गढ़वालः दिलचस्प रही है हमेशा से पौड़ी में राजनीतिक जंग, पलायन अब भी सबसे बड़ा मुद्दा

Manish Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: May 22, 2019, 12:58 PM IST
गढ़वालः दिलचस्प रही है हमेशा से पौड़ी में राजनीतिक जंग, पलायन अब भी सबसे बड़ा मुद्दा
पौड़ी गढ़वाल

पलायन की वजह से राजनीतिक सरगर्मी वाले इस इलाके में वोटिंग का प्रतिशत हमेशा निराशाजनक ही रहा है. इस बार के चुनाव में महज 54 फीसदी लोगों ने भी वोट डाला.

  • Share this:
राजनीति का असली खेल उत्तराखण्ड की गढ़वाल (पौड़ी) सीट पर देखने के मिल रहा है. यहां पक्ष और विपक्ष के बीच जितने गहरे रिश्ते हैं उतने शायद ही किसी प्रतिद्वन्द्वी के बीच देखने को मिले होंगे. और तो और दोनों प्रतिद्वन्द्वियों ने एक ही शख्स के नाम पर लोगों को भावनात्मक रूप से वोट के लिए अपील भी की है.

लोकसभा चुनाव 2019: लड़ाई खंडूड़ी की विरासत की है, पौड़ी में इस बार चेला VS ‘चेला’

गढ़वाल सीट पर लड़ाई हमेशा से अनोखी रही है. पिछले लोकसभा चुनाव 2014 को ही लीजिए. यहां भाजपा से बीसी खण्डूड़ी और कांग्रेस से हरक सिंह रावत चुनाव लड़े थे. आज दोनों भाजपा में हैं और हरक सिंह राज्य की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री. एक बार फिर लड़ाई दिलचस्प है. भाजपा से तीरथ रावत और कांग्रेस से मनीष खण्डूड़ी गढ़वाल सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं. वैसे तो तीरथ पुराने लीडर हैं और उनके सामने पहली बार चुनावी जीवन में उतरे मनीष खण्डूड़ी हैं लेकिन, दोनों के लिए बीसी खण्डूड़ी पूरे चुनाव में ज़रूरी रहे हैं. तीरथ ने बीसी खण्डूड़ी को अपना गुरु बताकर लोगों से वोट मांगा तो मनीष खण्डूड़ी बेटा बनकर लोगों से वोट मांगते दिखे थे. मनीष खण्डूड़ी बीसी खण्डूड़ी के बेटे हैं.

teerath rawat2
तीरथ सिंह रावत के चुनाव प्रचार में ऋतु खंडूड़ी


राजनीति की चाल तो देखिये.... जीवनभर बीसी खण्डूड़ी भाजपा का झण्डा उठाए रहे, उनकी बेटी ऋतु भाजपा की ही विधायक हैं लेकिन बेटे मनीष ने कांग्रेस जॉयन कर ली. यह और दिलचस्प है कि मनीष चुनाव लड़ने भी उतरे तो उस गढ़वाल सीट से जो उनके पिता की पारम्परिक सीट रही है. अब बीसी खण्डूड़ी के धर्मसंकट का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. यही वजह रही कि वह पूरे चुनाव में एक शब्द भी नहीं बोले. अब देखना दिलचस्प होगा कि बेटे और शिष्य में से किसे बीसी खण्डूड़ी के क्षेत्र के लोग वोट देकर संसद पहुंचाते हैं.

 

लोकसभा चुनाव 2019: नतीजे आने में लग सकते हैं 2-3 दिन, रुझान आने में भी होगी दोपहर- सूत्र
Loading...

गढ़वाल सीट न सिर्फ़ अपने राजनीतिक घमासान के लिए इस बार सुर्खियों में है बल्कि इसके साइज ने इसे हमशा लाइम लाइट में रखा है. यह ऐसी एकलौती सीट है जिसका दायरा गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक फैला है. हिन्दुओं के दो सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से दो केदारनाथ और बदरीनाथ इसी लोकसभा सीट के तहत आते हैं. पांच जिलों की विधानसभाओं से मिलकर गढ़वाल की लोकसभा सीट बनती है.

