आठ स्टाफ को क्वारंटाइन करना पड़ा है. इसके बाद आईएमए (हल्द्वानी) ने निर्णय लिया कि सर्दी, जुकाम, बुखार के मरीज का इलाज प्राइवेट डॉक्टर नहीं करेंगे. ऐसे मरीज़ों को नजदीकी सरकारी अस्पतालों में जाना होगा.



स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी



हल्द्वानी की घटना से यह चर्चा शुरू हो गई है कि सिर्फ सरकारी स्वास्थ्य कर्मी ही कोरोना महामारी से जंग लड़ रहे हैं. हालांकि उत्तराखंड चैप्टर के सचिव डॉ. डीडी चौधरी कहते हैं कि ऐसा निष्कर्ष निकालना बिल्कुल गलत होगा. प्राइवेट डॉक्टर्स तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से फैलाए गए कंफ्यूज़न का शिकार हैं, वह खुद परेशान हैं. डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग ने शासनादेश जारी कर प्राइवेट डॉक्टर्स को खांसी-ज़ुकाम के मरीज़ों को न देखने का आदेश दिया हुआ है. प्राइवेट डॉक्टर्स को पता ही नहीं कि करना क्या है.

डॉ. चौधरी कहते हैं कि उन्होंने स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखकर कोरोना संकट के दौरान ट्रीटमेंट को लेकर निर्देश जारी करने को कहा था. तीन हफ़्ते बाद भी ऐसा नहीं किया गया है. इसकी वजह से प्राइवेट डॉक्टर्स क्या करें और क्या नहीं इसे लेकर कंफ़्यूज़न जारी है.

प्राइवेट डॉक्टर्स का शोषण

डॉ. चौधरी कहते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी महामारी में जहां बड़े-बड़े देशों के संसाधन कम पड़ रहे हैं, वहां उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट डॉक्टर्स को साथ लेकर चलने के बजाय उन्हें परे धकेल रहा है. सीएमओ प्राइवेट डॉक्टर्स से अपमानजनक बर्ताव कर रहे हैं और मरीज़ की ग़लती की सज़ा भी डॉक्टर को, हॉस्पिटल को दी जा रही है.

डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि प्राइवेट डॉक्टर्स स्वास्थ्य विभाग के साथ शुरु से सहयोग कर रहे हैं लेकिन आईएमए हल्द्वानी ने फ़ैसला स्वास्थ्य विभाग के फैलाए कंफ्यूज़न और बर्ताव की वजह से लिया है. वह यह भी कहते हैं वह आईएमए हल्द्वानी से बात करके उनकी चिंता को दूर करने की कोशिश करेंगे.

स्वास्थ्य विभाग ख़ामोश

न्यूज़ 18 ने इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग का पक्ष जानने की भी कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर अमिता उप्रेती ने न हमारा फ़ोन उठाया और न ही टेक्स्ट मैसेज, वाट्सऐप मैसेज का जवाब दिया. हमने स्वास्थ्य विभाग को एक मेल भी किया है और अपना पक्ष रखने का आग्रह किया है. जब भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से उनका पक्ष मिलेगा हम उसे प्रकाशित करेंगे.

ये भी देखें: 

हल्द्वानी में प्राइवेट डॉक्टर्स ने किए सर्दी-ज़ुकाम-बुखार के मरीज़ों के लिए दरवाज़े बंद

 
First published: May 22, 2020, 1:48 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading