अपनों में ही फंसे प्रीतम सिंह के, कभी हरीश रावत, तो कभी किशोर उपाध्याय ने घेरा

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने बतौर विपक्षी दल अध्यक्ष प्रीतम सिंह को सरकारी बंगला दिए जाने पर ही सवाल उठा दिया.

Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: May 16, 2018, 7:23 PM IST
अपनों में ही फंसे प्रीतम सिंह के, कभी हरीश रावत, तो कभी किशोर उपाध्याय ने घेरा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कभी सीएम की तारीफ कर रहे हैं तो कभी अपने ही प्रदेश अध्यक्ष को घेरने वाले बयान दे रहे हैं.
Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: May 16, 2018, 7:23 PM IST
उत्तराखंड कांग्रेस में क्या चल रहा है यह इसके प्रदेश अध्यक्ष को समझ नहीं आ रहा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कभी सीएम की तारीफ कर रहे हैं तो कभी अपने ही प्रदेश अध्यक्ष को घेरने वाले बयान दे रहे हैं. ऐसा प्रीतम सिंह के अध्यक्ष बनने के बाद कई बार हो चुका है.

प्रीतम सिंह का बतौर अध्यक्ष एक साल का कार्यकाल पूरा तो हुआ लेकिन इस एक साल में पार्टी के दिग्गज नेताओं ने जो बयानबाज़ी की वह उनके लिए परेशानी का सबब ही बनी. चाहे पूर्व सीएम हरीश रावत हों या फिर पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, इनके बयानों ने सरकार को कम और अपने प्रदेश अध्यक्ष को ज्यादा हैरत में डाला.

हाल ही में पूर्व सीएम हरीश रावत ने एक बार फिर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की तारीफ की तो इसकी  सफ़ाई प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को देनी पड़ी. बतौर विपक्षी दल अध्यक्ष प्रीतम सिंह सीएम की नीतियों की आलोचना करते हैं लेकिन हरीश रावत के बयान ने उन्हें पसोपेश में डाल दिया है.

दरअसल कुछ दिन पहले ही हरीश रावत ने कहा था कि त्रिवेंद्र रावत तो ठीक काम कर रहे हैं लेकिन उनके मंत्री नहीं. हरीश रावत के बयान पर प्रतिक्रिया देने के बजाय प्रीतम सिंह ने उससे कन्नी काट ली. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें रावत के बयान की जानकारी नहीं है.

हरीश रावत ने भूमिका कमज़ोर की तो पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने प्रीतम सिंह पर सीधा हमला कर दिया. उन्हें बतौर विपक्षी दल अध्यक्ष प्रीतम सिंह को सरकारी बंगला दिए जाने पर ही सवाल उठा दिया.

हालांकि किशोर उपाध्याय ने सरकार के नाम पर सवाल उठाए थे लेकिन लपेटे में प्रीतम सिंह ही आए.  लेकिन इस पर पूछे गए सवाल को भी उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि पता नहीं किशोर उपाध्याय ने किस संदर्भ में यह बयान दिया है.

लेकिन पार्टी के ‘पूर्व’ हो गए नेता ही नहीं प्रीतम सिंह के साथ पार्टी ऑफ़िस साझा करने वाले नेता भी उन पर सवाल उठा रहे हैं. हाल ही में पार्टी के अनुसूचित विभाग की बैठक में भी कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के सह अध्यक्ष जय सिंह गौतम ने तो सीधे-सीधे प्रीतम सिंह पर पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करने का ही आरोप लगा दिया.

दरअसल प्रीतम सिंह की छवि सॉफ़्ट नेता की रही है. राज्य के बड़े नेताओं में शामिल प्रीतम सिंह की मुश्किल शायद यही छवि है क्योंकि साल भर बीतने के बावजूद उनके खाते में ऐसा एक भी आंदोलन या बयान या योजना नहीं है जिससे सरकार को मुश्किल हुई है.
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