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चार धाम श्राइन बोर्ड पर जल्दबाज़ी नहीं चाहते चारों धामों के विधायक... प्रवर समिति को भेजना चाहते हैं BJP MLA

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: December 9, 2019, 10:58 AM IST
चार धाम श्राइन बोर्ड पर जल्दबाज़ी नहीं चाहते चारों धामों के विधायक... प्रवर समिति को भेजना चाहते हैं BJP MLA
त्रिवेंद्र रावत कैबिनेट ने 27 नवंबर को चार धाम श्राइन बोर्ड के गठन को मंज़ूरी दी थी. चार धामों के तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी इसका विरोध कर रहे हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

चार धामों के तीर्थ-पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के विरोध-आंदोलन से तो सरकार को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा लेकिन सवाल यह है कि क्या वह चारों धामों के विधायकों की बात को भी नज़र-अंदाज़ कर पाएगी?

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देहरादून. चार धाम श्राइन बोर्ड विधेयक को लेकर असमंजस बना हुआ है. सरकार इस विधेयक को इसी विधानसभा सत्र में पास करवाना चाहती है लेकिन बीजेपी के स्थानीय विधायक ही इस मामले में पार्टी के साथ नहीं हैं. बीजेपी के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार चार धाम क्षेत्रों से आने वाले विधायक इस विधेयक को जल्दबाज़ी में पास करने के पक्ष में नहीं हैं और इसे प्रवर समिति के पास भेजने की मांग कर रहे हैं. विधेयक को आज ही सदन के पटल पर रखा जाना है.

तीर्थ-पुरोहितों का विरोध 

बता दें कि त्रिवेंद्र रावत कैबिनेट ने 27 नवंबर को चार धाम श्राइन बोर्ड के गठन को मंज़ूरी दे दी थी. कैबिनेट से पारित प्रस्ताव के अनुसार बोर्ड के दायरे में बदरीनाथ-केदारनाथ और गंगोत्री-यमुनोत्री समेत 51 मंदिर आएंगे. चार धामों के तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी इसका विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार मनमानी कर रही है.

तीर्थ-पुरोहित और हक-हकूकधारी सरकार पर छल करने का भी आरोप लगा रहे हैं. दरअसल 27 नवंबर को जिस समय कैबिनेट में चार धाम श्राइन बोर्ड का प्रस्ताव पारित किया गया तब तीर्थ-पुरोहितों से चार धाम विकास परिषद के पदाधिकारी इसी विषय पर चर्चा कर रहे थे. इसके बाद तीर्थ पुरोहितों ने विधानसभा घेराव किया तो सराकर की ओर से उन्हें बातचीत के लिए बुला लिया. लेकिन चर्चा के दौरान ही सदन में विधेयक पर चर्चा भी हो गई.

प्रवर समिति को भेजने की मांग 

साफ़ है कि सरकार पर चार धामों के तीर्थ-पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के विरोध-आंदोलन से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा. लेकिन सवाल यह है कि क्या वह चारों धामों के विधायकों की बात को भी नज़र-अंदाज़ कर पाएगी? केदारनाथ में कांग्रेस के मनोज रावत विधायक हैं, बाकी तीनों जगह का प्रतिनिधित्व बीजेपी विधायक करते हैं.

बीजेपी विधायकों का कहना है कि अभी उन्हें विधेयक के बारे में जानकारी ही नहीं है. ये लोग यह भी कह रहे हैं कि विधेयक पर उनसे कोई राय नहीं ली गई. बीजेपी विधायक मांग कर रहे हैं कि विधेयक को पारित करने से पहले उस पर सर्वसम्मति बनाई जाए और इसके लिए प्रवर समिति को भेजा जाए.ये भी देखें: 

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First published: December 9, 2019, 10:55 AM IST
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