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देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, चकराता में नहीं होगी क्रिसमस-नए साल पर पार्टी... पर्यटन मंत्री को दून DM का झटका

इस साल देहरादून-मसूरी में सेलिब्रेट करने के प्लान धरे के धरे रह जाने वाले हैं.
इस साल देहरादून-मसूरी में सेलिब्रेट करने के प्लान धरे के धरे रह जाने वाले हैं.

देहरादून ज़िला प्रशासन ने नए साल के सेलिब्रेशन पर होटल, बार, रेस्टोरेंट पर पार्टी ऑर्गेनाइज़ करने पर पाबंदी लगा दी है

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देहरादून. क्रिसमस और न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए अगर आप देहरादून, मसूरी, चकराता या ऋषिकेश आने का प्लान बना रहे हैं तो उस पर दोबारा विचार कर लें. देहरादून प्रशासन ने क्रिसमस और नए साल पर पर सभी होटलों बार रेस्टोरेंट और सार्वजनिक स्थलों पर पब्लिक गैदरिंग , सामूहिक पार्टी और सेलिब्रेशन प्रोग्राम पर बैन लगाया है और इसके उल्लंघन पर  महामारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया है. इसका अर्थ यह है कि देहरादून शहर ही नहीं मसूरी, चकराता और अधिकांश ऋषिकेश में किसी तरह का कोई जश्न नहीं मनाया जा सकेगा.

'बेहद ज़रूरी फ़ैसला'

देहरादून ज़िला प्रशासन ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर सार्वजनिक पार्टियों पर बैन लगा दिया है. राजधानी (अस्थाई) के ज़िलाधिकारी आशीष कुमार श्रीवास्तव ने इसके आदेश जारी करते हुए साफ़ किया कि कोविड-19 का  संक्रमण रोकने के मद्देनज़र यह फ़ैसला लिया जाना बेहद ज़रूरी है.



यह ख़बर होटल, बार, रेस्टोरेंट संचालकों को बड़ा झटका देने वाली हैं क्योंकि नए साल को लेकर  देहरादून के  होटल और बार संचालक बेहद उत्साहित थे. देहरादून जिला प्रशासन के इस फैसले के बाद लोग देहरादून का रुख न करने के बजाय प्रदेश के ही अन्य जिलों का रुख कर सकते हैं या फिर अन्य प्रदेश की ओर जा सकते हैं.
CM के आदेश की भी नहीं की थी DM ने परवाह 

दरअसल उत्तराखंड में भी विरोधाभासों का खेल चल रहा है, ख़ासकर देहरादून में. पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और पर्यटन सचिव ने सोमवार को ही पर्यटकों को उत्तराखंड में क्रिसमस और नए साल के लिए आने का निमंत्रण दिया था. कोरोना काल के दौरान बंदी की मार झेल रही होटल और टूरिज़्म इंडस्ट्री भी उत्साहित नज़र आ रही थी क्योंकि दोनों दिनों के लिए अच्छी बुकिंग मिल रही थी लेकिन देहरादून ज़िला प्रशासन ने इस उत्साह को एक आदेश से ठंडा कर दिया है.

यहां यह बता देना भी ज़रूरी है कि मौजूदा ज़िलाधिकारी के ही कार्यकाल में मई में यह कमाल हुआ था कि देहरादून में मुख्यमंत्री ने दुकानें खोलने का समय बढ़ाने को लेकर जो आदेश दिया वह 24 घंटे तक ज़िलाधिकारी के पास नहीं पहुंचा और यहां उस आदेश पर पालन नहीं हुआ था. बाद में उस दिन मुख्य सचिव को प्रदेश भर के लिए अलग से आदेश जारी करना पड़ा था.

जिस राजधानी (अस्थाई) में मुख्यमंत्री के आदेश तक खो जा रहे हों उसमें पर्यटन मंत्री की अपील को खारिज कर उसके विपरीत आदेश देना तो बड़ी बात नहीं लग रही.
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