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कई देशों ने यहां खेली फुटबॉल तो दारा सिंह व गामा पहलवान ने की कुश्ती, दून का ऐतिहासिक मैदान अब बदहाल!

देहरादून के इस ग्राउंड में कई देशों की टीमों के अंतर्राष्ट्रीय मैच का इतिहास रहा है, तो दारा सिंह जैसे रेसलरों के दांव पेंच भी यहां दर्शकों ने कभी देखे हैं. लेकिन सवाल यह है कि इतने गौरवशाली इतिहास रखने वाले इस स्टेडियम की हालत इतनी बदतर कैसे हो गई कि अब यहां कोई बड़ा आयोजन नहीं होता?

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(रिपोर्ट- हिना आज़मी)

देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित आजादी से पहले बनाए गए पवेलियन ग्राउंड (Pavilion Ground Dehradun) में हर रोज़ कई खिलाड़ी प्रैक्टिस के लिए आते हैं, लेकिन अब यहां बड़े टूर्नामेंट नहीं होते. यह अफसोस की खबर इसलिए है क्योंकि इस ग्राउंड का इतिहास गज़ब के गौरवशाली क्षणों का गवाह रहा है. डिस्ट्रिक्ट सोकर एसोसिएशन देहरादून के सचिव उस्मान खान ने जानकारी दी कि साल 1937 में देहरादून डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन बनाया गया था. यहां आजादी से पहले फ्रांस, अफगानिस्तान समेत कई देशों ने फुटबॉल मैच खेला था. वहीं कई बड़े फुटबॉल खिलाड़ी भी इसी मैदान से खेलकर निकले हैं. आज भी इस ग्राउंड में हर रोज तमाम खिलाड़ी प्रैक्टिस के लिए आते हैं.

खान ने बताया कि देहरादून में खिलाड़ियों को बढ़ावा दिया गया. पहले परेड ग्राउंड, गांधी पार्क और पवेलियन का मैदान एक ही था. साल 1939 में मनसुमरथ दास ने पवेलियन बनाया, जिसे पवेलियन ग्राउंड नाम दिया गया. उस दौरान मैदान में करीब तीन हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता थी, लेकिन मुहम्मद स्पोर्टिंग व मोहन बागान जैसी टीमें आने से दर्शकों की संख्या करीब 8000 से ज्यादा चली जाती थी.

उन्होंने आगे कहा कि उस वक़्त मैच देखने के लिए दो रुपये फीस देनी पड़ती थी. पवेलियन ग्राउंड में फुटबॉल मैच के अतिरिक्त इंटरनेशनल लेवल की फ्री स्टाइल रेसलिंग भी आयोजित की गई थी, जिसमें दारा सिंह और गामा पहलवान भी शामिल हुए थे. आजादी से पहले इस मैदान में फ्रांस, अफगानिस्तान, इटली, ईरान आदि देशों की टीमों का फुटबॉल मैच हुआ था. इस मैदान से कई बड़े फुटबॉल खिलाड़ियों ने शुरुआत की, जिनमें मनीष मैठाणी, जगमोहन सिंह रावत, इसरार अहमद, अजय सिंह, कमलनयन बड़थ्वाल, विक्रम सिंह बिष्ट जैसे नाम शामिल हैं.

ऐसे बदहाल हो गया यह ऐतिहासिक ग्राउंड

मोहन बागान, मोहम्मडन स्पोर्टिंग जैसे टॉप क्लबों और आईएसएल खेल चुके मनीष मैठाणी ने कहा कि इस मैदान से उनकी शुरुआत हुई है. यह ग्राउंड फुटबॉल के खिलाड़ियों के लिए एक बेहतर जगह है, जहां वे जमकर अभ्यास कर सकते हैं. वहीं पूर्व फुटबॉलर जगमोहन सिंह रावत का कहना है कि यह मैदान पहले बेहतर हालात में था लेकिन अब मेंटनेंस न होने के चलते आज इसके हालात खराब होते जा रहे हैं. पहले यहां इंटरनेशनल लेवल के गेम होते थे, लेकिन अब स्टेट लेवल का भी गेम नहीं होता है.

Tags: Dehradun news

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