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चार धाम श्राइन बोर्ड के लिए 10 करोड़ के प्रावधान को तीर्थ-पुरोहितों ने बताया धोखा, आंदोलन का ऐलान

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: December 5, 2019, 7:40 PM IST
चार धाम श्राइन बोर्ड के लिए 10 करोड़ के प्रावधान को तीर्थ-पुरोहितों ने बताया धोखा, आंदोलन का ऐलान
धन सिंह रावत ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के साथ बैठक की.

तीर्थ पुरोहित और हक हकूकधारी महापंचायत का कहना है कि सरकार को किसी की बात सुननी ही नहीं है बस यह दिखावा करना है कि वह बात कर रही है.

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देहरादून. चार धाम के तीर्थ-पुरोहित (tith purohit) और हक हकूकधारियों (right holders) ने ऐलान कर दिया है कि इस बार न कोई चल-विग्रह डोली उठेगी और न ही तीर्थ पुरोहित कोई धार्मिक अनुष्ठान करवाएंगे. चारों धामों में सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बंद रहेंगे और डोली-खच्चर भी नहीं चलेंगे. चार धाम श्राइन बोर्ड (char dham shrine board) के लिए बजट (budget) में 10 करोड़ रुपये के प्रावधान को एक हफ़्ते में दूसरी बार पीठ में छुरा भोंकने का काम कहते तीर्थ पुरोहित और हक हकूकधारी महापंचायत ने लंबे आंदोलन का ऐलान भी कर दिया है.

एक हफ़्ते में दूसरी बार छल 

उत्तराखंड के चार धाम के तीर्थ-पुरोहित और हक-हकूकधारी चार धाम श्राइन बोर्ड बनाने का विरोध कर रहे हैं. सरकार लगातार यह कह रही है कि तीर्थ-पुरोहितों और हक-हकूकधारियों को कोई नुक़सान नहीं होने दिया जाएगा. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज भी न्यूज़ 18 संवाददाता किशोर रावत से बातचीत में दावा किया कि तीर्थ-पुरोहितों को मना लिया जाएगा.

लेकिन तीर्थ पुरोहित और हक हकूकधारी महापंचायत को इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा. महापंचायत के प्रवक्ता बृजेश सती कहते हैं कि सरकार ने एक हफ़्ते में दूसरी बार तीर्थ पुरोहित समाज के साथ छल किया है. तीर्थ पुरोहित समाज विधानसभा घेराव के लिए सड़क पर उतरा तो सरकार ने बातचीत के लिए बुला लिया.

फ़ैसला कर लिया है, भरमा रही है सरकार 

बता दें कि महापंचायत के बुधवार के प्रदर्शन के बाद आज उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धन सिंह रावत की महापंचायत के साथ दूसरी बैठक थी. बृजेश सती के अनुसार बैठक में गंगोत्री के विधायक गोपाल रावत, यमुनोत्री के विधायक केदार सिंह रावत के साथ ही देवप्रयाग के विधायक विनोद कंडारी भी शामिल हुए थे. बैठक में कहा गया कि सरकार कोई भी कदम उठाने से पहले आप लोगों का पक्ष सुनेगी और उसके बाद ही कोई कदम उठाएगी. यह भी कहा गया कि आप लोगों के हक-हकूक में कोई छेड़खानी नहीं की जाएगी.

सती कहते हैं कि इसी दौरान सरकार ने एक हफ़्ते के दौरान दूसरी बार धोखा किया. जब विधायकों के साथ सरकार के प्रतिनधि के रूप में मंत्री महापंचायत से बात कर रहे हैं, बात सुनने का आश्वासन दे रहे और उधर बजट पेश कर दिया जिसमें 10 करोड़ रुपये का प्रावधान चार धाम श्राइन बोर्ड के लिए कर दिया. सती के अनुसार इसका अर्थ यह है कि सरकार ने फ़ैसला कर लिया है वह बस तीर्थ पुरोहितों-हक हकूकधारियों को भरमा रही है.6-7 से धरना-प्रदर्शन 

इससे पहले इस विधेयक के प्रावधान पर तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के साथ चार धाम विकास परिषद के माध्यम से बात की जा रही थी लेकिन तभी कैबिनेट ने चार धाम श्राइन बोर्ड का प्रस्ताव पारित कर दिया था. ये दोनों उदाहरण दिखाते हैं कि सरकार को किसी की बात सुननी ही नहीं है बस यह दिखावा करना है कि वह बात कर रही है.

बृजेश सती के अनुसार महापंचायत ने एक आपात बैठक कर इसके विरोध में लंबा आंदोलन करने का ऐलान कर दिया है. 6-7 तारीख से चारों धामों के तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी आंदोलन शुरु कर रहे हैं. चार धामों के तीर्थ-पुरोहित हक-हकूधारियों सभी ज़िलों में ग्राम, ब्लॉक और ज़िला स्तर पर धरना प्रदर्शन करेंगे.

कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं होगा 

महापंचायत ने इसके बाद 18 तारीख को उत्तरकाशी और 20 तारीख को श्रीनगर में महारैली आयोजित करने का फ़ैसला किया है. सती कहते हैं कि इसके बाद भी सरकार नहीं मानी तो तीर्थ पुरोहित किसी  धार्मिक परंपरा का पालन नहीं करेंगे. न तो चल विग्रह डोलियां उठेंगीं, न अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे. सरकार की हठधर्मिता के विरोध में चारों धामों के व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी बंद रहेंगे और घोड़े-खच्चर वालों, डंडी-कंडी वालों से भी सरकार की मनमानी का विरोध करने के लिए बात की जाएगी.

न्यूज़ 18 ने उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धन सिंह रावत से भी इस विषय में बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई. जैसे ही हमें उनका पक्ष प्राप्त होगा हम उसे प्रकाशित करेंगे.

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First published: December 5, 2019, 7:36 PM IST
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