अब तेज होगी साइबर क्राइम की जांच... नए इंस्पेक्टर मिलने से बदलेगा पुलिस के काम करने का तरीका
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अब तेज होगी साइबर क्राइम की जांच... नए इंस्पेक्टर मिलने से बदलेगा पुलिस के काम करने का तरीका
आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार

पहाड़ी ज़िलों में खाली पड़े इंसपेक्टरों के पदों पर भी जल्द होगी तैनाती

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देहरादून. तकनीक का हमारी जिंदगियों में दखल बढ़ने के साथ ही साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं लेकिन उत्तराखंड में ज़्यादातर साइबर क्राइम दर्ज ही नहीं किए जाते हैं. जब अपराध दर्ज ही नहीं होंगे तो उन पर कार्रवाई कैसे होगी? हालांकि ऐसा नहीं कि पुलिस अपना रिकॉर्ड क्लीन रखने के लिए ये केस दर्ज नहीं करती है, दरअसल उत्तराखंड पुलिस के पास साइबर अपराधों की जांच के लिए अधिकारी ही नहीं थे. हालत इतनी खराब है कि सिर्फ़ गढ़वाल रेंज में साइबर अपराध की 8000 से ज्यादा तहरीर दी गईं लेकिन मुकदमे दर्ज हुए सिर्फ़ 275. अब यह स्थिति बदलने की उम्मीद की जा सकती है.

अब तक रही है इंस्पेक्टरों की कमी 

उत्तराखंड में साइबर अपराधों का ग्राफ तेज़ी से बढ़ा है लेकिन इससे जुड़े मुक़दमे बहुत कम ही दर्ज किए जाते हैं. इसकी मुख्य वजह पुलिस के पास इंस्पेक्टरों की कमी रही. दरअसल साइबर क्राइम से जुड़े अपराधों की जांच इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी ही कर सकते हैं.



अब यह उम्मीद की जा सकती है कि साइबर अपराधों की कार्रवाई में तेज़ी आ सकेगी. हाल ही में पदोन्नत होकर इंस्पेक्टर बने सभी पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों की जांच की ट्रेनिंग दी जाएगी और साइबर अपराधों की जांच के काम सौंपे जाएंगे.
पहाड़ों में भी भरे जाएंगे खाली पद 

बता दें कि गढ़वाल रेंज में अभी तक 70 पदों की स्वीकृति के सापेक्ष सिर्फ 44 ही इंस्पेक्टर थे. पदोन्नति के बाद अब गढ़वाल रेंज में इंस्पेक्टरों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है. इसलिए पहाड़ों में खाली पड़े इंस्पेक्टरों के पदों पर भी नए इंस्पेक्टरों की तैनाती की जाएगी.

आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार ने बताया की अब नए इंस्पेक्टरों के मिल जाने के बाद पुलिस बेहतर स्थिति में आ गई है. वह बताते हैं कि सभी ज़िलों में साइबर अपराधों में वृद्धि हो रही है. पुलिस को अच्छी खासी संख्या में इंस्पेक्टर मिलने के बाद अब साइबर अपराधों पर की जांच तेज़ होगी और साइबर अपराध करने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी.
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