प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अगले 3 महीने महत्वपूर्ण... कृषि के साथ ही उद्योगों में पैदा करने होंगे रोज़गार
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प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अगले 3 महीने महत्वपूर्ण... कृषि के साथ ही उद्योगों में पैदा करने होंगे रोज़गार
अब तक करीब दो लाख प्रवासी उत्तराखंडी वापस आने के लिए आवेदन कर चुके हैं और हज़ारों की संख्तया में लोग पहुंच चुके हैं.

उत्तराखंड में पलायन रोकने और रिवर्स पलायन शुरु करने के उद्देश्य से गठित पलायन आयोग प्रवासियों के वापस आने पर चिंता जताते हुए कह चुका है कि इससे प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय कम होगी.

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देहरादून. कोरोना वायरस, कोविड-19, के रूप में दुनिया के सामने आए अभूतपूर्व संकट की वजह से बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी भी अपने घर लौट रहे हैं. डेढ़ लाख से ज़्यादा प्रवासी उत्तराखंडी वापस आने के लिए आवेदन कर चुके हैं. रिवर्स पलायन यानी पलायन कर चुके लोगों को वापस लाने के वादे के साथ सत्ता में आई बीजेपी की डबल इंजन सरकार को समझ नहीं आ रहा कि इन लोगों को रोज़गार मिलेगा कैसे? हालांकि राज्य सरकार इस पर विचार के लिए दो कमेटियों का गठन कर चुकी है. एक मंत्रिमंडलीय कमेटी कैबिनेट मंत्री की अध्यक्षता में बनाई गई है और एक पूर्व आईएएस की अध्यक्षता में लेकिन घर लौट रहे प्रवासियों को अभी उनके सबसे बड़े सवाल का जवाब नहीं मिलने वाला कि वह यहां रहकर करेंगे क्या?

पलायन आयोग की चिंता

उत्तराखंड में पलायन रोकने और रिवर्स पलायन शुरु करने के उद्देश्य से गठित पलायन आयोग प्रवासियों के वापस आने पर चिंता जताते हुए कह चुका है कि इससे प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय कम होगी. सरकार मंत्री स्तर पर और अधिकारियों के स्तर पर मंथन करने के लिए रही है और रोज़ प्रवासी उत्तराखंडी वापस आकर बेरोज़गारों की संख्या को बढ़ा रहे हैं.



अब तक करीब 1.90 लाख प्रवासी उत्तराखंडी घर वापसी के लिए आवेदन कर चुके हैं और हज़ारों की संख्या में अब तक उत्तराखंड पहुंच भी चुके हैं. हालांकि रोज़गार के लिए राज्य से पलायन करने वालों की संख्या का यह बहुत कम प्रतिशत है.
तीन महीने महत्वपूर्ण

गढ़वाल विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर एमसी सती कहते हैं कि देश भर से लौट रहे प्रवासियों के मन में आज सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि वह घर पर रहकर करेंगे क्या? इसी सवाल का जवाब न मिलने पर उत्तराखंड से लाखों लोगों का पलायन हुआ है.

उत्तराखंड में ऑल वेदर रोड समेत बड़ी संख्या में इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट चल रहे हैं. इनमें काम की काफ़ी गुंजाइश है क्योंकि इनमें लगे बहुत सारे दूसरे प्रदेशों के मज़दूर भी वापस जा रहे हैं, चले गए हैं. लेकिन जो प्रवासी उत्तराखंडी लौट रहे हैं वह मज़दूरी का काम नहीं करते.

प्रोफ़ेसर सती कहते हैं कि बड़ी ज़रूरत यह है कि जो प्रवासी मज़दूर लौट रहे हैं उन्हें कृषि कार्यों में लगाया जाए. उदाहरण के लिए पहाड़ी इलाकों में आलू बहुत अच्छा होता है जो दो-तीन महीने में फ़सल भी दे देता है. जब तक सरकार कोई योजना बनाए ऐसे ही कृषि कार्यों में प्रवासियों की ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि वह अपने भविष्य को लेकर कंफ़्यूज़ न रहें क्योंकि इससे दिक्कतें बढ़ेंगी ही.

उद्योगों को आकर्षित करने की ज़रूरत

प्रोफ़ेसर सती कहते हैं कि केंद्र सरकार चीन से बाहर निकलने वाले उद्योगों को भारत में आकर्षित करने के लिए काम शुरु कर चुकी है और हज़ार से ज़्यादा ज़िलों में जगह चिन्हित की जा चुकी है. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए श्रम कानूनों को उदार बना चुके हैं. उत्तराखंड को भी इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है.

उत्तराखंड में ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार के साथ ही देहरादून, पौड़ी, नैनीताल के मैदानी क्षेत्र में उद्योगों को आकर्षित किए जाने की ज़रूरत है. यहां पहले से ही सिडकुल मौजूद हैं और उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति  बहुत सारे उद्योगों के लिए सही साबित होती है. बस सरकार को सही दिशा में कोशिश करने की आवश्यकता है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को करेंगे मजबूत

सरकार दावा कर रही है कि वह यह कोशिश शुरु कर चुकी है. कृषि मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया गया है जिसकी एक बैठक शनिवार को हो चुकी है. उनियाल कहते हैं कि मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्र का विकास करना है. वापस लौटने वाले प्रवासियों को रोकना है तो उन्हें घरों में ही रोज़गार उपलब्ध करवाना होगा चाहे वह कृषि-उद्यानिकी से मिले या एमएसएमई सेक्टर में.

उनियाल कहते हैं कि उपसमिति कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र सभी के विशेषज्ञों से बात करेगी और उसके बाद ही कोई योजना बनाएगी. अर्थव्यवस्था के जानकारों से भी बात की जाएगी और उसके आधार पर ही आगे बढ़ा जाएगा. हालांकि कुछ योजनाएं हैं जिन पर विचार किया जा रहा है जैसे कि मीडियम टर्म लोन ज़ीरो पर्सेंट ब्याज पर उपलब्ध करवाकर लोगों को स्वरोज़गार के लिए प्रेरित किया जा सकता है. इसके अलावा कलेक्टिव फ़ार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है. 4000 क्लस्टर्स पर, दो लाख एकड़ ज़मीन पर प्रदेश में कलेक्टिव फ़ार्मिंग की जा रही है.

हालांकि उनियाल कोई डेडलाइन बताने से इनकार करते हैं और कहते हैं कि जितनी जल्दी संभव होगा उपसमिति अपनी रिपोर्ट कैबिनेट को सौंप देगी.

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