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गैरसैंण पर सियासत गर्म... हरीश रावत ने कहा, जो गैरसैंण नहीं जा सकते, वो छोड़ दें राजनीति

News18 Uttarakhand
Updated: November 25, 2019, 6:18 PM IST
गैरसैंण पर सियासत गर्म... हरीश रावत ने कहा, जो गैरसैंण नहीं जा सकते, वो छोड़ दें राजनीति
इंदिरा हृदयेश ने कहा था कि गैरसैंण में ठंड लगती है इसलिए वहां सत्र नहीं हो सकता. हरीश रावत ने कहा है कि जिन्हें गैरसैंण में ठंड लगती है उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश (Indira Hridyesh) कहा था कि इस ठंड में गैरसैंण में सत्र नहीं हो सकता. भाजपा का कहना है कि इसीलिए सरकार ने गैरसैंण में सत्र कराने का इरादा बदला.

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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) में गैरसैंण (Gairsain) को लेकर एक बार फिर सियासत तेज़ हो गई है. 2014 के बाद से गैरसैंण में हर साल सरकारें विधानसभा का एक सत्र (Assembly Session) आयोजित करती थीं लेकिन इस साल पहली बार कोई सत्र आयोजित नहीं हुआ है. पांच दिसंबर से शीतकालीन सत्र (Winter Session) होना है लेकिन यह देहरादून (Dehradun) में आयोजित किया जा रहा है और इसी को लेकर राजनीति गर्म है.

सत्र आयोजित करना बना मजबूरी

पर्वतीय भू-भाग वाला गैरसैंण गढ़वाल और कुमाऊं के बीच में पड़ता है. शुरु से यहां राजधानी बनाने की मांग उठती रही है लेकिन जब वर्ष 2000 में राज्य का गठन हुआ तो देहरादून को अस्थाई राजधानी बना दिया गया. गैरसैंण से जनभावनाएं जुड़ी होने के कारण इस पर सियासत होती रही लेकिन कोई भी राजनीतिक दल गैरसैंण पर स्थिति स्पष्ट करने का साहस नहीं जुटा पाया. दरअसल गैरसैंण में राजधानी के मुद्दे पर दलों के भीतर ही ज़बरदस्त अतंर्विरोध भी है.

साल 2012 में कांग्रेस की विजय बहुगुणा सरकार ने एक स्टेप आगे बढ़ते हुए गैरसैंण में विधानसभा भवन की आधारशिला रख दी. इसके बाद यहां कैबिनेट भी की गई. बहुगुणा की यह पहल आने वाली सरकारों के लिए मजबूरी बन गई. सियासी फ़ायदे के लिए वे इसे इग्नोर नहीं कर पाए और क्रेडिट लेने की होड़ शुरू हो गई.

दावे-प्रतिदावे  

2014 में हरीश रावत सीएम बने तो रावत ने यहां विधानसभा सत्र करा दिया और इसके बाद लगातार हर साल यहां विधानसभा का एक न एक सत्र होता रहा है. पहली बार इस साल ऐसा हुआ कि गैरसैंण में कोई सत्र आयोजित नहीं कराया गया है. साल के अंत में अब चार दिसंबर से शीतकालीन सत्र आहूत है. लेकिन ये भी देहरादून में आयोजित किया जा रहा है.

इस साल गैरसैंण में सत्र क्यों नहीं आयोजित हुआ इसी को लेकर राजनीति गर्म है. भाजपा के अंदर भी इस पर मतभेद हैं. सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि गैरसैंण में इन दिनों बेहद ठंड है और गैरसैंण में व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं है. सीएम का कहना था कि बहुत से बुजुर्ग विधायक ठंड में गैरसैंण नहीं जा सकते.
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लेकिन भाजपा के ही नेता और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि गैरसैंण में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं. अग्रवाल का कहना है कि जब 2018 में गैरसैंण में शीतकाल में सत्र कराया गया तब भी व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं थी. अग्रवाल ने यह भी पूछा था कि अब क्या दिक्कत हैं, अब तो व्यवस्थाएं भी दुरुस्त हैं.

ठंड है, तो है

विपक्षी कांग्रेस ने इस पर भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा को सही मायनों में पहाड़ से कोई लेना-देना नहीं है वह सिर्फ ठंड का बहाना बना रही है. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने पूछा है कि क्या ठंड में पहाड़ में लोग नहीं रहते?

लेकिन कांग्रेस के इस विरोध की कांग्रेस की ही वरिष्ठ नेत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने हवा निकाल दी. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. इस ठंड में गैरसैंण में सत्र नहीं हो सकता. भाजपा का कहना है कि इंदिरा हृदयेश के कहने पर ही सरकार ने गैरसैंण में सत्र कराने का इरादा बदला.

हिमालय का अपमान

अपनी ही पार्टी की नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के बयान पर हरीश रावत ने काउंटर किया. रावत ने कहा कि इंदिरा हृदयेश का बयान कांग्रेस का बयान नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि जो विधायक इतने बुजुर्ग हो गए कि वे गैरसैंण नहीं जा सकते, उनको राजनीति ही छोड़ देनी चाहिए.

रावत ने कहा कि हिमाचल की राजधानी शिमला है... क्या शिमला में अस्सी वर्ष के वीरभद्र सिंह ने राज्य का संचालन नहीं किया? क्या नब्बे वर्ष के सुखराम ने उसे राजधानी नहीं माना? रावत ने कहा कि यह अजीब बात है. विधायक कैसे कह सकते हैं कि वह ठंड के कारण गैरसैंण नहीं जाएंगे.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हिमालय का अपमान है. उन लोगों का अपमान है जो आज भी पहाड़ में रहकर पहाड़ को बचाए हुए हैं.

भाजपा ही लेगी फ़ैसला

गैरसैंण पर हुई इस सियासत पर भाजपा अब बैकफुट पर है. भाजपा ने 2017 के अपने चुनावी घोषणापत्र में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित करने का वायदा किया था लेकिन इन दो सालों में सरकार गैरसैंण के नाम पर कुछ ऐसा नहीं कर पाई जिसे वह अपनी उपलब्धि गिना सके.

इस बीच भाजपा विधायक और प्रदेश महामंत्री खजान दास ने कहा कि गैरसैंण का भविष्य भाजपा ही तय कर सकती है. पार्टी किसी भी समय सर्वदलीय बैठक बुलाकर गैरसैंण पर कोई निर्णय ले सकती है.

खजानदास का ये बयान ऐसे समय में आया है जब गैरसैंण पर बवाल मचा है. सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा वास्तव में गैरसैंण को लेकर कोई रोडमैप तैयार कर रही है जिसका क्रेडिट पार्टी 2022 में ले सके या फिर ये सिर्फ गैरसैंण पर गरमाई सियासत को ठंडा करने के लिए एक शिगूफा मात्र है.

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First published: November 25, 2019, 6:14 PM IST
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