रिस्पना-बिंदाल और सुसवा नदियों का पानी हुआ जहरीला

कभी जीवनदायिनी रहीं देहरादून की रिस्पना, बिंदाल और सुसवा नदियों को इंसानों ने अब जीवन लेने वाली बना दिया है.

Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: June 23, 2019, 3:41 PM IST
Bharti Saklani
Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: June 23, 2019, 3:41 PM IST
कभी जीवनदायिनी रहीं देहरादून की रिस्पना, बिंदाल और सुसवा नदियों को इंसानों ने अब जीवन लेने वाली बना दिया है. एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक इन तीनों नदियों का पानी इतना जहरीला हो चुका है कि इंसानों के साथ ही जीव-जंतुओं के लिए इसका प्रयोग जानलेवा हो सकता है. रिस्पना, बिंदाल और सुसवा नदियों का पानी पीना तो दूर आचमन करने लायक भी अब नहीं रहा. तीनों नदियों से एक-एक किलोमीटर की दूरी से पानी के सैंपल लिए गए थे. इनका परीक्षण कंडोली स्थित लैब में कराया गया. इन नदियों के पानी में अब मछलियों का जीना भी संभव नहीं रहा. ये नदियां सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मानकों से भी कहीं ज्यादा दूषित हो चुकी हैं. स्पेक्स और जॉय संस्था की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है.

इन नदियों में है शहर भर की गंदगी
इस बारे में स्पेक्स के सचिव बृज मोहन शर्मा ने कहा कि सुसवा नदी रिस्पना और बिंदाल नदी का संगम है. उस संगम में शहर का हर तरह का प्रदूषण है. इस संगम में ऐसे जहरीले पदार्थ हैं जिससे कैंसर जैसी बीमारी भी हो सकती है. इसका खराब परिणाम दुदली में दिखाई दे रहा है. वहीं श्रमयोग के अध्यक्ष अजय जोशी ने कहा कि नदी के दो तरह के एनवॉयरमेंटल और कल्चरल फ्लोज हैं. ये दोनों ही नदियों में होने की जरूरत है. एनवॉयरमेंटल फ्लोज जो हैं वो नदी के अपने तंत्र के लिए, नदी में चलने वाले जीवन के लिए जरूरी है. वहीं कल्चरल फ्लोज इसलिए जरूरी है कि नदियां हमारे कल्चर की भी वाहक हैं. कल्चरल जरूरतें भी हैं. उन्होंने कहा कि अभी सुसवा का जो अध्ययन हुआ है उससे ये सामने आया है कि ये नदियां दोनों ही जरूरतों को पूरा नहीं कर रही हैं. इन नदियों का खुद का तंत्र भी तहस नहस हो गया है और कल्चरल फ्लोज की तो उम्मीद ही नहीं की जा सकती.

मछली का जीना भी संभव नहीं

जॉय संस्था के टीम मेम्बर जय शर्मा का कहना है कि जो स्रोत में पानी है वो साफ है और पीने लायक है. लेकिन जैसे-जैसे वो पानी नीचे आता है वह पीने लायक बिल्कुल नहीं रहता है. ऐसा इसलिए क्योंकि उसमें बहुत सारे घरों की गंदगी है. साथ ही उस पानी में डेरी, इंडस्ट्री और दुकानों की गंदगी भी जा रही है. इन्हीं वजहों से नीचे बह रही ये नदियां पूरी तरह से प्रदूषित हो गई हैं. सुसवा पहुंचने तक इन नदियों की हालत बुरी हो जाती है. इस पानी को पीना तो दूर इसमें मछली भी नहीं रह सकती है.

हो सकती है घातक बीमारियां
इन तीनों नदियों में सीवरेज कचरा, डेरियों का गोबर, छोटे उद्योगों और अन्य संस्थानों की गंदगी जा रही है. इस वजह से इन नदियों के पानी में क्रोमियम, जिंक, आयरन, लेड और मैगनीज जैसे घातक रसायन अधिक मात्रा में पाए गए हैं. ये पदार्थ मिट्टी, जलीय जीवों के साथ ही जंगली जानवरों के लिए भी बेहद खतरनाक हैं. अहम बात ये है कि ये तीनों नदियां गंगा का हिस्सा बनने से पहले राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर बहती हैं. यही पानी पार्क के वन्य जीव-जंतु पीते होंगे. इस पानी के इस्तेमाल से घातक बीमारियों का शिकार होने से इंकार नहीं किया जा सकता है.
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नदियों का पर्यावरण संतुलन दिनोंदिन बिगड़ रहा है, जो मानव जीवन के लिए खतरे का संकेत है. नदियों का सीधा संबंध वायुमंडल से होता है. देहरादून की इन तीनों नदियों में जिस खतरनाक स्तर तक रसायन का स्तर पहुंच चुका है, ये मानव जीवन के साथ जीव-जंतुओं के लिए भी खतरे की घंटी है.

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First published: June 23, 2019, 2:45 PM IST
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