अगले साल से मिलेगा बादल फटने का पूर्वानुमान... इस सर्दी बर्फ़बारी की मिलेगी सटीक जानकारी

डॉप्लर राडार्स से हर 10-15 मिनट में रियल टाइम डाटा मिलेगा जिससे क्लाउड फॉर्मेशन का अनुमान लगाना संभव हो पाएगा.

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: July 9, 2019, 10:57 AM IST
अगले साल से मिलेगा बादल फटने का पूर्वानुमान... इस सर्दी बर्फ़बारी की मिलेगी सटीक जानकारी
मॉनसून की शुरुआत होते ही पहाड़ों से बादल फटने जैसी घटनाओं की ख़बरें आने लगी हैं.
Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: July 9, 2019, 10:57 AM IST
इस साल बर्फ़बारी देखने के लिए उत्तराखंड आने वालों को निराश नहीं होना पड़ेगा. मौसम विभाग बर्फ़बारी का सटीक अनुमान देगा और यह भी बताएगा कि कहां बर्फ़बारी होने वाली है. इससे पर्यटकों को ही नहीं स्थानीय निवासियों को भी फ़ायदा होगा और वह पूर्वानुमान के हिसाब से अपनी दिनचर्या को तय कर पाएंगे. ऐसा इसलिए संभव होगा क्योंकि राज्य में बहुप्रतीक्षित डॉप्लर राडार सर्दियों तक इंस्टॉल हो जाएंगे और काम करना शुरु कर देंगे. मॉनसून में बादल फटने जैसी घटनाओं के पूर्वानुमान के लिए अभी एक साल इंतज़ार करना होगा क्योंकि इस सीज़न में ये डॉप्लर राडार नहीं लग पाएंगे.

क्या होता है बादल फटना

मौसम विभाग की डिक्शनरी में बादल फटना या क्लाउड बर्स्ट जैसी कोई चीज़ नहीं होती. मौसम विभाग भारी बारिश या बहुत भारी बारिश, बहुत ही ज़्यादा भारी बारिश की बात करता है. मौसम विभाग के अनुसार बारिश को इन कैटेगिरी में बांटा जाता है. एक घंटे में होने वाली बारिश से इसका पैमाना तय होता है.

...तो इसलिए उत्तराखंड में ज़्यादा होती हैं बादल फटने की घटनाएं

वेरी लाइट रेन- 2.4 मिलीमीटर, लाइट रेन- रेन- 2.4 मिलीमीटर, मॉडरेट रेन- 15.6 से 64.4 मिलीमीटर, हैवी रेन- 64.5 से 115.5 मिलीमीटर, वैरी हैवी रेन- 115.6 से 204.4 मिलीमीटर और एक्सट्रीमली हैवी रेन- 204.5 मिलीमीटर और ज़्यादा.

मौसम विभाग के अनुसार एक घंटे में 100 मिलीमीटर से ज़्यादा बारिश को आम भाषा में क्लाउड बर्स्ट या बादल फटना कहा जाता है. अक्सर ऐसी स्थिति वैरी हेवी रेन होने पर आती है.

इस समय ज़्यादा होती है बादल फटने आशंका ज़्यादा
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मॉनसून के आने पर और जाते समय बादल फटने की आशंका ज़्यादा होती है. मौसम विभाग के निदेशक बताते हैं कि जब मॉनसून उत्तराखंड में प्रवेश करता है तब एनवायरमेंट काफ़ी डिस्टर्ब्ड होता है और इसकी वजह से अचानक बहुत ज़्यादा बारिश हो जाती है. इसमें उत्तराखंड का पहाड़ी क्षेत्र वाला भूगोल (ऑरोग्राफ़ी) भी मददगार साबित होती है.

vikram singh
उत्तराखंड में मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिंह के अनुसार नैनीताल के मुक्तेश्वर में पहला डॉप्लर राडार इंस्टॉल करने का काम शुरु हो गया जो दो-तीन महीने में पूरा हो जाएगा.


इसी तरह मॉनसून के लौटते समय भी बहुत ज़्यादा बारिश होने की संभावना रहती है. हालांकि ऐसा नहीं कि मॉनसून के बीच में ऐसा नहीं होता. विक्रम सिंह कहते हैं बादल फटने की घटनाएं बीच में भी हो सकती हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि वेदर सिस्टम कैसा डेवलप हो रहा है.

डॉप्लर राडार, इंस्टॉलेशन शुरु

उत्तराखंड का मौसम विभाग बेहतर पूर्वानुमान के लिए लंबे अरसे से तीन डॉप्लर राडार लगाने की मांग करता रहा है. उसकी मांग आखिरकार अब पूरी हो रही है. उत्तराखंड में मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिंह के अनुसार नैनीताल के मुक्तेश्वर में पहला डॉप्लर राडार इंस्टॉल करने का काम शुरु हो गया जो दो-तीन महीने में पूरा हो जाएगा. इसके साथ ही टिहरी के सुरकंडा में भी डॉप्लर राडार लगाने की कवायद शुरु हो गई है.

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सर्दियां आने से पहले ये दोनों राडार काम करना शुरु कर देंगे यानि कि रियल टाइम डाटा विभाग को मिलने लगेगा. इन दोनों के डाटा चेक करने के बाद यह देखा जाएगा कि तीसरा डॉप्लर राडार कहां लगाया जाना चाहिए.

बादल फटेंगे? घंटे भर पहले पता चल जाएगा

अगले साल बहुत भारी बारिश या बादल फटने का अनुमान करीब एक घंटे पहले लगाना संभव हो पाएगा और यह होगा डॉप्लर राडार्स, सरफ़ेस ऑब्ज़र्वेट्री के मिलने वाले रियल टाइम डाटा से. विक्रम सिंह बताते हैं डॉप्लर राडार लगने के बाद बारिश, तूफ़ान, बर्फ़बारी का ज़्यादा बेहतर डाटा और रियल टाइम डाटा मिल पाएगा.

दरअसल अभी सैटेलाइट से मिलने वाला डाटा एक घंटे बाद उपलब्ध हो पाता है. इसकी वजह से किसी तरह का पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं हो पाता. डॉप्लर राडार्स से हर 10-15 मिनट में रियल टाइम डाटा मिलेगा जिससे क्लाउड फॉर्मेशन का अनुमान लगाना संभव हो पाएगा. इसके अलावा इस साल से मौसम विभाग की सर्फ़ेस ऑब्ज़र्वेशन भी बेहतर हुई है.

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राज्य में ब्लॉक स्तर पर रेन मॉनीटरिंग के लिए एआरजी (ऑटोमैटिक रेन गेज) लगाए गए हैं. राज्य सरकार और मौसम विभाग के मिलाकर 150 एआरजी और 120 एडब्ल्यूएस (ऑटोमैंटिक वेदर स्टेशन) लगाए गए हैं. इनसे डाटा मिलना शरु हो गया है. विक्रम सिंह कहते हैं कि अगले साल जब ये सारे डाटा रियल टाइम में मिलने लगेंगे तो बादल फटने जैसी बहुत भारी बारिश का अनुमान आधे घंटे से एक घंटे पहले दिया जा सकेगा.

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First published: July 9, 2019, 10:26 AM IST
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