मौसम का पूर्वानुमान कितना सही और कितना सटीक, देखिए ये आंकड़े

जुलाई के महीने में मौसम विभाग की तरफ से 6 बार अलर्ट जारी किया, जिसमें लगभग सात से 8 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 7, 2019, 7:33 PM IST
मौसम का पूर्वानुमान कितना सही और कितना सटीक, देखिए ये आंकड़े
जुलाई के महीने में मौसम विभाग की तरफ से 6 बार अलर्ट जारी किया, जिसमें लगभग सात से 8 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 7, 2019, 7:33 PM IST
उत्‍तराखंड में इस बार मानसून कमजोर पड़ा है और अभी तक 36 प्रतिशत कम बारिश हुई है, लेकिन बरसात से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में कई लोगों के मारे जाने की खबरें लगातार आ रही हैं. दरअसल, प्रदेश में मानसून के दौरान मौसम सुहावना कम और डरावना ज्यादा हो जाता है. ऐसे में मौसम का सटीक अनुमान बेहद जरूरी हो जाता है.

मानसून सीजन में मौसम विभाग के द्वारा जारी किए गए अलर्ट पर बहुत कुछ निर्भर करता है. इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति तो प्रभावित होती ही है, क्‍योंकि चारधाम यात्रा एक बड़ी आबादी के रोजी रोटी का जरिया है. वहीं मौसम विभाग के पूर्वानुमान से यात्रियों को रोका जाता है. जबकि 2013 की आपदा के बाद मौसम विभाग के अलर्ट पर तुरंत एक्शन भी लिया जा रहा है.

अलर्ट के बाद होता है ये काम
अलर्ट आने के बाद आपदा से निपटने के मुक्कमल इंतजाम भी किए जाते हैं. जिलाधिकारियो को निर्देशित किया जाता है तो कई दफा स्कूलों की छुट्टियां भी कर दी जाती हैं. लेकिन इस बार के मानसून सीजन में जो पूर्वनुमान मौसम विभाग ने दिया उससे हकीकत मेल खाती दिखाई नहीं दे रही है.

सही साबित नहीं हुए मौसम विभाग के अनुमान
जुलाई के महीने में मौसम विभाग की तरफ से 6 बार अलर्ट जारी किया, जिसमें लगभग सात से 8 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया. भारी से बहुत भारी बारिश के हालत में 115.6 एमएम से 204 एमएम तक बारिश होती है. इतनी बारिश अगर एक घंटे में हो जाए को बाढ़ के हालात बन सकते हैं.

उत्‍तराखंड में अभी तक 36 प्रतिशत कम बारिश हुई है.

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अब देखते है कि मौसम विभाग ने क्या भविष्यवाणी की और कितना पानी बरसा. आपदा विभाग ने इन आंकड़ों को तैयार किया है. सबसे पहले जानिए की हल्की बारिश, मध्यम बारिश, भारी बारिश और बहुत भारी बारिश के मायने क्या हैं?
बहुत हल्की बारिश- 2.4 mm
हल्की बारिश-2.5-15.5 mm
मध्यम बारिश-15.6–64.4 mm
भारी बारिश- 64.5-115.5 mm
बहुत भारी बारिश-115.6-204.4 mm
भारी से बहुत ज्यादा भारी बारिश-> 204.4 mm


अब देखिए कि कहां अलर्ट दिया गया और बारिश कितनी हुई.
>>4 से 6 जुलाई के लिए 8 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट. महज बागेशवर जिलें में 25 एमएम की मध्यम बारिश.
>>8 से 10 जुलाई के लिए 8 जिलों के अलर्ट. मात्र देहरादून के मसूरी में 90 एमएम की भारी बारिश तो नैनीताल में ही हुई 190 एमएम की बहुत भारी बारिश.
>>11 जुलाई से 15 जुलाई तक 9 जिलों में अलर्ट. उधमसिंह नगर में 45 एमएम की मध्यम बारिश, चमौली में 150 एमएम तो पिथौरागढ़ में 74.40 एमएम बारिश.
>>17 जुलाई अलर्ट को वॉच में बदला गया.
>>24 जुलाई के वॉच को अलर्ट में बदला गया. इसके साथ जिलों भी बदले गए.
>>25 जुलाई को 7 जिलों के लिए अलर्ट आया और बागेश्‍वर में 25 एमएम की मध्यम बारिश हुई.

ऐसा रहा हाल
कुल मिलाकर जिन जिलों में जिस हिसाब से बारिश का अलर्ट था वहां उतनी बारिश नहीं हुई. कई जगह तो भारी बारिश का मानक तक आंकड़े छू नहीं पाए, वहीं जिन जिलों में अलर्ट जारी किया गया था उनमें से एक या दो जिलों में ही मेघ बरसे. मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिंह बताते हैं कि बिल्कुल सटीक जानकारी दे पाना अभी संभव नहीं है. उन्‍होंने कहा, 'जितने संसाधन हैं उस हिसाब से ही पूर्वानुमान दिया जाता है. खास तौर पर पूर्वानुमान की भाषा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए.'

दरअसल, मौसम विभाग जो पूर्वानुमान जारी करता है, उसमें एक तो अलर्ट होता है और दूसरा वॉच की स्थति बनती है. वॉच का पूर्वानुमान आने पर मौसम पर नजर बना कर रखी जाती है, तो अलर्ट होने पर पूरे प्रदेश की सरकारी मशीनरी को एक्टिवेट कर दिया जाता है. इस दौरान स्कूलों में छुट्टियां भी कई बार कर दी जाती हैं.

आपदा प्रबंधन और न्यूनीकरण केंद्र के एक्जिक्यूटिव अफसर पियूष रौतेला बताते हैं कि अगर सटीक भविष्यवाणी मिले तो विभाग के लिए भी सहूलियत रहेगी. उन्होंने कहा कि संभावनाओं पर भविष्यवाणियां की जाती हैं और कई बार भारी बारिश की संभावना होती है, लेकिन उतनी बारिश होती नहीं है.

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First published: August 7, 2019, 7:32 PM IST
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