जानिए कौन हैं उत्तराखंड में पलायन के दर्द को ऑस्कर की दहलीज़ पर ले जाने वाले निर्मल चंद्र डंडरियाल

ऑस्कर की रेस में जगह बनाने वाली डॉक्यूमेंट्री 'मोती बाग'  के निर्देशक हैं दिल्ली में रहने वाले पौड़ी के ही निर्मल चंद्र डंडरियाल.
ऑस्कर की रेस में जगह बनाने वाली डॉक्यूमेंट्री 'मोती बाग' के निर्देशक हैं दिल्ली में रहने वाले पौड़ी के ही निर्मल चंद्र डंडरियाल.

भारत से ऑस्कर के लिए जिन दो डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मों को नामित किया गया है उनमें से एक है ‘मोती बाग’. यह पौड़ी में रहने वाले 83 साल के विद्यादत्त शर्मा पर बनी है.

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उत्तराखंड (Uttarakhand) के सबसे बड़े दर्द पलायन (Palayan) की कहानी अब दुनिया के सामने ऑस्कर (Oscar Award) में कही जाएगी. भारत से ऑस्कर (India’s Entry) के लिए जिन दो डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मों (Documentary Film) को नामित किया गया है उनमें से एक है ‘मोती बाग’ (MOTI BAGH) . यह डॉक्यूमेंट्री पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) के कल्जीखाल ब्लॉक में पलायन करवाने वाली परिस्थितियों को मुंहतोड़ जवाब देने वाले 83 साल के विद्यादत्त शर्मा (Vidyadutt Sharma) पर बनी है. ऑस्कर की रेस में जगह बनाने वाली इस फ़िल्म के निर्देशक हैं दिल्ली में रहने वाले पौड़ी के ही निर्मल चंद्र डंडरियाल (Nirmal Chandra Dandriyal). उत्तराखंड में भी ज़्यादातर लोगों के लिए निर्मल चंद्र डंडरियाल का नाम नया हो सकता है लेकिन डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मों की दुनिया में वह जाना माना नाम हैं. उत्तराखंड के तो वह अकेले ऐसे निर्देशक हैं जिन्हें तीन नेशनल अवॉर्ड मिले हैं (3 National Award Winner).

पहली डॉक्यूमेंट्री से ही मिली पहचान 

बतौर निर्देशक निर्मल की पहली डॉक्यूमेंट्री 2008 में रिलीज़ हुई थी. 60 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री ALL THE WORLD’S A STAGE ने ही डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों को बता दिया था कि एक स्टार की एंट्री हो गई है. डीडी नेशनल चैनल पर दिखाई गई इस डॉक्यूमेंट्री के लिए निर्मल को भारत के सबसे प्रतिष्ठित डॉक्यूमेंट्री-शॉर्ट फ़िल्म फ़ेस्टिवल ‘इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फ़िल्म फ़ेस्टिवल, केरल 2009’ में साउंड डिज़ाइन के लिए ज्यूरी स्पेशल मेंशन अवॉर्ड मिला.



इसके अलावा निर्मल डंडरियाल की पहली डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म को इंटरनेशनल फ़ेस्टिवल ऑफ़ फ़िल्म्स ऑन ट्राइबल आर्ट एंड कल्चर. भोपाल, 2009 में स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड भी मिला. इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने 2008 में साउंड डिज़ाइन के लिए गोल्ड प्राइज़ दिया. 2009 में हुए चौथे काबुल इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फ़िल्म फ़ेस्टिवल में इसे बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म का सम्मान मिला, 2011 में नेपाल के इंटरनेशनल फ़ोक म्यूज़िक फ़िल्म फ़ेस्टिवल में उन्हें कॉमेडेशन अवार्ड मिला.
MOTI BAGH, मोती बाग डॉक्यूमेंट्री
डॉक्यूमेंट्री 'मोती बाग' को भारत के सबसे प्रतिष्ठित डॉक्यूमेंट्री-शॉर्ट फ़िल्म फ़ेस्टिवल ‘इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फ़िल्म फ़ेस्टिवल, केरल 2019’ में बेस्ट लॉंग डॉक्यूमेंट्री का अवॉर्ड मिला है.


11  साल में 9 डॉक्यूमेंट्री, दर्जनों अवॉर्ड  

2008 THE WORLD’S A STAGE से 2019 में मोती बाग तक निर्मल चंद्र डंडरियाल 9 डॉक्यूमेंट्री फ़िल्में बना चुके हैं और इनके लिए दर्जनों अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड हासिल कर चुके हैं. उत्तराखंड के तो वह अकेले ऐसे फ़िल्मकार हैं जिन्हें तीन नेशनल अवॉर्ड हासिल हुए हैं.

