अनाथ बच्चों के लिए भी अलग से आरक्षण होना चाहिएः सीएम त्रिवेंद्र रावत

Mukesh Kumar | ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 11, 2018, 8:43 PM IST
अनाथ बच्चों के लिए भी अलग से आरक्षण होना चाहिएः सीएम त्रिवेंद्र रावत
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Mukesh Kumar | ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 11, 2018, 8:43 PM IST
क्या आपने कभी सोचा है उन मासूम बच्चों के बारे में जिनका भगवान के सिवा कोई नहीं होता. किसी को पैदा होते ही मां-बाप ने कूड़े के ढेर पर फेंक दिया तो किसी के मां-बाप दुनिया में ही नहीं हैं. ऐसे बच्चों की अपनी अलग ही दुनिया होती है और ये दुनिया है गुमनामी की दुनिया. लेकिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक नई बहस छेड़ते हुए ऐसे बच्चों को भी आरक्षण देने की बात कही है.

देश में अनाथ बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. एक अनुमान के मुताबिक 2021 तक ये संख्या लगभग ढाई करोड़ तक पहुंच जाएगी. इस बीच उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र रावत ने अनाथ बच्चों को आरक्षण की वकालत की है. सीएम आवास पर एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का बड़ा बयान सामने आया है.

मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम त्रिवेन्द्र ने कहा कि अनाथ बच्चों के लिए अलग से आरक्षण होना चाहिए. मुख्यमंत्री तो यहां तक कह गए कि इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर कोई जनहित याचिका दायर की जानी चाहिए.

उत्तराखंड ही नहीं देश के कई राज्यों में बाल अधिकार के मामले पर लगातार सवाल उठते रहे हैं. राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष योगन्द्र खंडूरी ने भी सीएम के बयान का समर्थन किया है लेकिन ये भी कहा कि सिर्फ आरक्षण से काम नहीं चलेगा पहले ऐसे बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के बारे में विचार करना होगा.

सूत्रों की मानें तो उत्तराखंड में अब तक सरकारी स्तर न तो अनाथ बच्चों के सटीक आंकड़े जुटाए जा सके हैं और न ही ऐसे बच्चों की संख्या पता है जो बालश्रम कर रहे हैं. ज़िलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स तो शायद ही किसी जिले में ढंग से काम कर रही होगी. ऐसे में सवाल उठता है कि बाल अधिकार के मामले में कब ठोस कदम उठाए जाएंगे.
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