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  • 'दलित CM' के बयान पर हरीश रावत को अपनों ने घेरा, कांग्रेस नेता बोले- बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते

'दलित CM' के बयान पर हरीश रावत को अपनों ने घेरा, कांग्रेस नेता बोले- बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते

हरीश रावत और प्रीतम सिंह परिवर्तन रैली के दौरान एक ट्रैक्टर पर सवार दिखे थे. (File Photo)

हरीश रावत और प्रीतम सिंह परिवर्तन रैली के दौरान एक ट्रैक्टर पर सवार दिखे थे. (File Photo)

Uttarakhand Political News : कांग्रेस के लिए उत्तराखंड चुनाव की कमान संभाल रहे हरीश रावत पार्टी में अलग-थलग पड़ते दिख रहे हैं. उनके ताज़ा बयान पर भाजपा की प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस के नेताओं ने भी नाराज़गी ज़ाहिर की है.

  • News18Hindi
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    देहरादून. उत्तराखंड में किसी ‘दलित को मुख्यमंत्री’ के रूप में देखने की इच्छा का बयान देकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी पार्टी के भीतर ही घिरते नज़र आ रहे हैं. भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया के बाद अब कांग्रेस के उत्तराखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने रावत पर सीधा कटाक्ष किया है. प्रीतम सिंह ने ‘बहुत देर कर दी हुज़ूर आते-आते’ कहकर साफ ज़ाहिर कर दिया कि रावत का यह बयान पार्टी के भीतर खासी अहमियत नहीं रखता. वहीं, इस बयान के बाद किशोर उपाध्याय अपना गुस्सा साफ तौर पर ज़ाहिर करने से नहीं चूके.

    हरीश रावत के ‘दलित सीएम’ वाले बयान पर चुटकी लेते हुए कहा-बहुत देर कर दी हुजूर आते–आते. प्रीतम सिंह ने इसे देर से आने वाला बयान बताते हुए कहा, ‘ऐसा होना चाहिए था. ऐसा 2002 और 2012 व 2013 में भी होना चाहिए था, लेकिन तब नहीं हो सका.’ खबरों के माध्यम से प्रीतम सिंह की यह जो प्रतिक्रिया आई है, इसे लेकर सियासी जानकार मान रहे हैं कि किसी समय हरीश रावत के करीबी रहे प्रीतम सिंह अब रावत के विश्वसनीय दायरे से दूर होकर उत्तराखंड कांग्रेस में एक नये ध्रुव बन चुके हैं.

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    उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं प्रीतम सिंह.

    उपाध्याय भड़के, कहा, हार की समीक्षा अब हो

    दूसरी तरफ, किशोर उपाध्याय नज़र आ रहे हैं, जो एक समय में हरीश रावत के खेमे के बड़े नेता माने जाते थे, लेकिन उन्होंने रावत के ताज़ा बयान के बाद मौका पाते हुए कहा, ‘साल 2017 में कांग्रेस चुनाव में क्यों हारी? इसकी कोई समीक्षा नहीं हुई और हार का ठीकरा मेरे सिर फोड़ दिया गया. जबकि अगले विधानसभा चुनाव कुछ ही महीने दूर रह गए हैं, अब इस बात की पूरी समीक्षा होनी चाहिए.’ साफ तौर पर कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच किस तरह उलझनें हैं, ये बयान संकेत दे रहे हैं.

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    भाजपा ने भी की थी आलोचना

    इससे पहले, रावत के बयान को जातिवादी राजनीति बताकर भाजपा ने साफ कहा था कि यह बयान वोटरों को छलावा देने वाला है. ‘कांग्रेस जो सबक देती फिरती है, खुद उस पर अमल नहीं करती. रावत का बयान अपने आप में ही विरोधाभासी है.’ भाजपा के बाद अब कांग्रेस नेताओं के कटाक्ष से हरीश रावत की स्थिति चर्चा में है, क्योंकि उनका बयान यह ज़ाहिर कर चुका है कि वह अगले मुख्यमंत्री पद की दौड़ में खुद को नहीं देख रहे हैं.

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