उत्तराखंड: प्राकृतिक आपदा से ज्यादा सड़कों पर होती हैं मौतें, ये इसका सबसे बड़ा कारण

साल 2018 में प्रकृतिक आपदाओं की करीब 5 हजार घटनाएं हुईं. जिनमें 719 मौतें हुईं और 1205 लोग घायल हुए.

Robin Singh Chauhan
Updated: July 16, 2019, 9:48 PM IST
उत्तराखंड: प्राकृतिक आपदा से ज्यादा सड़कों पर होती हैं मौतें, ये इसका सबसे बड़ा कारण
आपदाओं से ज्यादा खतरनाक हैं सड़क हादसे
Robin Singh Chauhan
Updated: July 16, 2019, 9:48 PM IST
उत्तराखंड में हर साल प्रकृतिक आपदाओं में सैकड़ों लोग मारे जाते हैं, लेकिन आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि इसी उत्तराखंड में हर साल सड़क हादसों में भी करीब इतने ही लोगों की मौत हो जाती है. वर्ष 2018 के आंकड़े तो यही बताते हैं. उत्तराखंड में परिवहन निगम की कंडम बसों के साथ साथ पहाड़ी इलाकों की सड़कों के स्लोप, घुमावदार मोड़ भी ऐसे हादसों के ज़िम्मेदार हैं. कई बार दुर्घटना के बाद दुर्गम इलाकों में राहत दल की देरी की वजह से ज्यादा लोगों की जान पर बन आती है. पहाड़ी इलाकों में सड़कें बनाते समय यदि सावधानी बरती जाए तो इन हादसों में कमी आ सकती है.

आपदा से कम नहीं सड़क हादसे, आंकड़े देते हैं गवाही
प्रदेश में सड़क हादसों में हर साल सैकड़ों जाने चली जाती हैं. इसे एक तरह की आपदा की श्रेणी में रखा जाता है. गौर करने वाली बात ये है कि सड़क हादसों में प्राकृतिक आपदाओं से ज्यादा लोग मारे जाते हैं. अगर घटनाओं, मृत और घायलों की तुलना की जाए तो साल 2018 में प्रकृतिक आपदाओं की करीब 5 हजार घटनाएं हुईं. जिनमें 719 मौतें हुईं और 1205 लोग घायल हुए. वहीं 2018 में 624 सड़क हादसे हुए, जिनमें 601 लोगों की मौत हुई और 1135 लोग घायल हुए.

सड़क हादसों में आपदाओं से ज्यादा मौतें  

घटनाओं और मृत लोगों का अनुपात निकाला जाए तो सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या प्राकृतिक आपदा से कहीं ज्यादा दिखाई पड़ती है. स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सीनियर कंसलटेंट गिरीश जोशी बताते है कि हर साल सडक हादसों  में मारे जाने वालों की संख्या प्राकृतिक आपदा में मारे जाने वाले लोगों की संख्या से कहीं ज्यादा होती है. आपदा प्रबंधन और न्यूनीकरण सेंटर के एक्जिक्यूटिव डाईरेक्टर पियूष रौतेला बताते है कि पहाड़ की सड़कों को बनाते समय ऐसे मोड़ का अंदरुनी हिस्सा नीचा होना चाहिए और बाहर का हिस्सा ऊंचा होना चाहिए.

पहाड़ी सड़कों पर कंडम बसें चला रहा निगम
प्रदेश का परिवहन निगम  पहाड़ी सड़कों पर करीब 350 कंडम बसें चला रहा है.  परिवहन विभाग को इस समय 1160 बसों की ज़रूरत है, लेकिन 2016 के बाद से परिवहन निगम ने कोई नई गाड़ी नहीं खरीदी. इससे ओवरलोडिंग हो रही है, जो कि सड़क हादसों के लिए किसी न्यौते से कम नहीं है.
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दुर्गम इलाकों में रेस्क्यू में देरी से होती हैं मौतें
मौतों की संख्या बड़ी होने की वजह ये भी है कि जहां सड़क हादसे होते हैं वहां तक राहत पहुंचने में समय लग जाता है. रेस्क्यू करने में दिक्कतें आती हैं.

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First published: July 16, 2019, 9:15 PM IST
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