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देहरादून में इस मंदिर में चांदी की बांसुरी चढ़ाने पर होती है संतान की प्राप्ति, जानिए क्या है मान्यता?

देहरादून में इस मंदिर में चांदी की बांसुरी चढ़ाने पर होती है संतान की प्राप्ति, जानिए क्या है मान्यता?

Shri krishna Janmashtami Special: देहरादून के हकीकतराय नगर के मन्नूगंज रोड स्थित मंदिर श्री राधा कृष्ण मंदिर से मान्यता जुड़ी है कि अगर कोई व्यक्ति यहां आकर जन्माष्टमी के अवसर पर श्री कृष्ण की आराधना करता है तो उसे श्रीकृष्ण जैसे मनमोहक और नटखट पुत्र की प्राप्ति होती है. हकीकत राय निगर निवासी गरिमा वाधवा ने बताया कि यह मंदिर 70 वर्ष से ज्यादा पुराना है.

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रिपोर्ट- हिना आज़मी

देहरादून: विवाह होने के बाद प्रत्येक दंपति का सपना होता है कि उनके घर का आंगन किलकारियों से गूंज उठे लेकिन कई लोगों के आंगन सूने होते हैं. आज हम आपको एक ऐसा देहरादून का मंदिर बताने वाले हैं जहां श्री कृष्ण की आराधना करने पर आपको संतान की प्राप्ति होगी.

देहरादून के हकीकतराय नगर के मन्नूगंज रोड स्थित मंदिर श्री राधा कृष्ण मंदिर से मान्यता जुड़ी है कि अगर कोई व्यक्ति यहां आकर जन्माष्टमी के अवसर पर श्री कृष्ण की आराधना करता है तो उसे श्रीकृष्ण जैसे मनमोहक और नटखट पुत्र की प्राप्ति होती है. हकीकत राय निगर निवासी गरिमा वाधवा ने बताया कि यह मंदिर 70 वर्ष से ज्यादा पुराना है. वह बचपन से ही यहां आती हैं और यहां हर जन्माष्टमी पर भव्य आयोजन होता है.

पंडित तीन पीड़ियों से कर रहे हैं पूजा
मंदिर के पुजारी मनीष शर्मा ने बताया कि भारत और पाकिस्तान के विभाजन के दौरान उनके दादा देहरादून आए और फिर इस मंदिर की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई. उन्होंने बताया कि यह एक प्राचीन मंदिर है जिसकी सेवा वह तीसरी पीढ़ी के रूप में कर रहे हैं. पंडित मनीष शर्मा बताते हैं कि इस मंदिर से जुड़ी एक बड़ी मान्यता यह है कि जिन लोगों की गोद खाली होती है वे लोग जन्माष्टमी के अवसर पर रात के वक्त (जब श्री कृष्ण का जन्म हुआ था) यहां आते हैं और चांदी की बांसुरी श्री कृष्ण पर चढ़ाकर उनसे अपने घर में आने की प्रार्थना करते हैं, उन्हें श्रीकृष्ण की भांति पुत्ररत्न की प्राप्ति होती है. उन्होंने ऐसा कई बार देखा है.

इस मंदिर में श्रीकृष्ण की अर्चना के लिए दोनों पति-पत्नी तुलसी की माला पर 108 बार\”देवकीसुतं गोविन्दम् वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।” का जाप करे और सच्चे मन से ठाकुर को अपने घर बुलाए तो निश्चित रूप से उनके घर श्याम पुत्र के रूप में पधारते हैं.

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