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एक बार फिर कोर्ट में हुई पुलिस की किरकिरी... जानिए कैसे बेहतर हो सकता है कन्विक्शन रेट

कानून के जानकार कहते हैं कि गवाहों का अदालत में बयान से मुकर जाना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.
कानून के जानकार कहते हैं कि गवाहों का अदालत में बयान से मुकर जाना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.

ऐसे अपराधों में जिनमें तीन साल से ज़्यादा की सज़ा होता है 40 फ़ीसदी से ज़्यादा गवाह अपने बयानों से मुकर जाते हैं.

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देहरादून. एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली की अदालत ने कलई खोलकर रख दी है. हर मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चेहरा चमकाने वाले अफ़सर अब जवाब नहीं दे पा रहे हैं. ताज़ा मामला देहरादून में कूरियर ऑफ़िस में हुई लूट का था सवाल जिसके चारों आरोपियों को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. अब देहरादून के एसएसपी भी मान रहे हैं कि विवेचना में चूक हो सकती है. दूसरी तरफ़ कानून के जानकारों का कहना है कि 3 साल से ज़्यादा सज़ा वाले 40 फ़ीसदी से ज़्यादा मामलों में पुलिस के केस कोर्ट में टिक नहीं पाते हालांकि कन्विक्शन रेट ख़राब होने के लिए अकेले पुलिस को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

बड़े अपराधों में सज़ा दिलाने में नाकामी

राजधानी (अस्थाई) देहरादून में ऑनलाइन वेबसाइट के कुरियर ऑफिस में हुई लूट के चारों आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया. बताया जा रहा है कि मामले में पुलिस ने जो साक्ष्य कोर्ट में पेश किए थे वे बेहद कमज़ोर थे और जो प्रत्यक्षदर्शी गवाह थे वे भी कोर्ट में आरोपियों की पहचान नही कर पाए.



यह पहला मामला नहीं है जब कोर्ट ने पुलिस के केस को खारिज किया हो. इससे पहले बड़ा मामला साल 2017 में ऋषिकेश में हुई मासूम बच्चियों के साथ रेप और हत्या का था. इसमें हाईकोर्ट ने पॉक्सो कोर्ट के फ़ैसले को पलट दिया था और मुख्य आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.
देहरादून के एसएसपी योगेन्द्र रावत कहते हैं हर केस का अलग ग्राउंड होता है और हर केस को अलग तरह से देखना चाहिए. कई बार कुछ कमियां पुलिस की छानबीन में रहती हैं और कई बार कोर्ट में पहुचंते ही गवाल बयान बदल लेते हैं. यह एक बड़ी चुनौती है.

ऐसे बेहतर हो सकता है कन्विक्शन रेट

कानून के जानकार रजत दुआ भी इस बात से सहमत हैं कि गवाहों का अदालत में बयान से मुकर जाना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. वह बताते हैं कि ऐसे अपराधों में जिनमें तीन साल से ज़्यादा की सज़ा होता है 40 फ़ीसदी से ज़्यादा गवाह अपने बयानों से मुकर जाते हैं.

rajat dua, क्रिमिनल लॉयर रजत दुआ कहते हैं कि स्पीडी ट्रायल भी कन्विक्शन रेट बेहतर करने में मददगार साबित हो सकता है.
क्रिमिनल लॉयर रजत दुआ कहते हैं कि स्पीडी ट्रायल भी कन्विक्शन रेट बेहतर करने में मददगार साबित हो सकता है.




रजत दुआ कहते हैं कि इस स्थिति से बचा जा सकता है. सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पुलिस की होती है. उसे गवाह को संवेदनशीलता के साथ सुनना चाहिए और गंभीर अपराधों की स्थिति में ज़रूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा भी दी जानी चाहिए. गवाह आसानी से न पलट पाएं इसके लिए बेहतर होगा कि बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाए ताकि गवाह बयान बदलने से पहले कई बार सोचे.

रजत दुआ यह भी कहते हैं कि स्पीडी ट्रायल भी कन्विक्शन रेट बेहतर करने में मददगार साबित हो सकता है. बहुत लंबे चलने वाले ट्रायल में गवाल को दबाव में लेने और सबूतों से छेड़खानी की आशंकाएं बढ़ जाती हैं. कन्विक्शन रेट ख़राब होने से अपराधियों में कानून का भय भी कम होता है, इसलिए इसे बेहतर करना ज़रूरी है.
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