रविंद्र जुगरान का CM को खुला पत्र... शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण की रस्म अदायगी कब तक चलेगी?
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रविंद्र जुगरान का CM को खुला पत्र... शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण की रस्म अदायगी कब तक चलेगी?
रविंद्र जुगरान ने रामपुर तिराहा कांड की 25वीं बरसी पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को खुला पत्र लिखकर तीखे सवाल पूछे हैं.

'ऐसा सुखद संयोग हमेशा नहीं रहेगा कि केंद्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तीनों हमारी सरकारें हैं, वह भी प्रचंड बहुमत की. फिर भी कोई कार्रवाई नहीं, आखिर क्यों?'

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राज्य आंदोलनकारी और बीजेपी नेता रविंद्र जुगरान एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार जुगरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को खुला पत्र लिखने की वजह से सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं. रामपुर तिराहा कांड की 25वीं बरसी से ठीक पहले लिखे इस पत्र में जुगरान ने बेहद तीखी भाषा में अब तक की राज्य सरकारों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. जुगरान ने लिखा है, मुख्यमंत्री और पूरी विधानसभा दो अक्टूबर, 1994 को मुजफ्फरपुर में हुई वीभत्स घटना के बारे में जानती है लेकिन पिछले 25 साल से दो अक्टूबर को शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण करने की रस्म अदायगी ही की जा रही है. जुगरान ने पूछा है कि आखिर यह कब तक चलेगा.

जुगरान ने यह भी कि कहा है, “आपको (मुख्यमंत्री को) संबोधित यह पत्र राज्य की विधायिका, सभी पूर्व व वर्तमान जनप्रतिनिधियों, सभी सरकारों, सांसदों को संबोधित है. इसका अर्थ यह है कि आप अकेले उत्तरायी नहीं सभी बराबर के गुनगार हैं. ऐसा सुखद संयोग हमेशा नहीं रहेगा कि केंद्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तीनों जगह एक ही दल अर्थात हमारी भाजपा की सरकारें हैं, वह भी प्रचंड बहुमत की. फिर भी कोई कार्रवाई नहीं, आखिर क्यों?”

रविंद्र जुगरान ने अपने पत्र में कुल 24 पॉएंट्स दिए हैं. हम इनमें से मुख्य को यहां दे रहे हैं...



ravindra Jugran's Open Letter to CM, मुख्यमंत्री को लिखे रविंद्र जुगरान के पत्र का पहला पन्ना.
मुख्यमंत्री को लिखे रविंद्र जुगरान के पत्र का पहला पन्ना.

पत्र की ख़ास बातें

  • दुनिया में अहिंसा के पुजारी और प्रतीक महात्मा गांधी की जयंती पर जघन्य, बर्बर, अमानुषिक, मानवता को कलंकित करने की वाली घटना को अंजाम दिया गया.

  • यह राज्य प्रायोजित आतंकवाद का जीता-जागता उदाहरण था.

  • सीबीआई, महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में साफ़ लिखा है कि निहत्थे, भोले-भाले उत्तराखंड वासियों के साथ कैसे इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया.

  • मातृशक्ति की आवाज़ को दबाने, डराने, चुप करने के लिए ही उनके साथ वीभत्स, घिनौना, शर्मनाक, लज्जाजनक दुराचार और बलात्कार की घटना को अंजाम दिया गया.

  • 25 वर्ष हो गए पर राज्य की विधायिका ने राज्य बनने से पूर्व व राज्य बनने के बाद भी राज्य की अस्मिता, मान-सम्मान-स्वाभिमान और न्याय के लिए कभी कोई पहल तक नहीं की.

  • आप लोग उत्तराखंड के सच्चे, ईमानदार, निष्ठावान, समर्पित योग्य प्रतिनिधि कैसे हो सकते हैं?


ravindra Jugran's Open Letter to CM, मुख्यमंत्री को लिखे रविंद्र जुगरान के पत्र का दूसरा पन्ना.
मुख्यमंत्री को लिखे रविंद्र जुगरान के पत्र का दूसरा पन्ना.


  • शहीदों की शहादत, मातृशक्ति का अपमान इसके लिए 25 वर्षों से राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले, राज्य की विधायिका, अब तक की सभी निर्वाचित सरकारें बराबर की दोषी हैं. इसके लिए आप लोगों को क्षमा नहीं किया जा सकता.

  • शहीदों की शहादत, मातृशक्ति की अस्मिता पर केवल राजनैतिक रोटियां सेंकी आप सभी ने.

  • शहीदों की शहादत और मातृशक्ति के अपमान को समय-समय पर अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा और हितों के लिए हथियार बनाया आपने.

  • तख्त और राज की भूख ने आपको सब कुछ भुला दिया.

  • संभवतः आज भी आप और राज्य की विधायिका यही कर रही है.

  • कभी जानने की कोशिश की आपने कि इन 25 वर्षों में माननीय न्यायालय के अंदर जो केस चल रहे हैं उनकी स्थिति क्या है?

  • शहीदों के परिवारों और उन महिलाओं को, जिनकी अस्मिता के साथ खिलवाड़ हुआ था, उनको लावारिस छोड़ दिया आपने जैसे उनका कोई संरक्षक नहीं है.

  • जिस राज्य व्यवस्था ने न्याय दिलाना था, उसकी भूमिका पर प्रश्न चिन्ह है.


ravindra Jugran's Open Letter to CM, मुख्यमंत्री को लिखे रविंद्र जुगरान के पत्र का दूसरा पन्ना.
मुख्यमंत्री को लिखे रविंद्र जुगरान के पत्र का तीसरा पन्ना.


  • सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन 25 वर्षों में आपकी असंवेदनशीलता, उपेक्षा के चलते राज्य वासियों, शहीद परिवारों, पीड़ितों को तो न्याय नहीं मिला पर दोषियों की मदद होती रही और वह एक के बाद एक या तो प्रोन्नति पाते गए या फिर उनमें से कई लोग अब इस दुनिया में जीवित नहीं रहे.

  • बेहतर होगा कि आप अपनी कमियों, गल्तियों पर सिंहावलोकन कर प्राश्चित कर और इस संदर्भ में क्या कर सकते हैं, सोचें और विचार करें.

  • राज्य गठन के बाद राज्य की विधानसभा को पहला काम सर्वसम्मति से संकल्प पारित कर दोषियों को सज़ा दिलाने का करना चाहिए था.


अंत में जुगरान ने लिखा है कि वह यह भी बताना चाहते हैं कि वह 2 अक्टूबर, 1994 के रामपुर तिराहा मुजफ़्फ़रनगर कांड की घटना के प्रत्यक्षदर्शी और उत्पीड़ित भी हैं.

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