ऋषिकेश AIIMS का आरोप, मातृ सदन ने स्वामी सानंद को सुसाइड के लिए उकसाया

एम्स के निदेशक ने कहा कि इलाज के दौरान स्वामी सानंद तो उपवास तोड़ना चाहते थे लेकिन उनके परिवार से बाहर के लोगों ने उन्हें उपहास नहीं तोड़ने दिया.

News18 Uttarakhand
Updated: October 11, 2018, 9:37 PM IST
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गंगा की रक्षा के लिए एक और संत ने अपना बलिदान दे दिया. वैज्ञानिक से संत बने अनशनरत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानन्द की गुरुवार को ऋषिकेश के एम्स हॉस्पिटल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. ऋषिकेश के एम्स में स्वामी सानंद उर्फ जीडी अग्रवाल की मौत के बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. हरिद्वार के मातृ सदन के आरोपों के बाद एम्स निदेशक रविकान्त ने मातृ सदन पर स्वामी सानंद को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है.

एम्स निदेशक रविकान्त ने न्यूज18 से बातचीत में कहा कि स्वामी सांनद को हाई ब्लड प्रेशर के साथ ही एंटीक वॉल के डिसऑर्डर की प्रॉब्लम थी. इसके साथ ही उन्हें हर्निया भी था. बुधवार की शाम को जब वह एम्स में भर्ती हुए थे तो उनके यूरिन में कीटोन थे. इन सभी बीमारियों का एक साथ होने के कारण उन्हें दिल का दौरा पड़ा.

एम्स के निदेशक ने कहा कि इलाज के दौरान स्वामी सानंद तो उपवास तोड़ना चाहते थे लेकिन उनके परिवार से बाहर के लोगों ने उन्हें उपहास नहीं तोड़ने दिया. एम्स निदेशक ने स्वामी सानंद की मौत पर मातृ सदन के सन्देह पर कहा कि अगर आप हम पर शक करेंगे तो आपको अपने माता-पिता पर भी सन्देह करना पड़ेगा.

वहीं स्वामी सानंद की मौत के बाद एम्स पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल ने कहा कि स्वामी सानंद की सभी मांगें जायज थी. लेकिन सरकार का क्या मत था, ये तो सरकार ही बताएगी? लेकिन उनकी मौत को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब पीएम के बाद ही सामने आएंगे.

इससे पहले मातृ सदन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया था कि सानंद ने गुरुवार को ही एक केंद्रीय मंत्री के इशारे पर अपनी हत्या किए जाने की उनसे आशंका जताई थी. शिवानंद ने कहा कि उन्होंने सानंद को ऋषिकेश एम्स के बजाय दिल्ली एम्स में भर्ती किए जाने की मांग की थी क्योंकि स्वामी सानंद ने एम्स को पिछले दिनों रिसर्च के लिए अपनी बॉडी दान करने की घोषणा कर दी थी.

बता दें, साल 2010 में गंगा की रक्षा के लिए अनशनरत मातृ सदन के संत स्वामी निगमानंद की भी हॉस्पिटल में मौत हो गई थी. अब एक बार फिर से मातृ सदन में ही अनशनरत स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने भी गंगा के लिए बलिदान दे दिया.
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