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अकेली रह रही हैं उत्तराखंड की आठ फ़ीसदी से ज़्यादा महिलाएं... सुरक्षा सुनिश्चित करने को नीति तक नहीं

Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: December 12, 2019, 7:35 PM IST
अकेली रह रही हैं उत्तराखंड की आठ फ़ीसदी से ज़्यादा महिलाएं... सुरक्षा सुनिश्चित करने को नीति तक नहीं
अकेले रहने वाली महिलाओं में से ज़्यादातर को समाज में सम्मान और अधिकार नहीं मिल पाते और इसकी वजह से महिला सुरक्षा को लेकर भी डर बना रहता है.

राज्य महिला आयोग की सचिव कामिनी गुप्ता के अनुसार प्रदेश में सिंगल वुमेन की परेशानियों को दूर करने के लिए कोई ठोस कानून नहीं है.

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देहरादून. उत्तराखण्ड (Uttarakhand) में महिला नीति (police for women) न होने का खामियाज़ा प्रदेश में महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है. प्रदेश में आठ फ़ीसदी से ज्यादा महिलाएं अलग-अलग वजह से अकेले जीवनयापन कर रही हैं. इसमें चिंता की बात यह है कि इन महिलाओं में से ज़्यादातर को समाज में सम्मान और अधिकार नहीं मिल पाते और इसकी वजह से महिला सुरक्षा (security of women) को लेकर भी डर बना रहता है.

महिला नीति की ज़रूरत 

महिला आयोग के सर्वे  में आठ फ़ीसदी से भी ज्यादा सिंगल वुमेन के गंभीर स्थिति में रहने की बात सामने आ चुकी है मगर उसके बाद सरकार का कोई ठोस योजना न बनाना चिंता का सबब  है. आयोग की अध्यक्ष कहती हैं कि महिलाओं के रहने, सुरक्षा और जीविका जीने की स्थिति को देखते हुए राज्य स्तरीय नीति बनाया जाना ज़रूरी लग रहा है.

एक्शनएड एसोसिएशन की मनीषा भाटिया ने एकल महिलाओं पर किए गए अध्ययन का हवाला देते हुए उनकी समस्याओं और अधिकारों पर चिंता जाहिर की है. डालसा सचिव और सिविल जज नेहा खुशवाहा कहती हैं कि उत्तराखण्ड में महिला नीति की ज़रूरत अब ज्यादा महसूस हो रही है.

सामाजिक भेदभाव 

राज्य महिला आयोग की सचिव कामिनी गुप्ता के अनुसार प्रदेश में सिंगल वुमेन की परेशानियों को दूर करने के लिए कोई ठोस कानून नहीं है. कई महिलाओं की दिक्कतें तो ऐसी हैं कि पति ने विदेश में जाकर शादी कर ली और महिला सास-ससुर के साथ रह रही हैं. मेहूंवाला की एक महिला ने बताया कि नौ साल से पति के खिलाफ केस लड़ रही हूं, लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला.

सबसे चिंताजनक बात है कि भले ही हम 21वीं सदी में हों लेकिन अगर कोई सिंगल वुमेन किसी समारोह में शिरकत करें तो उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है. यूपी, हिमाचल, राजस्थान जैसे राज्यों में तो महिला नीति है लेकिन महिला शक्ति के लिए पहचाने जाने  वाले राज्य उत्तराखंड में नहीं.महिला नीति पर विचार 

बाल आयोग की अध्यक्ष विजया बड़थ्वाल बताती हैं कि महिला नीति में आश्रय, सुरक्षा और सरंक्षण की व्यवस्था, जमीन संबंधी अधिकार, जीविकोपार्जन की व्यवस्था,सरकारी योजनाओं में वरीयता, कौशल विकास कार्यक्रमों का आयोजन, निर्णय लेने वाले मंचों और प्रक्रियाओं में भागीदारी जैसे मसलों को रखे जाने पर विचार चल रहा है.

 

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First published: December 12, 2019, 6:52 PM IST
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