भत्तों के लिए कैबिनेट से भिड़ने को तैयार बीजेपी अध्यक्ष, सिर्फ़ वेतन कटौती की दी अनुमति
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भत्तों के लिए कैबिनेट से भिड़ने को तैयार बीजेपी अध्यक्ष, सिर्फ़ वेतन कटौती की दी अनुमति
कोरोना संकट को देखते हुए कैबिनेट ने सभी विधायकों के वेतन और भत्तों में 30 फ़ीसदी कटौती का फैसला लिया था लेकिन बीजेपी अध्यक्ष बंशीधर भगत ने सिर्फ़ वेतन से कटौती की अनुमति दी है.

BJP के प्रदेश अध्यक्ष ने जहां सिर्फ मूल वेतन में से कटौती की बात कही, वहीं विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि कैबिनेट का फैसला था कि वेतन और भत्ते दोनों में साल भर के लिए 30 फीसदी कटौती की जाए.

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देहरादून. कोरोना संकट (COVID-19 Crisis) को देखते हुए उत्तराखंड में विधायकों के वेतन और भत्तों में 30 फ़ीसदी कटौती का फैसला अप्रैल की शुरुआत में लिया गया था. कैबिनेट के इस फ़ैसले को करीब दो महीने होने जा रहे हैं लेकिन अभी तक कोविड-19 फंड में यह पैसा जमा नहीं हो सका है. इसकी वजह यह है कि इस कटौती के लिए विधायकों की सहमति ज़रूरी है और 71 विधायकों में से 50 फ़ीसदी ने भी इसके लिए हामी नहीं भरी है. मज़ेदार बात यह है कि सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अब कैबिनेट के फ़ैसले को दरकिनार करते हुए सिर्फ़ मूल वेतन देने की बात कर रहे हैं, भत्तों की नहीं. इस फ़ैसले के बाद न्यूज़ 18 की ख़बर ने साफ़ कर दिया था कि अगर सिर्फ़ वेतन का अंशदान दिया जाता है तो यह कुल वेतन का करीब 3 फ़ीसदी बनता है क्योंकि कुल वेतन में भत्ते ज़्यादा हैं.

बंशीधर भगत ने बचाए भत्ते

उत्तराखंड में बीजेपी दो तिहाई बहुमत में है. 70 में से 57 विधायक भगवा पार्टी के हैं. इसका अर्थ साफ़ है कि वेतन कटौती के लिए सहमति न देने वाले ज़्यादातर विधायकों में बीजेपी के भी शामिल हैं. इस बारे में पूछे जाने पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण विधायक अपने क्षेत्रों में हैं. इसके चलते वे सहमति नहीं दे पाए लेकिन पार्टी सुनिश्चित करेगी कि सभी विधायक अनिवार्य रूप से अपने मूल वेतन से तीस फीसदी कटौती की सहमति दें.



न्यूज़ 18 ने बंशीधर भगत से पूछा कि सिर्फ वेतन से क्यों, भत्तों से क्यों नहीं? इस पर बंशीधर भगत का कहना था कि कैबिनेट का फैसला केवल मूल वेतन में ही कटौती का था. दरअसल कालाढूंगी से विधायक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने खुद केवल वेतन से कटौती की ही सहमति दी है. अपने भत्तों को वह बचा ले गए हैं.
भत्ते भी कटने हैं: स्पीकर  

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल उनके इस दावे की हवा निकाल रहे हैं. विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि कैबिनेट का फैसला था कि वेतन और भत्ते दोनों में साल भर के लिए 30 फीसदी कटौती की जाए. उन्होंने कहा कि सभी विधायकों को जो पत्र और रिमांइडर भेजे गए हैं, उसमें यह बात स्पष्ट तौर पर लिखी गई है.

तकनीकी दिक्कत यह है कि भले ही फ़ैसला कैबिनेट का हो लेकिन कटौती के लिए विधायकों की सहमति ज़रूरी होती है. लेकिन इस फ़ैसले को दो महीने होने को आए अब भी अधिकांश विधायक लॉकडाउन के चलते क्षेत्र में फंसे होने का बहाना बनाकर सहमति देने से कन्नी काट रहे हैं. इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने जिलाधिकारियों के माध्यम से विधायकों को रिमाइंडर भिजवाया है, लेकिन इसके बाद माननीय कटौती को राज़ी नहीं हो रहे हैं.

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