VIDEO: यहां सुनिए मनीष खंडूड़ी ने क्यों कहा पौड़ी में चेहरों की लड़ाई नहीं

रूद्रप्रयाग की 2- केदारनाथ और रूद्रप्रयाग, चमोली की 3- थराली, बदरीनाथ और कर्णप्रयाग, टिहरी की 2- नरेन्द्रनगर और देवप्रयाग, पौड़ी की 6- यमकेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडाउन, कोटद्वार, नैनीताल की 1- रामनगर.

manish 2
पौड़ी में चुनाव प्रचार के दौरान मनीष खंडूड़ी


यह भी बड़ी अनोखी बात है कि भले ही गढ़वाल का क्षेत्रफल सभी सीटों में सबसे बड़ा है लेकिन, वोटरों की संख्या के लिहाज से इसका नम्बर चौथा है. इसका कारण आबादी का घनत्व कम होना है. पलायन भी कारण माना जा सकता है. तो इसका मतलब यह है कि इस सीट से जीत दर्ज करने वाले सांसद के लिए ज़िम्मेदारी भी सबसे बड़ी होगी.

VIDEO: मनीष खंडूड़ी के कांग्रेस में शामिल होने पर क्या कहती है पौड़ी की जनता...

इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस का कब्ज़ा बराबर-बराबर रहा है. दोनों ने छह-छह बार इस सीट को जीता है. इस सीट पर देश के पहले आम चुनाव 1951-52 में कांग्रेस के भक्त दर्शन ने जीत दर्ज की थी. तब गढ़वाल की सीट यूपी के मुरादाबाद जिले तक फैली हुई थी. कांग्रेस ने यहां से लगातार पांच बार जीत दर्ज की लेकिन, उसका विजयी अभियान आपातकाल की भेंट चढ़ गया और 1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी के कैण्डिडेट जगन्नाथ शर्मा इस सीट से सांसद बने.

ईमानदारी और कर्मठता के लिए जाने जाते हैं 5 बार सांसद और 2 बार CM रहे बीसी खंडूड़ी

भाजपा को इस सीट पर फतह 1991 में मिली जब मौजूदा सांसद बीसी खण्डूड़ी यहां से चुने गए. खण्डूड़ी गढ़वाल से पांच बार सांसद रह चुके हैं. राज्य की मौजूदा भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर एक बार सांसद रह चुके हैं.

congress campaign pauri
पौड़ी में मनीष खंडूड़ी के नामांकन के लिेए जातेे कांग्रेस कार्यकर्ता


लेकिन, गढ़वाल सीट का एक स्याह चेहरा भी है. पलायन. राज्य में सबसे ज्यादा लोगों का पलायन इसी इलाके से हुआ है और हो रहा है. सैकड़ों की संख्या में ऐसे गांव इस इलाके में हैं जहां अब कोई नहीं रहता. वह घोस्ट विलेज के नाम से कलंकित हो रहे हैं.

सारे दावे फेल... पौड़ी से लगातार पलायन जारी, किसानों के बराबर हुए मज़दूर

यही वजह है कि इतनी राजनीतिक सरगर्मी वाले इस इलाके में वोटिंग का प्रतिशत हमेशा निराशाजनक ही रहा है. इस बार के चुनाव में महज 54 फीसदी लोगों ने भी वोट डाला. पुरुषों के पलायन की ही तस्वीर इस तथ्य से साफ हो जाती है कि इस सीट पर महिलाओं का वोटिंग परसेन्टेज पुरुषों के मुकाबले 11 फीसदी ज्यादा रहा है.

VIDEO : सीएम ने पौड़ी प्रत्याशी को जिताने के लिए रुद्रप्रयाग में मांगे वोट

VIDEO: नैनीताल से चुनाव लड़ना रणनीतिक फ़ैसला, पौड़ी-अल्मोड़ा को भी फ़ायदाः हरीश रावत

Facebook पर उत्‍तराखंड के अपडेट पाने के लिए कृपया हमारा पेज Uttarakhand लाइक करें.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देहरादून से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: May 21, 2019, 6:02 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...