केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने देवभूमि को दिया 'तोहफा', लोगों के चेहरे खिले

IIT रूड़की और IIM काशीपुर के अलावा NIT सुमाड़ी उत्‍तराखंड का तीसरा बड़ा राष्ट्रीय संस्थान है.

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: July 23, 2019, 4:36 PM IST
केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने देवभूमि को दिया 'तोहफा', लोगों के चेहरे खिले
साल 2009 में उत्तराखंड के श्रीनगर के सुमाड़ी गांव में NIT संस्थान खोला गया था.
Deepankar Bhatt
Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: July 23, 2019, 4:36 PM IST
हायर एजुकेशन में कोई नाम बनाने में नाकाम रहे उत्तराखंड के लिए सोमवार को दिल्ली से अच्छी खबर आई. मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने साफ कर दिया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (NIT) का परमानेंट कैंपस सुमाड़ी में ही बनेगा. साथ ही उन्‍होंने निशंक ने ये भी कहा कि राष्ट्रीय स्तर के इस संस्थान का शिलान्यास सितंबर के पहले हफ्ते में होगा और जल्द से जल्द परमानेंट कैंपस में पढ़ाई शुरु होगी. इससे ये भी साफ हो चुका है कि इंस्टीट्यूट के लिए फाइनल की गई 309 एकड़ ज़मीन में से 203 एकड़ ज़मीन बिल्कुल सही है.

31 मई 2019 को जागी उम्मीद
30 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शपथ लेने वाले उत्तराखंड के पूर्व सीएम और हरिद्वार से सांसद रमेश पोखरियाल निशंक भी थे. जैसे ही 31 मई को निशंक को मानव संसाधन विकास मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई. पहली उम्मीद यही जागी कि अब NIT श्रीनगर से शिफ्ट नहीं होगा. मंत्री पद संभालते ही निशंक ने इस बात भरोसा भी दिया और 2 महीने के भीतर-भीतर केंद्रीय मंत्री ने NIT पर चल रहा संशय दूर कर दिया.

जबकि सोमवार को उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री, पौड़ी लोकसभा के सांसद और शासन के आला अधिकारियों के साथ दिल्ली में हुई पहली बैठक में ही पिक्चर साफ हो गई.

क्या है पूरा विवाद?
साल 2009 में उत्तराखंड के श्रीनगर के सुमाड़ी गांव में NIT संस्थान खोला गया और टेंपरेरी तौर पर साल 2018 तक ये इंस्टीट्यूट श्रीनगर में ही चलता रहा. हालांकि विवाद की शुरुआत साल 2018 में रोड क्रॉस करते हुए 2 स्टूडेंट्स के एक्सीडेंट में घायल होने के साथ हुई. स्टूडेंट्स ने मोर्चा खोल दिया कि जब तक परमानेंट कैंपस नहीं होगा वो पढ़ेंगे नहीं और दीवाली से पहले करीब-करीब सभी स्टूडेंट्स अपने-अपने घर चल गए. विवाद बढ़ा तो केंद्र सरकार ने आनन-फानन में स्टूडेंट्स को जयपुर कैंपस में शिफ्ट किया.

जयपुर शिफ्ट होने के जहां श्रीनगर में लोग सड़कों पर उतर आए, तो राज्य सरकार पर सवाल खड़े होने लगे. इसी बीच मामला नैनीताल हाईकोर्ट पहुंच गया. वक्त बीता तो हाई कोर्ट ने साफ आदेश दे दिया कि साल 2019-20 के एडमिशन श्रीनगर में ही होने चाहिए. जबकि 10 साल में एक इंस्टीट्यूट ना बन पाने की सबसे बड़ी वजह ज़मीन का फाइनल ना होना रहा, जिसको लेकर कभी सरकार पर सवाल उठे तो कभी शासन पर.
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पलायन के बीच बड़ी उम्मीद NIT
IIT रूड़की और IIM काशीपुर के अलावा NIT सुमाड़ी तीसरा बड़ा राष्ट्रीय संस्थान है. काशीपुर और रूड़की उत्तराखंड राज्य के मैदानी इलाकों में हैं, लेकिन पलायन की मार झेल रहे पहाड़ों में ये एकमात्र नेशनल इंस्टीट्यूट है, जो राज्य के लिए किसी सम्मान से कम नहीं है.

साल 2018 में जब NIT के पहाड़ से शिफ्ट होने की बातें शुरु हुई और स्टूडेंट्स जयपुर शिफ्ट हुए, तो स्थानीय लोगों को गुस्सा बढ़ गया. पौड़ी-श्रीनगर में कई बार विरोध में मार्केट बंद रहे तो कई बार लोग सड़कों पर उतरे.

दरअसल, राज्य बनने के बाद पौड़ी जिले से तमाम ऑफिस देहरादून शिफ्ट हो गए. ऑफिस शिफ्ट हुए तो आम लोग भी शिफ्ट होते चले गए. ऐसे में NIT के शिफ्ट होने की खबरें स्थानीय निवासियों के लिए किसी बड़े झटके के कम नहीं थी. हालांकि अब दिल्ली से आए फैसले से लोगों के चेहरे फिर खिल गए हैं.

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First published: July 23, 2019, 4:30 PM IST
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