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उत्तराखंड: विरोध भी बिजनेस भी, प्रदेश में 50% से ज्यादा शराब की दुकानें महिलाओं के नाम पर

कोरोनाकाल में आर्थिक नुकसान को देखते हुए सरकार ने शराब की दुकानों को खोलने का फैसला लिया.(सांकेतिक तस्वीर)
कोरोनाकाल में आर्थिक नुकसान को देखते हुए सरकार ने शराब की दुकानों को खोलने का फैसला लिया.(सांकेतिक तस्वीर)

शराब कारोबारियों के मुताबिक वे लोग पत्नी और बेटी को बिजनेस के लिए लकी मानते हुए उनके नाम पर लॉटरी डालते हैं. इसलिए महिलाओं (Women) के नाम पर इतनी शराब की दुकानें (Liquor Shops) हैं.

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देहरादून. उत्तराखंड में शराब (Liquor) को लेकर भले ही महिलाओं (Women) ने सबसे ज्यादा बगावत की हो, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रदेश में आधे से ज्यादा शराब की दुकानें (Liquor Shops) महिलाओं के नाम पर ही चल रही हैं. राजस्व के लिहाज के शराब सरकार के लिए दूसरा सबसे बड़ा जरिया है. यही वजह है कि कोरोनाकाल में भी आर्थिक नुकसान को देखते हुए सरकार ने शराब की दुकानों को खोलने का फैसला लिया.

देहरादून में 35 शराब की दुकानें महिलाओं के नाम पर हैं, जबकि हरिद्वार में 16, नैनिताल में 10, उधमसिंहनगर में 16, पौड़ी में 6 दुकानें महिलाओं के नाम पर चल रही है. हालांकि देहरादून के आबकारी अधिकारी रमेश बंगवाल इसके पीछे दूसरी दलील दे रहे हैं.

विभाग की दलील



रमेश बंगवाल कहते हैं कि राज्य में शराब बेचने के सिलसिले में महिलाओं को न ही कोई छूट है, न ही कोई खास रियायत दी गई है. बावजूद इसके महिलाओं के नाम पर ज्यादा लॉटरी डाली जाती है. इसलिए उनके नाम पर शराब की ज्यादा दुकानें हैं.
पत्नी-बेटी को लकी मानते हैं कारोबारी 

हालांकि महिलाओं के इस बिजनेस में आगे आने के पीछे की वजहों को जानने की कोशिश की गई तो अलग-अलग तर्क सामने आए. दरअसल महिलाओं के नाम पर शराब की दुकानों को उनके पति चलाते हैं. पतियों के मुताबिक वे लोग पत्नी और बेटी को बिजनेस के लिए लकी मानते हुए उनके नाम पर लॉटरी डालते हैं. इसलिए महिलाओं के नाम पर इतनी शराब की दुकानें हैं.

देहरादून के शराब कारोबारी रामकुमार जायसवाल की बीवी और बेटी के नाम पर अकेले देहरादून में 6 शराब की दुकानें हैं. जायसवाल ने बताया कि वो अपनी पत्नी को बिजनेस के लिए लकी मानते हैं. इसलिए उनके नाम पर हर साल लॉटरी डालते हैं.

वजह चाहे जो भी हो, लेकिन इतना जरूर है कि शराब को लेकर जो बगावत के सुर महिलाओं द्वारा पहले उठते थे, प्रदेश की महिलाओं को अब उसमें ज्यादा फायदा नजर आ रहा है.
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