MLA Mahesh Negi Case: अब बिना किसी आपत्ति पत्र के जांच बदलने को लेकर उठे सवाल

बीजेपी विधायक महेश नेगी में फिर नया मोड आ गया है.
बीजेपी विधायक महेश नेगी में फिर नया मोड आ गया है.

 बीजेपी विधायक महेश नेगी (MLA Mahesh Negi) के ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण (Blackmailing and Sexual Exploitation) मामले में अब आपत्ति पत्र को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं.

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देहरादून. उत्तराखंड की सुर्खियों में शुमार बीजेपी विधायक महेश नेगी (MLA Mahesh Negi) के ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण (Blackmailing and Sexual Exploitation) मामले में भले ही नया मोड़ देखने को मिला हो. लेकिन इस मोड़ पर अब सवाल भी उठने लगे हैं. आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार के आदेशों पर मंगलवार को यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग मामले की जांच देहरादून पुलिस से हटाकर पौड़ी जिले को भेज दी गई है. अब जांच भी पौड़ी जिले के श्रीनगर में महिला थाना करेगा. वहीं मामले में कानून के जानकारों ने ही सवाल उठा दिए.

जनकारों के मुताबिक किसी भी मामले की जांच बदलना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन जब जांच में किसी भी पक्ष द्वारा आईजी गढ़वाल को कोई आपत्ति पत्र नहीं दिया गया तो जांच की अंतिम चरण में जब चार्टशीट दाखिल करने का समय आया तो क्यों मामले को ट्रांसफर किया गया.

कानूनी जानकारों ने कही ये बात



वहीं कानूनी जानकार रजत दुआ कहते हैं कि जांच तभी बदली जाती है जब जांच को लेकर सवाल दोनों पक्षो में से कोई पक्ष अपनी आपत्ति पत्र आईजी गढ़वाल को सौंपता, लेकिन इस मामले जब किसी भी पक्ष ने जब जांच बदले जाने को लेकर कोई सवाल नहीं उठाये तो कैसे और क्यों जांच बदली गयी. वहीं आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार का कहना है कि महिला द्वारा सीबीआई की मांग की जा रही थी और जांच निष्पक्ष हो जिसके चलते ये कदम उठाया है. चार्जशीट को रोककर पौड़ी जिले को ट्रांसफर की गई.
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आपको बता दें 13 अगस्त से शुरू ब्लैकमेलिंग और यौनशोषण मामले में कई नए मोड़ देखने को मिले लेकिन जैसे ही देहरादून पुलिस ने मामले में चार्जशीट कोर्ट में भेजी तो मामले का स्वतः संज्ञान लेकर आईजी गढ़वाल ने पूरे मामले की दिशा बदल दी. अब मामले में अग्रिम जांच पौड़ी जिले में की जाएगी. ऐसे में यह सवाल रह गया कि पूर्व जांच आखिर निष्पक्ष थी या नहीं.
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