उत्तराखंड के अधिकतर मंत्री 'सरकार जनता के द्वार' कार्यक्रम से दूर

Mukesh Kumar | ETV UP/Uttarakhand
Updated: August 13, 2017, 4:23 PM IST
उत्तराखंड के अधिकतर मंत्री 'सरकार जनता के द्वार' कार्यक्रम से दूर
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत.
Mukesh Kumar | ETV UP/Uttarakhand
Updated: August 13, 2017, 4:23 PM IST
उत्तराखंड की रावत सरकार ने 'सरकार जनता के द्वार' के जरिए जनता के बीच जाने की तैयारी की थी. उसने तय किया था कि डेढ़ माह में एक बार जिले के प्रभारी मंत्री को न सिर्फ जिला मुख्यालय में प्रवास करना होगा बल्कि जनता मिलन कार्यक्रम और विकास कार्यों की समीक्षा भी करनी होगी, लेकिन अधिकतर मंत्रियों ने कैबिनेट के फैसले से मुंह फेर लिया.

उत्तराखंड की त्रिवेन्द्र रावत कैबिनेट ने 28 जून को फैसला किया था कि हर जिले का प्रभारी मंत्री डेढ़ माह में एक बार जनता मिलन कार्यक्रम के जरिये लोगों की शिकायतें सुनेगा. कैबिनेट में ये भी तय हुआ था कि प्रभारी मंत्री जिला मुख्यालय में रात्रि प्रवास भी करेगा और जिलाधिकारी की मौजूदगी में लोगों की समस्याएं सुनेगा, लेकिन ज्यादातार मंत्री इस फैसले का पालन करने में फिसड्डी ही रहे हैं. सुनिये कैबिनेट बैठक के बाद 28 जून को क्या कहा था मंत्री मदन कौशिक ने...

विकास के दावों पर खरा उतरने और आम जनता तक सरकार की पहुंच सुनिश्चित करने के मकसद से हर जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया था.  28 जून के कैबिनेट के फैसले के बाद कई मंत्री अपने प्रभार वाले जिले के दौरे पर तो गये लेकिन न तो उन्होंने जन सुनवाई की और न ही समीक्षा बैठक.

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज चमोली और हरिद्वार जिले के प्रभारी हैं. प्रकाश पंत ऊधमसिंहनगर और बागेश्वर के प्रभारी हैं. मदन कौशिक देहरादून और उत्तरकाशी के प्रभारी हैं. यशपाल आर्य पौड़ी और रूद्रप्रयाग के प्रभारी हैं. हरक सिंह रावत नैनीताल जिले के प्रभारी मंत्री हैं.

सुबोध उनियाल पिथौरागढ़ के इंचार्ज हैं. अरविन्द पाण्डेय टिहरी जिले में प्रभार संभाल रहे हैं. राज्य मंत्री धन सिंह रावत अल्मोड़ा और रेखा आर्य चम्पावत की प्रभारी हैं. हरक सिंह रावत और प्रकाश पंत को छोड़कर किसी भी मंत्री ने कैबिनेट के फैसला पर अमल नहीं किया है.
First published: August 13, 2017
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