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    उत्तराखंड में दलितों को साधने की जिम्मेवारी निभाएंगे बीजेपी के नए प्रदेश प्रभारी

    दलितों को जोड़ बीजेपी, निचले तबके तक अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है.
    दलितों को जोड़ बीजेपी, निचले तबके तक अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है.

    2022 में चुनाव जीतना कैसे है, यह रणनीति बनाने में दुष्यंत कुमार गौतम का रोल अहम होगा. बीजेपी इसमें जातिगत वोट भी तलाश रही है. यानि जिस राज्य में ब्राह्मण-ठाकुर सत्ता की धुरी हो, वहां दलितों को जोड़ बीजेपी अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 17, 2020, 6:13 PM IST
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    देहरादून. बीजेपी (BJP) को दीवाली (Divali) के मौके पर नए प्रदेश प्रभारी मिले. सरकार और संगठन को उम्मीद है कि दलित वर्ग को साथ जोड़ने में उनका खास रोल होगा. और यही फैक्टर 2022 के लिए बीजेपी को और मजबूत करेगा.

    चुनाव में दुष्यंत का रोल अहम होगा

    आपको याद दिला दें कि राज्यसभा सांसद दुष्यंत कुमार गौतम को उत्तराखंड प्रदेश बीजेपी का नया प्रदेश प्रभारी बनाया गया है. यानि 2022 में चुनाव जीतना कैसे है, यह रणनीति बनाने में दुष्यंत कुमार गौतम का रोल अहम होगा. लेकिन बीजेपी इसमें जातिगत वोट भी तलाश रही है. यानि जिस राज्य में ब्राह्मण-ठाकुर सत्ता की धुरी हो, वहां दलितों को जोड़ बीजेपी, निचले तबके तक अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि दुष्यंत कुमार गौतम जमीनी कार्यकर्ता हैं और उनके आने से पार्टी की एक खास वर्ग तक पहुंच बढ़ेगी.



    बीजेपी की निगाह दलित वोटों पर
    विशेषज्ञ मानते हैं कि बीजेपी की नजर उस दलित वोट पर है, जो कांग्रेस का पक्का वोट माना जाता है. विशेषज्ञों की मानें तो करीब 1 करोड़ की आबादी वाले राज्य में एक अनुमान के मुताबिक 35 प्रतिशत ठाकुर, 25 प्रतिशत ब्राह्मण और 17 प्रतिशत दलित हैं, जबकि 23 फीसदी में ओबीसी और अल्पसंख्यक शामिल हैं. उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीटों में 15 सीटें आरक्षित हैं. जिनमें 13 सीटें एससी और 2 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं. जिनमें पुरोला, भगवानपुर और चकराता से कांग्रेस के विधायक हैं. यानि 15 में से सिर्फ 3 आरक्षित सीट कांग्रेस के पास हैं.



    दलितों को भी साधना चाहती है बीजेपी

    वरिष्ठ पत्रकार नीरज कोहली का कहना है कि उत्तराखंड में ब्राह्मण और ठाकुर जाति सत्ता के केंद्र में रहती है. लेकिन अब खुद को और मजबूत करने के लिए बीजेपी दलितों को साथ लेकर चलना चाहती है. ताकि चुनाव में इस फैक्टर का फायदा मिल सके. उत्तरराखंड में दलित फैक्टर भले की सत्ता के केंद्र में न रहा हो, लेकिन सत्ता के लिए हर समीकरण को सेट करने वाली बीजेपी दलित को साथ लेकर चलने के संदेश के साथ सियासत साधना चाहती है.
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