दिग्‍गज नेताओं की वजह से उत्तराखंड में 'डूब' रही है कांग्रेस, जानिए क्‍यों?

उत्तराखंड में कांग्रेस का हर नेता अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग की तर्ज पर काम कर रहा है.

Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: July 24, 2019, 4:28 PM IST
दिग्‍गज नेताओं की वजह से उत्तराखंड में 'डूब' रही है कांग्रेस, जानिए क्‍यों?
हरीश रावत अकेले ही सरकार से टकरा रहे हैं.
Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: July 24, 2019, 4:28 PM IST
उत्तराखंड में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद भी कांग्रेस के अंदर गुटबाजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा हैं. पार्टी के दिग्गज भले ही एक मंच साझा कर रहे हों, लेकिन उनके शिकवे गाहे बगाहे सामने आ ही जाते हैं. हालांकि इस समय पार्टी के अंदर जो सबसे असहज दिखाई दे रहा है, वो पार्टी प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह हैं. जबकि इसका कारण सूबे में मौजूद कांग्रेस के दिग्‍गज नेता ही हैं.

हरीश रावत ने अपनाई ये राह
दरअसल, अपने स्तर पर इस समय पार्टी के नेता अलग-अलग आंदोलन प्रदेश में चला रहे हैं. पूर्व मुख्‍यमंत्री हरीश रावत पहले ही पूरे प्रदेश में अपने तरीके से मुद्दों को उठा रहे हैं और कई मर्तबा तो ये भी देखने मे आया कि किसी मसले पर वो पार्टी से पहले रिएक्ट करने के साथ सड़कों पर उतर आते हैं. जबकि हाल ही में हीलटाप शराब के मामले में वो अकेले ही सरकार से टकराते दिखाई दिए.

पूर्व मुख्‍यमंत्री हरीश रावत पहले ही पूरे प्रदेश में अपने तरीके से मुद्दों को उठा रहे हैं.


किशोर चला रहे हैं वन आंदोलन
यही नहीं, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी इन दिनों अपने स्तर पर वन आंदोलन चला रहे हैं. उनके साथ प्रदेश के दूसरे दल भी शामिल हैं. हाल ही में हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के एन्कलेव के लिए उन्होने पार्टी लाइन से इतर एक पत्र सभी राज्यों के सीएम को लिखा है.

बिष्‍ट ने पकड़ी ये राह
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जबकि पार्टी के एक दूसरे नेता जोत सिंह बिष्‍ट पंचायती राज एक्ट में हुए संशोधन को लेकर पूरे प्रदेश में संगठन तैयार करने में जुटे हैं. जबकि पार्टी इस मसले पर उतनी मुखर दिखाई नहीं दे रही है.
जोत सिंह बिष्ट का कहना है कि इस आंदोलन को पार्टी के साथ इसलिए नहीं लड़ा जा सकता है क्योंकि इसमें सभी दलों के लोग शामिल हैं.

अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग
उत्तराखंड में कांग्रेस का हर नेता अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग की तर्ज पर काम कर रहा है. पार्टी लाइन और अनुशासन से बंधा हुआ फिलहाल कोई नेता दिखाई नहीं दे रहा है. हर किसी नेता के अलग मोर्चे हैं और अलग ही लड़ाई है. ऐसे में सवाल प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह से भी किए जा रहे हैं. ऐसे आंदोलनों पर पार्टी की लाईन क्या है? इसका जवाब देते हुए प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह कहते हैं कि व्यक्तिगत रूप से जो आंदोलन कर रहे हैं उनसे पार्टी का कोई लेना देना नहीं है. सच कहा जाए तो दिग्‍गज नेताओं की अलग-अलग लड़ाई की वजह से कांग्रेस को कोई फायदा नहीं हो रहा है.

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First published: July 24, 2019, 3:40 PM IST
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