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उत्तराखंड बीजेपी में अब बाहर के नेताओं के लिए नो एंट्री!
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Kishore Kumar Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: December 31, 2019, 7:28 PM IST
उत्तराखंड बीजेपी में अब बाहर के नेताओं के लिए नो एंट्री!
इस पर अजय भट्ट ने कहा कि फ़िलहाल बाहर से आने वाले सभी लोगों के लिए पार्टी में नो एंट्री का बोर्ड लगा दिया गया है.

भाजपा में शामिल होने कि इच्छा रखने वालों को करना होगा लम्बा इंतज़ार

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देहरादून. कोई कांग्रेसी अगर भाजपा में जाने की सोच रहा है, तो उसको इंतजार करना होगा. फ़िलहाल भाजपा में नो एंट्री का बोर्ड लग गया है. शायद यह सुनकर आपको अजीब लग रहा होगा लेकिन यही सच है. उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नैनीताल-ऊधम सिंह नगर सांसद अजय भट्ट ने न्य़ूज़ 18 से साफ़ शब्दों में कहा कि भाजपा का परिवार बहुत बड़ा हो गया है, संभालने में दिक्कत आती है, इसलिए यहां पर कुछ दिनों के लिए नो एंट्री है.

हरीश रावत के बहाने...

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का इशारा कांग्रेस में चल रही उथल-पुथल की ओर था. दरअसल न्यूज़ 18 ने अजय भट्ट से बातचीत में कांग्रेस में हालिया घटनाक्रम का ज़िक्र किया था. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत संन्यास लेने की बात कर रहे हैं और धारचूला विधायक हरीश धामी ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कर दी है. भाजपा पहले भी कांग्रेस के नाराज़ नेताओं का स्वागत करती है और इसी को लेकर न्यूज़ 18 ने पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष से पूछा था कि अगर ऐसी स्थिति आई तो क्या इन दोनों के लिए भी भाजपा के दरवाज़े खुले रहेंगे? इस पर अजय भट्ट ने न सिर्फ़ इन दोनों के लिए बल्कि बाकी सभी के लिए पार्टी में नो एंट्री का बोर्ड लगा दिया.



पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी 



वैसे भाजपा का दावा है कि उसके  देशभर में 16 करोड़ और उत्तराखंड में 26 लाख सदस्य हैं. इस संख्या के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी हो गई है और यकीनन उसका परिवार बड़ा परिवार हो गया है. अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नैनीताल सांसद अजय भट्ट के बयान पर गौर करें कि उनके बयान के क्या राजनीति मायने हैं.

पहला तो यह कि उत्तराखंड भाजपा में पहले से ही कई कांग्रेसी 2017 और 2019 के चुनावों के समय और उसके बाद निकाय चुनावों में भी शामिल हो चुके हैं. कांग्रेस छोड़कर आए नेता कैबिनेट मंत्री के साथ ही कई अन्य पदों पर बैठे हैं. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, कांग्रेसी या दूसरे राजनीतिक दलों को महत्व मिलने की वजह से पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है. और इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराज़गी बढ़ती जा रही है.

2022 पर नज़र 

इसका दूसरा पहलू यह है कि भाजपा लगातार पांच राज्य खो चुकी है. भाजपा के थिंक टैंक को लग रहा है कि विस्तार देने के चक्कर में पार्टी के कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है और लगातार हार इसका नतीजा हैं. यह अजीब नहीं कि एक्सपोर्ट होकर आने वाले नेताओं को पार्टी के पुराने, कर्मठ लोग पचा नहीं पा रहे हैं.

अब भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को ही आगे बढ़ाने की सोच रही है. उत्तराखंड में 2022 में विधानसभा के चुनाव हैं और भाजपा अभी से चुनावी तैयारियों में जुट गई है. नो एंट्री का बोर्ड इसी दिशा में एक कदम हो सकता है.

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First published: December 31, 2019, 7:01 PM IST
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