अफसरों को याद दिलाना पड़ता है कि वे अधिकारी हैं, जनप्रतिनिधि नहीं : त्रिवेंद्र सिंह रावत
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अफसरों को याद दिलाना पड़ता है कि वे अधिकारी हैं, जनप्रतिनिधि नहीं : त्रिवेंद्र सिंह रावत
विजिलेंस की मीटिंग में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आदेश दिया कि सरकारी कर्मचारियों का प्रॉपर्टी रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य किया जाए.

विजिलेंस की मीटिंग में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आदेश दिया कि सरकारी कर्मचारियों का प्रॉपर्टी रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य किया जाए और हर साल ऑनलाइन प्रॉपर्टी रिटर्न दाखिल हो. वहीं सीएम ने कहा कि विजिलेंस की कोई भी जांच एक साल में पूरी हो

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देहरादूर. उत्तराखंड (Uttarakhand) में सांसद और विधायकों को शासन-प्रशासन के अफसर पूरा सम्मान नहीं देते. फोन नहीं उठाते. अदब से पेश नहीं आते. ये शिकायतें अक्सर सामने आती हैं. इसी मुद्दे पर मुख्य सचिव (Chief Secretary) ने अब राज्य के शासन-प्रशासन के अफसरों को लेटर लिखा है और कहा है कि सांसद और विधायकों से अदब से पेश आएं.

'सांसद-विधायकों के आने पर कुर्सी से उठकर सम्मान दें'

मुख्य सचिव ने अपने आदेश में कहा है कि अफसर मीटिंग के लिए समय दें. जो काम वे न कर पा रहे हों उसकी जानकारी सांसद-विधायक को दें. अफसरों को कहा गया कि सांसद-विधायकों के आने पर कुर्सी से उठकर सम्मान दें. जाते समय भी उठकर उन्हें सम्मान दें. विधायकों के भेजे लेटर तुरंत स्वीकार किए जाएं और ये कि विधायकों और सांसदों के फोन उठाएं और तमीज से जवाब दें.



आप समझ सकते हैं कि उत्तराखंड में अफसरों का क्या हाल है कि शासन के मुखिया यानि मुख्य सचिव को ये समझाना पड़ रहा है कि विधायकों और सांसदों से कैसे पेश आना है.
सरकारी कर्मचारियों के लिए रिटर्न फाइल करना अनिवार्य

इस मामले में सीएम ने कहा कि अफसरों को याद दिलाना पड़ता है कि वे अधिकारी हैं, जनप्रतिनिधि नहीं. क्योंकि ये बात वे भूल जाते हैं. इसलिए याद दिलवाना पड़ता है कि उनका स्टेटस क्या है और जनप्रतिनिधि का स्टेटस क्या है. वहीं, राज्य में पारदर्शिता को लेकर सीएम त्रिवेंद्र रावत ने बड़ा फैसला किया है. जी हां, अब कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी प्रॉपर्टी का ब्योरा छिपा नहीं सकेगा. विजिलेंस की मीटिंग में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आदेश दिया कि सरकारी कर्मचारियों का प्रॉपर्टी रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य किया जाए और हर साल ऑनलाइन प्रॉपर्टी रिटर्न दाखिल हो. वहीं सीएम ने कहा कि विजिलेंस की कोई भी जांच एक साल में पूरी हो और हर विभाग का नोडल अफसर हर महीने विजिलेंस को सूचना दे.
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