उत्तराखंड से राज्यसभा सीट के लिए नरेश बंसल ने भरा पर्चा, निर्विरोध चुना जाना तय

25 नवम्बर को खाली होने जा रही राज्यसभा की एक सीट के लिए सोमवार शाम नाम फाइनल होने के बाद बीजेपी प्रत्याक्षी नरेश बंसल ने मंगलवार को विधानसभा पहुंचकर नामांकन कराया.
25 नवम्बर को खाली होने जा रही राज्यसभा की एक सीट के लिए सोमवार शाम नाम फाइनल होने के बाद बीजेपी प्रत्याक्षी नरेश बंसल ने मंगलवार को विधानसभा पहुंचकर नामांकन कराया.

नामांकन के समय मुख्यमंत्री, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के अलावा 5 मंत्री, 28 विधायक रहे मौजूद

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देहरादून. 25 नवम्बर को खाली होने जा रही राज्यसभा की एक सीट के लिए सोमवार शाम नाम फाइनल होने के बाद बीजेपी प्रत्याक्षी नरेश बंसल ने मंगलवार को विधानसभा पहुंचकर नामांकन कराया. इस दौरान उनके साथ सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, अरविंद पांडेय, सुबोध उनियाल, सतपाल महाराज, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धन सिंह रावत, सांसद अजय भट्ट, विधायक खजानदास, महेंद्र भट्ट, गणेश जोशी, गोपाल रावत, कुंवर प्रणव चैंपियन, देशराज कर्णवाल समेत 28 विधायक मौजूद थे. बंसल ने चार सेट में नामांकन पत्र दाखिल किया.

50 साल की सेवाओं का फल मिला

नरेश बंसल का नामाकन पत्र दाखिल करने के बाद बाहर निकले सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि नरेश बंसल की जीत सुनिश्चित है. उनके खिलाफ किसी भी प्रत्याक्षी ने नामांकन दाखिल नहीं किया है. इसलिए उनकी जीत सुनिश्चित हो चुकी है. सीएम ने कहा कि बंसल को पार्टी को दी गई उनकी 50- साल की सेवाओं का फल मिला है... इसीलिए कहा जाता है कि साधना कभी व्यर्थ नहीं जाती.



बता दे कि 70- सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा के विधायकों की संख्या 57 है इसलिए पार्टी प्रत्याशी की जीत तय मानी जा रही है. अभी इस सीट पर कांग्रेस के राज बब्बर हैं जिनका कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है. इस सीट के लिए चुनाव प्रक्रिया 20 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होने के साथ प्रारंभ हुई. मंगलवार को नामंकन की अंतिम तिथि थी. नौ नवम्बर को मतदान होना है.
त्रिवेंद्र सरकार में बंसल 20-सूत्रीय कार्यक्रम कियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष हैं, उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है. वह बीजेपी में प्रदेश महामंत्री संगठन, प्रदेश महामंत्री, पार्टी की राष्ट्रीय कार्यपरिषद के सदस्य और लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

नया कोई गुल खिलाएगी बहुगुणा, हरक की उपेक्षा

प्रदेश भाजपा ने राज्यसभा की एक सीट के लिए पांच नाम भेजे थे. इनमें नरेश बंसल के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व सांसद बलराज पासी, पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल व पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय सचिव महेंद्र पांडे का नाम शामिल था. सियासी हलकों में पूर्व सीएम विजय बहुगुणा की दावेदारी पुख्ता मानी जा रही थी, लेकिन बहुगुणा इस बार भी दौड़ में पीछे रह गए.

बहुगुणा के ही नेतृत्व में 2016 में कांग्रेस के 9 विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे. शामिल होने वाले सभी लोगों का तो सियासी पुनर्वास हुआ लेकिन बहुगुणा वेटिंग में ही रह गए. इधर बहुगुणा गुट के इन नेताओं में से मंत्री सुबोध उनियाल, सतपाल महाराज के अलावा अन्य मंत्री नामांकन में नजर नहीं आए.

हरक सिंह रावत कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद पहले ही नाराज चल रहे हैं. उन्होंने विभागीय कार्यक्रमों से भी दूरी बनाई हुई है. सियासी हलकों में चर्चा है कि बहुगुणा का वेटिंग में रह जाना और हरक की नाराज़गी के आने वाले दिनों में नए गुल खिला सकती है.
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