राजेश सूरी हत्याकांड में राष्ट्रपति कार्यालय ने भी दिए न्याय विभाग को कार्रवाई के निर्देश
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राजेश सूरी हत्याकांड में राष्ट्रपति कार्यालय ने भी दिए न्याय विभाग को कार्रवाई के निर्देश
राजेश सूरी हत्याकांड में राष्ट्रपति कार्यालय से न्याय विभाग को कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं.

पहले प्रधानमंत्री कार्यालय भी इस मामले में निर्देश जारी कर चुका है.

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अधिवक्ता राजेश सूरी हत्याकांड और सरकारी भूमियों पर कब्ज़ा कर खुर्द-बुर्द करने के आधा दर्जन से ज़्यादा मामलों में कार्रवाई के लिए अब राष्ट्रपति कार्यालय ने निर्देश जारी किए हैं. मृतक अधिवक्ता की बहन रीटा सूरी ने राष्ट्रपति को पत्र लिख निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की गुहार लगाई थी. राष्ट्रपति कार्यालय ने इस पर प्रतिक्रिया देते समय न्याय विभाग को पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय भी इस मामले में निर्देश जारी कर चुका है.

बहन का संघर्ष

बता दें कि अधिवक्ता राजेश सूरी ने राज्य सरकार की ज़मीनों पर कब्ज़ा कर 700 बीघा दौलत राम ट्रस्ट, 7000 बीघा अंगेलिया हाउसिंग और 20 करोड़ के स्टैम्प घोटाले सहित कई मामलों का खुलासा किया था. 30 नवंबर, 2014 को संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई थी. याचिकाकर्ता रीटा सूरी अपने भाई वकील राजेश सूरी की मौत के मामले की जांच के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं.



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जब राज्य सरकार से इंसाफ़ नहीं मिला तो अक्टूबर, 2017 को रीटा सूरी ने पीएमओ से इंसाफ़ की गुहार करते हुए पत्र लिखा. इसके साथ उन्होंने 400 पेज में अपने भाई की हत्या से संबंधित सभी दस्तावेज़ संलग्न किए थे. इनकी जांच करने के बाद केंद्रीय विधि मंत्रालय ने मुख्य सचिव को वह फ़ाइल भेजी और कहा कि शिकायतकर्ता ने जो भी दस्तावेज़ दिए हैं वह सही सबूत लग रहे हैं इसलिए इस मामने में कार्रवाई की जाए.

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रीटा सूरी का कहना है कि वह 2017 से इंतज़ार करती रहीं और कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने 2018 में आरटीआई लगाई. इसके जवाब में उन्हें पता चला कि उनकी दरख्वास्त और उससे संबंधित दस्वावेज़ सचिवालय से गायब हो गए हैं. दो बार आरटीआई लगाने के बाद भी यही जवाब मिला तो रीटा सूरी ने फिर केंद्र का रुख किया.

पीएमओ के आदेश भी अनसुने

उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय और विधि मंत्रालय में आरटीआई लगाई जिसके बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री कार्यालय से मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया और पूछा गया कि मामला बहुत संगीन है आप कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हो? लेकिन उत्तराखंड शासन पीएमओ से आए इस पत्र पर भी ख़ामोश रहा. इसके बाद विधि मंत्रालय से उच्च न्यायालय रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर कहा गया कि याचिकाकर्ता की जितनी भी रिट याचिकाएं लगी हैं, उन पर प्राथमिकता से सुनवाई करके न्याय दिलाएं.

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रीटा सूरी ने राष्ट्रपति कार्यालय में भी दरख्वास्त दी थी. अब राष्ट्रपति कार्यालय से भी उन्हें राहत भरी सूचना मिली है और उनकी दरख्वास्त पर कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं.

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