चुनाव से पहले बीजेपी के लिए टॉनिक का काम करेगा भागवत का उत्तराखंड दौरा
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चुनाव से पहले बीजेपी के लिए टॉनिक का काम करेगा भागवत का उत्तराखंड दौरा
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव की हलचल के बीच भागवत के चार दिन तक उत्तराखंड में डेरा डालने, ईलीट क्लास से लेकर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ बैठकर बातचीत करने, आम स्वयंसेवक के घर जाकर भोजन करने की संघ प्रमुख की गतिविधि ने विपक्ष को भी बेचैन किया हुआ है.

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लाखों करोडों हिंदुओं की आस्था का स्थल देवभूमि उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी जड़ें मजबूत करने में जुटा हुआ है. संघ देवभूमि से अपने हिंदू राष्ट्र के एजेंडे को धार देने की रणनीति बना रहा है. संघ प्रमुख मोहन भागवत के चार दिनी दौरे को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है. राज्य में भाजपा सरकार गठित होने के बाद संघ ने अपनी रणनीति पर तेजी से काम करना शुरू किया है. 2017 के उस फैसले से इस बात को समझा जा सकता है जब राज्य की भाजपा सरकार ने हरिद्वार के कटारपुर गांव को गौ तीर्थ घोषित किया था. कटारपुर के बारे में कहा जाता है कि यहां 1918 में गाय को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया था. लोकसभा चुनाव की हलचल के बीच भागवत के चार दिन तक उत्तराखंड में डेरा डालने, ईलीट क्लास से लेकर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ बैठकर बातचीत करने, आम स्वयंसेवक के घर जाकर भोजन करने की संघ प्रमुख की गतिविधि ने विपक्ष को भी बेचैन किया हुआ है.

संघ प्रमुख ने जिस तरह से बच्चों को संस्कारवान बनाने, राष्ट्र निर्माण के लिए एकजुट होने, परिवार जैसी मजबूत परंपरा को बनाए रखने जैसी बातों पर लोगों से चर्चा की. उन्होंने गाय, गंगा, हिंदी, हिदुस्तान की बात की. इसे सत्ता की राजनीति से इतर आम आदमी को गोलबंद करने का प्रयास माना जा सकता है. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोहन भागवत का यह दौरा चुनाव मैदान में उतरी भाजपा के लिए भी किसी टॉनिक से कम नहीं है.

मोटे तौर पर संघ की उत्तराखंड में करीब 1300 शाखाएं हैं. भागवत ने अपने इस दौरे में स्वयं सेवकों, संघ के दायित्वान लोगों से मिलकर एक तरह से उन्हें रिचार्ज करने का काम किया है. ये किसी से छुपा हुआ नहीं है कि भाजपा की रीति, नीति परोक्ष रूप से संघ से ही तय होकर आगे बढ़ती है. संघ के स्वयं सेवक भले ही सीधे तौर पर चुनाव मैदान में न उतरते हों, लेकिन वैचारिक तौर पर आम मतदाता को गोलबंद करने के काम को वे बखूबी अंजाम देते हैं. इसका सीधा फायदा भाजपा को जाता है.



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