निर्मल चंद्र डंडरियाल को 2016 में बेगम अख़्तर की जीवनी पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री, ‘ज़िक्र उस परीवश का’ के लिए ‘बेस्ट बायोग्राफ़िकल/ हिस्टोरिकल रीकंस्ट्रक्शन’ का नेशनल अवार्ड मिला. ख़ास बात यह है कि इस डॉक्यूमेंट्री के प्रोड्यूसर संगीत नाटक अकादमी को 70 साल के अपने कार्यकाल में यह पहला नेशनल अवॉर्ड मिला था. हालांकि निर्मल का यह तीसरा नेशनल अवॉर्ड था.

पाकिस्तानी ड्राइवर की कहानी 

‘ड्रीमिंग ताज महल’ डॉक्यूमेंट्री को 2012 का ‘बेस्ट फ़िल्म फ़ॉर प्रमोटिंग पीस’ कैटेगिरी में नेशनल अवॉर्ड मिला. यह डॉक्यूमेंट्री एक पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर पर आधारित है, जिनका सपना ताजमहल देखने का है. निर्मल इस फ़िल्म के प्रोड्यूसर भी थे इसलिए उन्हें इसके लिए प्रोड्यूसर और डायरेक्टर दोनों के लिए अवार्ड मिले थे.

Nirmal Chander, पौड़ी के सांगुड़ा गांव में डॉक्यूमेंट्री शूट करते निर्मल चंद्र डंडरियाल
पौड़ी के सांगुड़ा गांव में डॉक्यूमेंट्री शूट करते निर्मल चंद्र डंडरियाल


भारत की अफ़्रीकन मूल के भारतीय जनजाति सिदि, पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर, गज़ल गायिका बेगम अख़्तर, योग, छाउ आर्टिस्ट निर्मल चंद्र डंडरियाल की डॉक्यूमेंट्री विविध विषयों पर बनी हैं. ‘मोती बाग’ ऐसी पहली डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म है जिसके साथ वह अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं.

चेन्नई में जन्म, राजस्थान में कॉलेज 

पौड़ी के एकेश्वर ब्लॉक में दूनी गांव के मूल निवासी निर्मल चंद्र डंडरियाल के पिता एयरफ़ोर्स में थे इसलिए उनकी पोस्टिंग के साथ परिवार भी घूमता रहा. निर्मल का जन्म चेन्नई में हुआ था, स्कूलिंग दिल्ली, ग्रेजुएशन राजस्थान से हुई. बीएससी करने के दौरान उनका अपने गांव आना-जाना शुरु हुआ था और इसके साथ ही पहाड़ से जुड़ाव भी.

डॉक्यूमेंट्री मेकिंग से पहले निर्मल ऑडियो-विज़ुअल मीडिया में वीडियो एडिटिंग से जुड़े. अब भी अपनी फ़िल्मों की एडिटिंग वह खुद ही करते हैं. उन्होंने टेन स्पोर्ट्स में बतौर वीडियो एडिटर काम शुरु किया था और बाद में प्रोमो और फ़िलर्स प्रोड्यूसर बने. 1997 में उन्होंने MOTHER TERESA’S FIRST LOVE डॉक्यूमेंट्री से बतौर एसोसिएट डायरेक्टर और एडिटर करियर शुरु किया था. निर्मल अब भी डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मों की एडिटिंग से जुड़े हुए हैं.

Director and Subject: निर्मल चंद्र डंडरियाल और विद्यादत्त शर्मा


उत्तराखंड की पहली कहानी

‘मोती बाग’ के मुख्य सबजेक्ट विद्यादत्त शर्मा निर्मल के रिश्तेदार हैं. वह इस बुजुर्ग की अदम्य इच्छाशक्ति और धैर्य के कायल हुए और पिछले कुछ सालों से इन पर डॉक्यूमेंट्री बनाने पर विचार कर रहे थे. निर्मल कहते हैं कि यह डॉक्यूमेंट्री ख़ामोशी से पलायन, जल संरक्षण, खेती से लोगों को अलगाव जैसे बहुत से विषयों को छूती हुई 83 साल के बुजुर्ग की बात करती है जो अब भी 24 किलो के रिकॉर्ड ब्रेकिंग मूली (मूला) उगा रहा है.

निर्मल अब पहाड़ सी जुड़ी कहानियों को, यहां की समस्याओं को, संस्कृति को विषय बनाकर कान करने पर विचार कर रहे हैं. ‘मोती बाग’ और निर्मल चंद्र डंडरियाल के लिए ऑस्कर की रेस अभी शुरु हुई है और इसमें जीत के लिए करोड़ों भारतीयों ख़ासकर उत्तराखंडियों की दुआएं उनके साथ हैं.

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