PUBG बैन होने से अभिभावकों के साथ ही पुलिस ने भी ली राहत की सांस लेकिन गेमर्स नाख़ुश!
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PUBG बैन होने से अभिभावकों के साथ ही पुलिस ने भी ली राहत की सांस लेकिन गेमर्स नाख़ुश!
पबजी गेमिंग ऐप समेत 118 ऐप बैन करने से देहरादून में अभिभावकों और पुलिस प्रशासन जहां राहत की सांस ले रहे हैं.

गेम का असर ऐसा था कि उत्तराखंड में ही सुसाइड के 2 मामले सामने आए थे और एक बच्चे ने अपने पिता को 7 लाख का चूना लगा दिया था.

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देहरादून. देश भर में पबजी गेमिंग ऐप समेत 118 ऐप बैन करने से देहरादून में अभिभावकों और पुलिस प्रशासन जहां राहत की सांस ले रहे हैं वहीं पबजी एडिक्ट इस फैसले से नाखुश हैं. ऐसे भी लोग हैं जिन्हें लगता है कि इस फ़ैसले से उनका धंधा चौपट हो गया है. पिछले कुछ सालों में लाखों लोग पबजी एडिक्ट हो चुके हैं. गेम का असर ऐसा था कि उत्तराखंड में ही सुसाइड के 2 मामले सामने आए थे और देहरादून से एक बच्चे ने अपने ही पिता को 7 लाख का चूना लगा दिया था. पबजी के शौकीन कहते हैं कि उन्हें दुख है कि गेम बैन हो गया है, वह इससे पैसे भी कमा रहे थे. वहीं पेरेंट्स कहते हैं कि लाख समझाने के बाद भी बच्चे मान नहीं रहे थे.

बिना खेले नींद नहीं आती थी 

पबजी एडिक्ट हर्ष बिष्ट और उनके दोस्त रात रात भर पबजी खेलते थे. उनका कहना है कि इस गेम का ऐसा चस्का है कि उन्हें बिना गेम खेले नींद ही नहीं आती थी. जापान, अमेरिका से उनके कई दोस्त इस गेम के ज़रिए उनके साथ जुड़े थे.



इसी तरह 15 साल के अनुज को भी पबजी का नशा था और इससे उसकी मां बेहद परेशान थी. एसपी सिटी श्वेता चौबे कहती हैं कि उत्तराखण्ड में भी गेमिंग ऐप की वजह से दो युवाओं के आत्महत्या का मामला सामने आया है. एक बच्चे ने तो अपने ही पिता को गेमिंग ऐप के ज़रिए 7 लाख का चूना भी लगा दिया था. इसलिए पुलिस भी पबजी बैन होने से राहत की सांस ले रही है.

अब भले ही पबजी बैन कर दिया गया हो लेकिन अब भी इंटरनेट पर कई ऐसे ऐप है जो बच्चों को गेमिंग एडिक्शन की हद तक ले जा रहे हैं. उनकी भी मॉनीटिरिंग करने की ज़रूरत है.
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