जिम कॉर्बेट में बाघों की बढ़ती संख्‍या सरकार के लिए बनी चुनौती, मंडरा रहा है ये 'खतरा'

Jim Corbett National Park- तय मानकों के मुताबिक एक टाइगर को 10 से 15 वर्ग किलोमीटर तक का एरिया चाहिए, लेकिन कॉर्बेट नेशनल पार्क में एक टाइगर को 5 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र भी नहीं मिल रहा है. यही बात मुसीबत बनती जा रही है.

Kishore Kumar Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: August 8, 2019, 5:12 PM IST
जिम कॉर्बेट में बाघों की बढ़ती संख्‍या सरकार के लिए बनी चुनौती, मंडरा रहा है ये 'खतरा'
Jim Corbett National Park- तय मानकों के मुताबिक एक टाइगर को 10 से 15 वर्ग किलोमीटर तक का एरिया चाहिए, लेकिन कॉर्बेट नेशनल पार्क में एक टाइगर को 5 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र भी नहीं मिल रहा है. यही बात मुसीबत बनती जा रही है.
Kishore Kumar Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: August 8, 2019, 5:12 PM IST
उत्तराखंड का जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क दुनिया भर में बाघों के लिए मशूहर है. इसमें सबसे ज्यादा बाघों की संख्या भी है, लेकिन अब बढ़ती बाघों की संख्या बाघों के लिए ही 'खतरा' बनती जा रही है. सरकार के लिए इससे निपट पाना चुनौती बन गया है. वजह साफ है कि जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क एरिया में जितने बाघ होने चाहिए, संख्या इससे कहीं ज्यादा है. इसका पूरा एरिया 520.82 वर्ग किलोमीटर है, जो आज बाघों के लिए पूरा नहीं हो पा रहा है.

आपको बता दें कि कॉर्बेट नेशनल पार्क में बाघों की संख्या उनके तय भौगोलिक क्षेत्र से अधिक हो गई है. इस वक्त लगभग 250 बाघ कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पार्क में हैं. तय मानकों के मुताबिक एक टाइगर को 10 से 15 वर्ग किलोमीटर तक का एरिया चाहिए, लेकिन कॉर्बेट पार्क में एक टाइगर को 5 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र भी नहीं मिल रहा है. वैसे देखा जाये तो यहां 100 से 150 टाइगर ही एक आइडियल संख्या ही रह सकती है, लेकिन संख्या उससे ज्यादा है. शायद यही वजह है कि बाघ अब पार्क से बाहर उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में देखे जा रहे हैं. इसके साथ ही बाघ मानव बस्ती में अपना रुख कर सकते हैं, जो कि ना सिर्फ मानव बल्कि खुद बाघों के लिए खतनाक साबित हो सकता है.

हो सकती है ये बड़ी मुसीबत
जानकारों के मुतबिक बाघों की बढ़ती संख्या के कारण पार्क के क्षेत्र में बाघों के बीच एरिया को लेकर आपसी संघर्ष ज्यादा बढ़ेगा. जबकि खाने की कमी हो जायेगी. इसके साथ अगर कोई बीमारी किसी बाघ या जानवर को लगती हैं, तब ये स्थिति और विकट हो जाएगी और कम क्षेत्र होने के कारण जंगल में बीमारी तेजी से फैलेगी. यकीनन यही बात बाघों बड़ा खतरा बन सकती है.

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के निदेशक राहुल के मुताबिक, पार्क में बाघों की बड़ी संख्या से कोई दिक्क्त नहीं है. बाघों के लिए भरपूर मात्रा में खाना और पानी है.

वन्‍यजीवी हुए चिंतित
बाघों की बढ़ती संख्‍या और घटते क्षेत्र से वन्‍य जीवी प्रेमी चिंतित हैं. उनका मानना है कि सरकार और वन विभाग को नेशनल पार्कों का क्षेत्रफल बढ़ाना चाहिए. प्रकृति का संतुलन बनाये रखने के लिए जरूरी है कि संख्या ज्यादा होने से संघर्ष बढ़ेगा और अगर कोई बड़ी महामारी हो गयी तो वन्य जीवों पूरी नस्‍ल खत्‍म हो सकती है.
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First published: August 8, 2019, 4:54 PM IST
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