विकास की अनदेखी के चलते मसूरी की जनता दोनों पार्टियों से नाराज

मसूरी की जनता की नाराजगी भाजपा और कांग्रेस दोनो से हैं, जिन्होंने 18 साल से शहर के विकास और आधारभूत सुविधाओं के लिए कोई ठोस योजनाएं तैयार नहीं की. जो योजनाएं शहरी सरकार ने बनाई उन्हें भी यहां धरातल पर नहीं उतारा गया.

Sunil Silwal | News18 Uttarakhand
Updated: November 8, 2018, 10:47 AM IST
विकास की अनदेखी के चलते मसूरी की जनता दोनों पार्टियों से नाराज
प्रतीकात्मक फोटो
Sunil Silwal | News18 Uttarakhand
Updated: November 8, 2018, 10:47 AM IST
उत्तराखंड में निकाय चुनाव का रण सजा हुआ है. प्रदेश की जनता को अब 18 नवंबर का इंतजार है. पहाड़ों की रानी मसूरी के लोग भी इन चुनाव में अपनी समस्याओं और मुद्दों के साथ मैदान में है. निकाय चुनाव में नेताओं के भी अपने दावे हैं. शहर की सरकार के लिए मसूरी में समस्याओं का पहाड़ खड़ा है.

पर्यटन में उत्तराखंड को पहचान दिलाने वाले पहाड़ी शहर मसूरी में सर्दी के मौसम में निकाय चुनाव ने सियासी पारे को चढ़ा रखा है. 18 नवंबर को मसूरी की जनता नगर पालिका चुनाव के लिए वोट करेगी और अपनी शहर की सरकार चुनेगी. मसूरी में कुल 21 हजार 415 वोटर है.

मसूरी में पीने के पानी का संकट गहराता जा रहा है. पर्यटन सीजन में पार्किंग की समस्या है. राजधानी के पास होने के बावजूद भी यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है. पर्यटन गतिविधियों का विकसित नहीं हो पाने पर यहां से युवाओं का मोहभंग होता जा रहा है और युवा पलायन को मजबूर होना पड़ा रहा है.

मसूरी की जनता की नाराजगी भाजपा और कांग्रेस दोनो से हैं, जिन्होंने 18 साल से शहर के विकास और आधारभूत सुविधाओं के लिए कोई ठोस योजनाएं तैयार नहीं की. जो योजनाएं शहरी सरकार ने बनाई उन्हें भी यहां धरातल पर नहीं उतारा गया. इस बार मसूरी की जनता उनके विकास की कमान किसके हाथ में सौंपती है इसका फैसला 20 नवंबर को होगा. जनता का संदेश साफ है, जो समस्याएं दूर करेगा, वोट उसी को मिलेगा.

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