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लोकसभा चुनाव 2019 : यहां चुनाव जीतना है तो सैनिकों को साधना बेहद जरूरी
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Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: March 14, 2019, 11:28 AM IST
लोकसभा चुनाव 2019 : यहां चुनाव जीतना है तो सैनिकों को साधना बेहद जरूरी
उत्तराखंड में सैनिक और सैनिक पृष्ठभूमि के मतदाता लोकसभा चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

उत्तराखंड में सैनिक और सैनिक पृष्ठभूमि के मतदाता लोकसभा चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं. खासकर पौड़ी गढ़वाल सीट पर सैनिक और पूर्व सैनिकों की अच्छी खासी तादाद पार्टियों का चुनावी गणित प्रभावित करती रही हैं.

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उत्तराखंड में सैनिक और सैनिक पृष्ठभूमि के मतदाता लोकसभा चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं. खासकर पौड़ी गढ़वाल सीट पर सैनिक और पूर्व सैनिकों की अच्छी खासी तादाद पार्टियों का चुनावी गणित प्रभावित करती रही हैं. इसीलिए सामान्यत़: इस सीट पर भाजपा हो या कांग्रेस, कोई भी गैर सैन्य पृष्ठभूमि के कैंडिडेट को उठाने का जोखिम नहीं लेता. बता दें कि सैनिक बाहुल्य उत्तराखंड में एक लाख 27 हजार पूर्व सैनिक हैं. वहीं 43 हजार के आसपास वीर नारियां भी हैं. इनकी कुल संख्या होती है करीब पौने दो लाख. अगर एक परिवार में तीन मतदाता भी हैं तो मोटे तौर पर मतदाताओं की संख्या पांच लाख के आसपास पहुंचती है. गढ़वाल संसदीय सीट इस मामले में सबसे टॉप पर है.

गढ़वाल संसदीय सीट पर करीब 60 हजार पूर्व सैनिक हैं तो 21 हजार के आसपास वीर नारियां हैं. इसमें भी सेना में कार्यरत सैनिकों की संख्या शामिल नहीं है. ऐसे में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रित परिवारों का वोट किसी का भी पासा पलट सकता है. यही कारण है कि इस सीट पर मुद्दे हों या कैंडिडेट सबकी धूरी सेना और सैनिक ही होते हैं.

गढ़वाल सीट अभी तक सेवानिव़ृत मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के पास रही है. इस बार भी ये गुंजाइश नहीं के बराबर है कि भाजपा या कांग्रेस में से कोई गैर सैन्य पृष्ठभूमि वाले किसी कैंडिडेट को टिकट दे. पूर्व सैनिकों का कहना है कि सैनिक बहुल इस क्षेत्र में पार्टियां सेना से जुड़े व्यक्ति को ही टिकट दे तो यह सियासी दलों और जनता के भी हित में होगा.

इस बारे में कांग्रेस नेता हीरा सिंह बिष्ट ने कहा कि देश में अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में बहुत बड़ी तादाद में भूतपूर्व और वर्तमान सैनिक हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि इसे सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य शहादत देनेवालों में उत्तराखंड देश में नंबर वन है. देश की रक्षा और कुर्बानी देने के लिए उनका बहुत भारी इतिहास है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा ही भूतपूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी है. इसके लिए कांग्रेस का सेल भी बना हुआ है, जिसके अध्यक्ष कैप्टन रावत हैं.

दूसरी तरफ भाजपा के सीएम नौटियाल ने कहा कि इस सत्य को नकारा नहीं जा सकता कि सैनिकों का राष्ट्र प्रेम उन्हें बीजेपी की ओर खिंचता है. ऐसा इसलिए क्योंकि, बीजेपी एक राष्ट्रवादी पार्टी है.

वहीं सेवानिवृत्त कर्नल एनएस रावत ने कहा कि अगर हम इस तथ्य को मानें कि इतने सारे फौजी और अर्धसैनिक किसी एक चुनाव क्षेत्र में हैं तो एक उम्मीदवार को उस बैक ग्राउंड से लड़ाना उस राजनीतिक पार्टी के लिए भी अच्छा है और वहां के लोगों के लिए भी अच्छा है. लोगों के लिए अच्छा इसलिए है, क्योंकि जनता के मुद्दों को वह कैंडिडेट अच्छी तरह समझ सकता है. साथ ही आम जनता का अपने नेता के साथ एक जुड़ाव भी रहता है. इसलिए एक राजनीतिक पार्टी के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वह इस तरह के नेता को लेकर आएं जो उनकी भावनाओं को समझे. उन्होंने कहा कि अगर वे फौजी हैं तो राजनीतिक पार्टी को उन्हें जरूर मौका देना चाहिए.

सेवानिवृत्त सैनिक और उनके आश्रितों के अलावा भी उत्तराखंड से सेना व अर्धसैन्य बलों में कार्यरत करीब 88 हजार जवानों के वोट हैं. इनमें से अकेले करीब 33 हजार सैनिक वोट गढ़वाल सीट पर हैं. ऐसे में सैनिक, सेवानिवृत्त सैनिक और उनके आश्रितों के वोट सर्वाधिक किसके खाते में जाए, इसे लेकर पार्टियों में खींचतान जारी है.ये भी पढ़ें - टिहरी सीट पर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व व वर्तमान अध्यक्षों की दावेदारी, अंतिम फैसला हाईकमान पर

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First published: March 14, 2019, 11:28 AM IST
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