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Lockdown में आराम फ़रमा रही है MS धोनी की 'रानी', जानें क्‍या है पूरा मामला

देहरादून की साक्षी रावत से महेंद्र सिंह धोनी की शादी से समय कई घोड़ियों को देखा गया और अंत में इस रानी को पसंद किया गया था.

देहरादून की साक्षी रावत से महेंद्र सिंह धोनी की शादी से समय कई घोड़ियों को देखा गया और अंत में इस रानी को पसंद किया गया था.

इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) इसी घोड़ी पर बैठकर दुल्‍हन साक्षी को लेने पहुंचे थे. Lockdown के चलते रानी नाम की इस घोड़ी को भी स्थितियां सामान्‍य होने का इंतजार है.

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देहरादून. लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से आम आदमी तो बिना काम के बैठे ही रहे, लेकिन देहरादून (Dehradun)  में एक रानी भी स्थितियां सामान्य होने का इंतज़ार कर रही है, ताकि वह फिर से बैंड-बाजों के साथ सज-धज कर चल सके. यह रानी एक घोड़ी है, लेकिन यह कोई आम घोड़ी नहीं. यह वही घोड़ी है जिस पर बैठकर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) अपनी शादी में दुल्हन को लेने पहुंचे थे. देहरादून की साक्षी रावत (Sakshi Singh Rawat) से महेंद्र सिंह धोनी की शादी के समय कई घोड़ियों को देखा गया और अंत में इस रानी को पसंद किया गया था.

इन दिनों यह भी बाकियों की तरह खाली बैठी है, क्योंकि लॉकडाउन के चलते पिछले 2 महीनें से शादी ब्याह और धार्मिक यात्राओं के कार्यक्रम बंद हैं. ऐसे में रानी की दिनचर्या है कि घर पर दूसरी घोड़ियों और अपनी देखभाल करने वालों के साथ इंतजार करे कि लॉकडाउन खुले. इन दिनों रानी के साथ ही खाली बैठी शादी ब्याह और धार्मिक यात्राओं की शोभा बढ़ाने वाली घोड़ियां और घोड़े भी बिना काम के अस्तबल में हैं और इंतज़ार कर रहे हैं. उत्तराखंड में करीब 300 घोड़ी और घोड़े हैं, जिनसे लगभग 500 परिवारों का पेट पलता है. इन घोड़ों पर खर्च की बात की जाए तो रोज़ औसतन 400 रुपये का खर्चा इन घोड़ों की देखरेख पर आता है.

ब्याज पर ले रहे पैसा 
वैसे तो लॉकडाउन में हर तरह काम धंधे को नुकसान पहुंचा है, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान सीजनल काम-धंधे करने वालों को हुआ है. लॉकडाउन की वजह से पिछले 2 महीने में शादी-ब्याह और धार्मिक कार्यक्रम लगभग बंद हैं और इसके चलते इससे जुड़े काम करने वाले लोगों पर आर्थिक संकट आ गया है. हालत तो यह हो गई है कि अब बहुत से लोग ब्याज पर पैसा देने वालों से पैसा ले रहे हैं, क्योंकि इनका कहना है कि बैंक उन्हें लोन नहीं दे रहे.

बच्चों से बढ़कर 
रानी घोड़ी के मालिक आशीष तलवार कहते हैं कि उनका काम सीज़नल है. मार्च-अप्रैल और मई में शादियां और कई धार्मिक यात्राएं होती थीं. लेकिन, कोरोना महामारी के कारण यह सब बंद हो गया है. लॉकडाउन में उनका पूरा सीज़न खाली चला गया है.

आशीष तलवार कहते हैं कि वह रानी और अन्य घोड़े-घोड़ियों को बच्चों से भी बढ़कर मानते हैं, क्योंकि इनकी वजह से उनका परिवार पलता है. इसलिए उनकी भरपूर सेवा की जाती है. वह उम्मीद जताते हैं कि अक्टूबर तक कोरोना का कहर थम जाएगा और तब शादियों और धार्मिक यात्राओं में उनकी कुछ कमाई हो सकेगी.

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