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आम आदमी की क्या बिसात, जब प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश नहीं सुने जाते सचिवालय में

याचिकाकर्ता रीटा सूरी अपने भाई वकील राजेश सूरी की मौत के मामले की जांच के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं.
याचिकाकर्ता रीटा सूरी अपने भाई वकील राजेश सूरी की मौत के मामले की जांच के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं.

सचिवालय से गायब हो गई विधि मंत्रालय से आई फ़ाइल, धूल खाते रहे PMO के निर्देश

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उत्तराखंड शासन में आम आदमी की बात क्या सुनी जाएगी जब प्रधानमंत्री कार्यालय से आए निर्देशों को ही कूड़े की टोकरी में फेंक दिया जाता है. भ्रष्टाचार मुक्त शासन और पारदर्शिता का दावा करने वाली राज्य सरकार कैसे काम करती है यह इससे पता चलता है कि सचिवालय से सरकारी ज़मीनों पर अवैध कब्ज़ों की एक महत्वपूर्ण फाइल गायब हो जाती है और यह कोई सामान्य फ़ाइल नहीं है. खुद प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय कानून मंत्रालय से याचिकाकर्ता रीटा सूरी के आग्रह पर मुख्य सचिव को कार्रवाई करने के निर्देश जिस फ़ाइल में थे वह गायब हुई है. इस बात का खुलासा आरटीआई से मिली जानकारी में हुआ है.

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याचिकाकर्ता रीटा सूरी अपने भाई वकील राजेश सूरी की मौत के मामले की जांच के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं. सरकारी ज़मीन पर कब्ज़े के कई बड़े मामलों का खुलासा करने वाले वकील राजेश सूरी की 30 नवंबर, 2014 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. रीटा सूरी उनकी मौत को हत्या बताते हुए लंबे समय से उन्हें इंसाफ़ दिलाने के लिए संघर्ष कर रही हैं.



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जब राज्य सरकार से इंसाफ़ नहीं मिला तो अक्टूबर, 2017 को रीटा सूरी ने पीएम ऑफिस में एक रिट याचिका लगाई. 400 पेज की इस याचिका में उन्होंने अपने भाई की हत्या से संबंधित सभी दस्तावेज़ संलग्न किए थे. इनकी जांच करने के बाद केंद्रीय विधि मंत्रालय ने मुख्य सचिव को वह फ़ाइल भेजी और कहा कि याचिकाकर्ता ने जो भी दस्तावेज़ दिए हैं वह सही सबूत लग रहे हैं इसलिए इस मामने में कार्रवाई की जाए.

रीटा सूरी का कहना है कि वह 2017 से इंतज़ार करती रहीं और कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने 2018 में आरटीआई लगाई. इसके जवाब में उन्हें पता चला कि उनकी रिट याचिका और उससे संबंधित दस्वावेज़ सचिवालय से गायब हो गए हैं. दो बार आरटीआई लगाने के बाद भी यही जवाब मिला तो रीटा सूरी ने फिर केंद्र का रुख किया.

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उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय और विधि मंत्रालय में आरटीआई लगाई जिसके बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री कार्यालय से मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया और पूछा गया कि मामला बहुत संगीन है आप कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हो. लेकिन उत्तराखंड शासन पीएमओ से आए इस पत्र पर भी ख़ामोश रहा.

इसके बाद विधि मंत्रालय से उच्च न्यायालय रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर कहा है कि याचिकाकर्ता की जितनी भी रिट याचिकाएं यहां लगी हैं उन पर प्राथमिकता से सुनवाई करके न्याय दिलाएं. रीटा सूरी न्यायालय पर विश्वास जताते हुए कहती हैं कि अब उन्हें न्याय ज़रूर मिलेगा.

 

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